Munich Security Conference 2026 में भारत-कनाडा बातचीत के मायने क्या हैं? एस.जयशंकर ने किन मुद्दों पर लगाई मुहर
Munich Security Conference 2026: भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक रिश्तों में जमी बर्फ अब तेजी से पिघलती नजर आ रही है। पिछले कुछ समय के तनाव को पीछे छोड़ते हुए भारत और कनाडा अब 'प्रगति के पथ' पर साथ कदम बढ़ा रहे हैं।
जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच एक बेहद सकारात्मक और ठोस बातचीत हुई।

यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि सितंबर 2025 के बाद से दोनों मंत्रियों के बीच यह 5वीं बैठक थी, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और सुधारते रिश्तों का प्रमाण है। जानिए दोनों देशों के बीच ऊर्जा से लेकर टेक्नोलॉजी तक किन-किन मुद्दों पर सहमति बनी है...
S Jaishankar Anita Anand Meeting में 75 साल की विरासत और 'रोडमैप' पर जोर
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2025 में घोषित किए गए 'भारत-कनाडा संयुक्त रोडमैप' की प्रगति की समीक्षा की। इस रोडमैप का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ दोनों देश एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
इस दौरान अनीता आनंद ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे गतिशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो कनाडा के लिए एक अनिवार्य साझेदार है। दोनों देशों ने माना कि उनके बीच 75 साल से अधिक पुराने राजनयिक संबंध और मज़बूत 'पीपुल-टू-पीपुल' (जनता के बीच) संबंध एक मज़बूत नींव का काम करते हैं।
Trade and Energy Ties India Canada सहयोग के नए क्षेत्र: ऊर्जा, तकनीक और व्यापार
मंत्रियों के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र आर्थिक और तकनीकी सहयोग रहा। मुख्य रूप से इन तीन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
ऊर्जा (Energy): स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी।
टेक्नोलॉजी (Technology): तकनीकी फायदों को साझा करना और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करना।
व्यापार (Trade): कनाडा-भारत व्यापार को और अधिक व्यापक और विविध बनाना ताकि दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता (Economic Resilience) सुनिश्चित हो सके।
India-Canada के बीच व्यापारिक स्थिरता से मिलेगा लाभ
मंत्रियों ने पुष्टि की कि इस साझेदारी से दोनों देशों के व्यवसायों, उद्योगों और कामगारों के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। रोडमैप के प्राथमिकताओं को लागू करने के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए, उन्होंने व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निवेश के माहौल को और भी पारदर्शी बनाने पर चर्चा की।
जानकारों का मानना है कि सितंबर 2023 के विवाद के बाद से दोनों देशों ने 'कैलकुलेटेड रिस्क' और मैच्योर कूटनीति का परिचय दिया है। सितंबर 2025 के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों की यह पांचवीं मुलाकात इस बात का संकेत है कि भारत और कनाडा संवाद के जरिए संबंधों को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। हाल के समय में तनावपूर्ण दौर के बाद इस तरह की उच्चस्तरीय बातचीत को रिश्तों में संतुलन और सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में रोडमैप की प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन, व्यापार और निवेश समझौतों तकनीकी व ऊर्जा सहयोग पर और ठोस फैसले होने की संभावना जताई जा रही है। दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि भारत-कनाडा संबंध अब स्थिरता, व्यावहारिक सहयोग और साझा हितों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।












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