Balen Shah अचानक क्यों हो गए खामोश? भारत-नेपाल सीमा विवाद पर अब नहीं बोलेंगे एक भी शब्द, सामने आई ये बड़ी वजह
Balen Shah India Border Dispute: भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को लेकर नेपाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने फैसला किया है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह फिलहाल इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। पार्टी प्रमुख रवि लमिछाने ने कहा कि पहले पार्टी के भीतर इस विषय पर चर्चा होगी, उसके बाद केवल विदेश मंत्री शिशिर खनाल ही आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है और दोनों देश समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बालेन शाह के बयान से क्यों मचा विवाद?
31 मई को नेपाल की संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सीमा विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने दावा किया कि नेपाल की कुछ जमीन भारत के कब्जे में है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल ने इस विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन और चीन से मदद मांगी है। उनके इस बयान के बाद नेपाल की राजनीति में हंगामा शुरू हो गया। भारत ने भी तीसरे देश की भूमिका पर आपत्ति जताई। बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के कारण सरकार को अपने रुख में बदलाव करना पड़ा।
अब सिर्फ विदेश मंत्री ही देंगे प्रतिक्रिया
सर्वदलीय बैठक के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रवि लमिछाने ने साफ किया कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल प्रधानमंत्री कोई बयान नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पार्टी के अंदर चर्चा चल रही है और सरकार समाधान की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में किसी भी जल्दबाजी वाले बयान से बातचीत प्रभावित हो सकती है। इसलिए अब केवल विदेश मंत्री शिशिर खनाल ही सरकार का आधिकारिक पक्ष रखेंगे। जरूरत पड़ने पर पार्टी नेतृत्व अलग से प्रतिक्रिया देगा।
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भारत-नेपाल बातचीत से बनी सकारात्मक उम्मीद
सीमा विवाद के बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल 5 जून को भारत दौरे पर पहुंचे थे। नई दिल्ली में उन्होंने भारतीय नेतृत्व के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। नेपाल लौटने के बाद खनाल ने बातचीत को सकारात्मक बताया। दोनों देशों ने विवादित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने की इच्छा जताई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी वजह से नेपाल सरकार नहीं चाहती कि कोई नया बयान जारी शांति प्रक्रिया को प्रभावित करे या दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाए।
सीमा विवाद पर भारत का क्या कहना है?
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal के अनुसार भारत और नेपाल के बीच लगभग 98 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाया जा चुका है। उनका कहना है कि कुछ इलाकों में नदियों का रास्ता बदलने से सीमांकन से जुड़ी समस्याएं पैदा हुई हैं। भारत का मानना है कि बाकी बचे मुद्दों का भी समाधान बातचीत और आपसी सहमति से किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा संबंधी मैकेनिज्म भी काम कर रहे हैं, जो ऐसे मामलों को संभालते हैं।
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क्या है भारत-नेपाल सीमा विवाद की जड़?
नेपाल का कहना है कि 1816 की Treaty of Sugauli के तहत उसे मिलने वाली कुछ जमीनें पूरी तरह नहीं मिलीं। नेपाल का दावा है कि समय के साथ नदियों के रास्ते बदलने से कुछ क्षेत्र भारत के नियंत्रण में चले गए। इसके अलावा काली नदी के वास्तविक उद्गम को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक पुराने दस्तावेज और ऐतिहासिक रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं ताकि तथ्यों के आधार पर विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।












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