Nepal Election 2026: भारत के लिए क्यों जरूरी है नेपाल का ये चुनाव? किसके हाथ लगेगी सत्ता? समझें पूरा गणित
Nepal election 2026: नेपाल में आम चुनावों के लिए मतदान चल रहा है। यह चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह पिछले साल हुए हिंसक Gen Z आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनाव है। इसी आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की सरकार को गिरा दिया था। मतदान शुरू होते ही बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे और माहौल काफी उत्साहपूर्ण नजर आया।
कितनी आबादी, कितने सांसद?
इन चुनावों में 1.89 करोड़ से अधिक योग्य नेपाली मतदाता 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहे हैं। चुनाव दो अलग-अलग तरीकों से हो रहा है। डायरेक्ट वोटिंग सिस्टम के तहत 165 सीटों के लिए 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं प्रपोर्शनल रिप्रजेंटेशन सिस्टम के जरिए 110 सीटों के लिए 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी भी इस चुनाव को और ज्यादा कन्फ्यूजन से भरा बना रही है।

नेपाल की राजनीति दो हिस्सों में बंटी
इस समय नेपाल की राजनीति साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। एक तरफ पारंपरिक और स्थापित राजनीतिक दल हैं, जबकि दूसरी तरफ सुधारवादी एजेंडा लेकर सामने आए नए और उभरते दल हैं। यही वजह है कि इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और अनिश्चित माना जा रहा है। जहां किसी एक या दो नेताओं के पक्ष में माहौल न होकर, सब जगह नए-नए चेहरों की बात हो रही है।
पुराने दलों की मजबूत मौजूदगी
नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक शक्तियों में सबसे प्रमुख नाम के पी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (Unified Marxist-Leninist) का है। इसके अलावा पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी भी बड़ी ताकत मानी जाती है। प्रचंड की पार्टी ने यह दावा जरूर किया है कि वह Gen Z की चिंताओं और मुद्दों को हल करना चाहती है, लेकिन पार्टी के नेतृत्व में अब तक युवा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
उभरते दल और युवा राजनीति की एंट्री
दूसरी तरफ कई नए दल भी तेजी से उभर रहे हैं। इनमें रवि लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) प्रमुख है, जो काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र शाह के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा नेपाली कांग्रेस के भीतर गगन थापा के नेतृत्व वाला सुधारवादी धड़ा भी चर्चा में है। इन दलों ने पिछले साल हुए युवा आंदोलन में उठाए गए मुद्दों का खुलकर समर्थन किया है और खुद को बदलाव की ताकत के रूप में पेश किया है।
छोटे लेकिन चर्चित नए खिलाड़ी
इस चुनाव में कुछ और नए राजनीतिक खिलाड़ी भी सामने आए हैं। इनमें कुलमान घिसिंग की उज्जयालो नेपाल पार्टी और धरान के पूर्व मेयर हरका संपंग की श्रम शक्ति पार्टी शामिल हैं। हालांकि फिलहाल इन दलों का प्रभाव कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री पद के चेहरे भी तय
इस चुनाव में कई दलों ने पहले ही अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 35 वर्षीय काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। वहीं नेपाली कांग्रेस ने 49 साल के गगन थापा को आगे बढ़ाया है। दूसरी ओर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN-UML) ने 75 साल के पी शर्मा ओली को अपने प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है।
रोटी-बेटी का रिश्ता, खुला बॉर्डर और राजनीतिक तनातनी
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से रोटी-बेटी का रिश्ता माना जाता है। दोनों देशों के बीच 1950 की मैत्री संधि पर आधारित खुली सीमा है, जिसके कारण लोगों का आना-जाना बेहद आसान है। भारतीय करंसी भी वहां बिना कन्वर्ट किए आसानी से चलाई जा सकती है। यही वजह है कि नेपाल की राजनीति अक्सर भारत के लिए भी एक तरह से घरेलू मुद्दा बन जाती है।
वहीं, जब से चीन का नेपाल में दखल बढ़ा है, भारत की निगाह तिरछी होती रही है। अगर वहां कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आती है तो उसका झुकाव चीन की तरफ होने लगता है। यही भारत की असल चिंता का कारण है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव के नतीजे नेपाल की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।
भारत को नेपाल चुनाव की चिंता क्यों?
नेपाल के इन चुनावों पर भारत की भी खास नजर है। 5 मार्च 2026 को होने वाले इस आम चुनाव को भारत रणनीतिक नजर से देख रहा है। नेपाल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बफर स्टेट माना जाता है, और यहां की राजनीतिक दिशा पूरे क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
Gen Z आंदोलन के बाद बदली राजनीति
सितंबर 2025 में हुए Gen Z प्रोटेस्ट ने नेपाल की राजनीति को पूरी तरह हिला दिया था। इस आंदोलन के कारण के पी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी और देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी। अब भारत और क्षेत्र के दूसरे देश यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि क्या इन चुनावों के बाद नेपाल में एक अधिक स्थिर और भारत-समर्थक सरकार उभरकर सामने आती है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
-
Nepal: बालेन बने नेपाल के नए 'शाह', सबसे युवा प्रधानमंत्री का खिताब किया अपने नाम, भारत से भी आई बधाई -
'Monalisa झूठी है', महाकुंभ वायरल गर्ल की मां का बड़ा दावा, पिता जय सिंह ने सबके सामने रखा बेटी का ऐसा सच -
Monalisa Caste: मुस्लिम मर्द से शादी करने वाली मोनालिसा की क्या है जाति? क्या कर लिया धर्म परिवर्तन? -
IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी रद्द, BCCI ने अचानक ले लिया बड़ा फैसला, मैच पर भी मंडराए संकट के बादल? -
Iran US War: ईरान ने खाक किए अमेरिकी बेस, बताया अब किसकी बारी? खौफनाक दावे से मचा हड़कंप -
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, ईरान जंग के बीच इस कंपनी ने बढ़ाई कीमतें, ये है रेट -
Energy Lockdown: एनर्जी लॉकडाउन क्या है? कब लगाया जाता है? आम पब्लिक पर कितना असर? हर सवाल का जवाब -
Fact Check: क्या सच में देश में लगने वाला है Lockdown? क्या है वायरल दावों का सच? -
LPG Price Today: क्या राम नवमी पर बढ़ गए सिलेंडर के दाम? आपके शहर में आज क्या है रेट? -
Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी होने लगा महंगा, गोल्ड 6000 और सिल्वर के 10,000 बढ़े भाव, अब ये है रेट -
Nitish Kumar का मास्टरस्ट्रोक! राज्यसभा गए पर CM पद पर अब भी सस्पेंस! 14 अप्रैल के बाद बिहार को मिलेगा नया CM? -
राजस्थान रॉयल्स की 13,500 करोड़ की डील रुक गई? बॉम्बे हाई कोर्ट में जीत से राज कुंद्रा ने पलटा गेम












Click it and Unblock the Notifications