Nepal: भारत दौरे के ठीक बाद चीन जा रहे हैं नेपाली विदेश मंत्री? बीजिंग को क्या संदेश देना चाहती है बालेन सरकार
Nepal Foreign Minister China Visit: भारत दौरे के महज एक हफ्ते बाद नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal अब चीन के दौरे पर जा रहे हैं। 14 से 17 जून के बीच बीजिंग में उनकी मुलाकात चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से होगी। सवाल यह है कि आखिर भारत से लौटते ही नेपाल ने चीन की तरफ रुख क्यों किया?
दरअसल नेपाल लंबे समय से भारत और चीन के बीच "बैलेंसिंग एक्ट" की नीति अपनाता रहा है। नई सरकार भी दोनों पड़ोसियों के साथ रिश्ते मजबूत रखना चाहती है। ऐसे में यह दौरा सिर्फ एक डिप्लोमैटिक विजिट नहीं, बल्कि नेपाल की रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

Shisir Khanal Beijing visit: भारत के तुरंत बाद चीन क्यों? क्या है बैलेंसिंग एक्ट?
नेपाल की विदेश नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य दोनों बड़े पड़ोसियों भारत और चीन के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना है। भारत यात्रा के बाद चीन जाना इसी संदेश का हिस्सा माना जा रहा है कि काठमांडू किसी एक खेमे में नहीं है। नेपाल यह दिखाना चाहता है कि वह नई सरकार के दौर में दोनों देशों को बराबर महत्व दे रहा है।
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चीन को कौन सा मैसेज देना चाहता है नेपाल?
नेपाल नहीं चाहता कि भारत के साथ बढ़ती बातचीत को लेकर बीजिंग में कोई गलत संदेश जाए। इसलिए विदेश मंत्री का यह दौरा चीन को भरोसा दिलाने की कोशिश भी माना जा रहा है कि नेपाल चीन के हितों और उसकी संवेदनशील चिंताओं का सम्मान करता रहेगा। आसान शब्दों में कहें तो काठमांडू चीन को "नो टेंशन" वाला संदेश देना चाहता है।
नेपाल की नजर आखिर किस फायदे पर है?
इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस इकोनॉमिक कोऑपरेशन माना जा रहा है। नेपाल चाहता है कि चीन से ज्यादा इन्वेस्टमेंट आए, ट्रेड बढ़े और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ें। बीजिंग में होने वाले इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस में नेपाली पक्ष चीनी कंपनियों को नेपाल में निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश करेगा।
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भारत-चीन प्रतिस्पर्धा में नेपाल की क्या रणनीति?
नेपाल जानता है कि भारत और चीन दोनों उसकी अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अहम हैं। इसलिए वह किसी एक पर पूरी तरह निर्भर होने की बजाय दोनों से फायदे लेने की नीति पर चल रहा है। यही वजह है कि नई सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि उसका फोकस जियोपॉलिटिक्स नहीं, बल्कि डेवलपमेंट है।
चीन दौरे में किन मुद्दों पर हो सकती है बड़ी चर्चा?
बीजिंग में कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेड, टूरिज्म और फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा नेपाल यह भी कोशिश करेगा कि चीन से आने वाले निवेश और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज हो। यही वजह है कि इस दौरे को नेपाल की इकोनॉमिक डिप्लोमेसी के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।












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