कभी भी भरभराकर गिर सकती है नेपाल की अर्थव्यवस्था, केन्द्रीय बैंक ने किया आगाह, श्रीलंका की तरह स्थिति?
कोविड-19 ने श्रीलंका के टूरिज्म उद्योग की कमर तोड़ दी और इसीलिए श्रीलंका की स्थिति और भी ज्यादा खराब हुई है और नेपाल की अर्थव्यवस्था भी टूरिज्म सेक्टर पर टिकी हुई है और नेपाल संकट में फंस गया है।
काठमांडू, अप्रैल 08: श्रीलंका की तरह नेपाल की अर्थव्यवस्था भी कभी भी भरभराकर गिर सकती है और नेपाली केन्द्रीय बैंक ने इसे लेकर देश की सरकार को आगाह कर दिया है। नेपाल की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए नेपाली केन्द्रीय बैंक पूरी ताकत के साथ जुट गया है और केन्द्रीय बैंक ने नेपाली वित्त मंत्रालय को लिखी एक चिट्ठी में आगाह करते हुए कहा है, कि सरकार को फौरन पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर नियंत्रण लगाना चाहिए।

केन्द्रीय बैंक ने दी चेतावनी
नेपाली केन्द्रीय बैंक ने देश के वित्त मंत्रालय को जो चेतावनी भरी चिट्ठी भेजी है, उसमें सरकार से कहा गया है कि, सरकार को फौरन गाड़ियों के साथ साथ दूसरी चीजों पर दी जाने वाली लोन पर रोक लगानी चाहिए। देश के दरवाजे पर खड़े बड़े आर्थिक संकट को देखते हुए नेपाल राष्ट्रीय बैंक ने वित्त मंत्रालय को निर्देश दिया है, कि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन के आयात पर नियंत्रण जरूरी है। वर्तमान में नेपाल, भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के लिए हर महीने 24 से 29 अरब रुपये का भुगतान करता है। लेकिन, केंद्रीय बैंक का कहना है कि यह राशि घटकर 12 से 13 अरब रुपये प्रति माह होनी चाहिए। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि, अगर इस सुझाव को लागू किया जाता है, तो इससे ईंधन की गंभीर कमी हो जाएगी।

क्या फंस गई है नेपाल सरकार?
नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने कहा है कि, जुलाई 2021 तक यह ईंधन पर लगभग 14 अरब रुपये प्रति माह खर्च करेगा। हालांकि, निगम के एक कार्यवाहक प्रबंध निदेशक नागेंद्र साह के अनुसार, निरंतर मूल्य वृद्धि ने खर्च को लगभग दोगुना कर दिया है। सिर्फ पेट्रोलियम उत्पाद ही नहीं, बल्कि नेपाली बैंकों ने कहा है कि, वे देश के तेजी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बहाव को रोकने के लिए गैर-जरूरी सामानों के आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खोलने से व्यापारियों को "हतोत्साहित" करे और केंद्रीय बैंक के "मौखिक निर्देश" का पालन करें।

नेपाली बैंकों को किस बात का डर?
नेपाली बैंक के अधिकारियों ने कहा कि हाल के महीनों में भारी मात्रा में आयात से विदेशी मुद्रा देश से बाहर जा रही है, जिससे भुगतान संतुलन चरमरा गया है और संकट की चिंता बढ़ गई है। बैंकों के मुताबिक, उन्हें केंद्रीय बैंक से इस संबंध में औपचारिक सूचना नहीं मिली है। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार उपाध्याय ने कहा कि, "नेपाल राष्ट्र बैंक के निर्देशों पर काम करते हुए हमने गैर-जरूरी सामानों के लिए एलसी खोलने को हतोत्साहित किया है।" उन्होंने कहा कि, 'हालांकि, हमने अभी तक आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी, कृषि सामानों के आयात पर एलसी को प्रतिबंधित नहीं किया है'।

क्यों संकट में फंस रहा नेपाल?
वित्त वर्ष 2021-22 के पहले सात महीनों के दौरान नेपाल में आयात 42.8 प्रतिशत बढ़कर 1.14 ट्रिलियन रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसमें सिर्फ 0.01 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इसके साथ ही, पेट्रोलियम उत्पादों, दवाओं, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल, परिवहन उपकरण, वाहनों और अन्य भागों की खरीद में तेजी से वृद्धि हुई है। नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, भुगतान संतुलन ने समीक्षा अवधि में 247.03 अरब रुपये का घाटा दिखाया, जबकि पिछले साल समान अवधि में 97.36 अरब रुपये का फायदा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल जुलाई में नेपाल के पास 11.75 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो इस साल फरवरी महीने में घटकर 9.75 अरब डॉलर हो गया है, यानि, अब नेपाल के पास जरूरी सामान खरीदने की क्षमता घटकर सिर्फ 6 महीने की रह गई है, जबकि ये क्षमता कम से कम 7 महीने का होना चाहिए। लिहाजा, नेपाल केन्द्रीय बैंक ने सरकार को आगाह किया है।

पर्यटन सेक्टर में गिरावट से नुकसान
कोविड-19 ने श्रीलंका के टूरिज्म उद्योग की कमर तोड़ दी और इसीलिए श्रीलंका की स्थिति और भी ज्यादा खराब हुई है और नेपाल की अर्थव्यवस्था भी टूरिज्म सेक्टर पर टिकी हुई है और कोविड की वजह से पूरी दुनिया के पर्यटन सेक्टर से प्रभावित हुआ और नेपाल भी इससे बच नहीं पाया। लिहाजा, नेपाल में विदेशी मुद्रा का आना कम हो गया, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। देश का व्यापार घाटा बढ़कर 207 करोड़ डॉलर का हो गया है, जो नेपाल जैसे देश के लिए चिंताजनक स्थिति है।

नेपाल बैंक ने जताई गहरी चिंता
वहीं, नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुणकर भट्ट ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई है और कहा कि, "केंद्रीय बैंक के अस्थायी रूप से विलासिता के सामानों के आयात को प्रतिबंधित करने का फैसला मौजूदा आर्थिक संकेतकों को देखते हुए संभावित आर्थिक संकट से बचने के लिए है।" उन्होंने कहा कि, 'हमने बैंकों को किसी खास सामान के लिए एलसी खोलने का निर्देश नहीं दिया है। उपाध्याय, जो कृषि विकास बैंक के सीईओ भी हैं, उन्होंने कहा कि, "केंद्रीय बैंक वित्तीय संकट से बचने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण के लिए आयात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।"
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