मां-बेटी को है 'वैम्पायर' जैसी एलर्जी, धूप में निकलते ही बदलने लगती है स्किन, लोग कहते हैं 'शैतान'
वाशिंगटन, 29 अक्टूबर। फिल्मों या सीरियल्स में आपने 'वैम्पायर' के बारे में तो जरूर देखा या सुना होगा। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी सूर्य की रोशनी होती है, जिसका सामना करने पर वह जल जाते हैं। हालांकि वास्तविकता में 'वैम्पायर' जैसे किसी पिशाच का वजूद नहीं है लेकिन अमेरिका में रहने वाली एक मां और उसकी 7 वर्षीय बेटी को लोग शैतान बताकर उनसे दूर भागते हैं। ऐसा क्यो हैं आइए जानते हैं।

मां-बेटी को है अजीबोगरीब बीमारी
दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें किसी न किसी चीज से एलर्जी है। कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां एलर्जी से पीड़ित इंसानों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे लोगों को उन चीजों से सावधान रहता पड़ता है जिनसे उन्हें एलर्जी है। अमेरिका के एरिजोना स्थित फीनिक्स में रहने वालीं 30 वर्षीय काइली सजाफ्रांस्की और उनकी बेटी ऐसी ही एक एलर्जी से पीड़ित हैं, जिसके चलते उन्हें वैम्पायर कहा जाता है।

16 साल की उम्र में पता चला
दरअसल, काइली सजाफ्रांस्की को 16 साल की उम्र में पता चला की उन्हें एरिथ्रोपोएटिक प्रोटोपोर्फिरिया (ईपीपी) नाम की एक दुर्लभ जेनेटिक रोग है। ईपीपी से पीड़ित इंसानों को सूर्य की रोशनी से एलर्जी होती है। काइली सनबाथ ले रही थीं, तब उन्हें शरीर पर तेज जलन महसूस हुई। अब काइली से ये बीमारी उनकी बड़ी बेटी रिवर को विरासत में मिल गई है, धूप में जाते ही उसकी त्वचा भी काइली की तरह झुलस जाती है।

'शैतान' समझ लोग भागते हैं दूर
इस दुर्लभ बीमारी 'वैम्पायर डिजीज' के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोग धूप में जाने से बचते हैं। काइली ने कहा, 'मुझे लोगों से अधिक धार्मिक समूहों द्वारा मेरी सन एलर्जी को लेकर काफी कुछ सुनने को मिलता है। मुझे 'राक्षस' बताया गया और कहा गया कि मेरे बच्चे जादू-टोना से हुए हैं। काइली के पांच बच्चे हैं। जब उन्हें पहली बार अपनी एलर्जी के बारे में पता चला तो उन्हें काफी तकलीफ झेलनी पड़ी। जलन की वजह से उनकी त्वचा शरीर छोड़ रही थी।

डॉक्टरों के टेस्ट के बाद हुआ खुलासा
काइली कहती हैं कि जब अपने बचपन के बारे में सोचती हूं तो यकीन नहीं होता, अपनी तकलीफ को बयां नहीं कर सकती थी। लेकिन जब 16 साल की उम्र में इसके बारे में पता चला तो यह शॉकिंग था। मैं बिस्तर पर लेट नहीं पाती थी, असहनीय दर्द होता था। मैं एक डॉक्टर के पास गई और कुछ टेस्ट करने के बाद रिपोर्ट में सूर्य से गंभीर एलर्जी का पता चला। जो मुझे भी परिवार से विरासत में मिली थी। इसे 'वैम्पायर डिजीज' के नाम से जाना जाता है।

इस वजब से बीमारी को कहा जाता है 'वैम्पायर डिजीज'
ईपीपी से पीड़ित इंसान में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है, उन्हें बहुत थकान होती है। वे इतने संवेदनशील होते हैं कि तेज रोशनी में पीले नजर आते हैं, इस वजह से वह धूप में नहीं जा सकते। और इन सब बातों ने इस दुर्लभ बीमारी को 'वैम्पायर' से जोड़कर देखा जाता है। काइली और उनकी बेटी सूरज से दूर ही रहती हैं। हालांकि काइली में यह समस्या अधिक है लेकिन उनकी बेटी रिवर को सनस्क्रीन या लोशन लगाने से परेशानी होती है।
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