सऊदी अरब के 'बेताज बादशाह' बने मोहम्मद बिन सलमान, बीमार पिता की जगह संभाली विरासत!
36 साल के हो चुके क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपने 86 वर्षीय बुजुर्ग पिता की लगातार खराब होती स्वास्थ्य को देखते हुए देश में उनकी विरासत को संभाल लिया है।
रियाद, दिसंबर 17: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान देश के बेताज बादशाह बन गये हैं। हालांक, पिछले कई महीनों से मोहम्मद बिन सलमान ही विदेशों नेताओं से मुलाकात करने से लेकर क्षेत्रीय सम्मेलनों में सऊदी अरब की तरफ से देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, लेकिन अब आधिकारिक तौर पर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपने बुजुर्ग पिता से बागडोर संभाल रहे हैं और सऊदी अरब के बेताज बादशाह बन रहे हैं।

सऊदी के बेताज बादशाह सलमान
36 साल के हो चुके क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपने 86 वर्षीय बुजुर्ग पिता की लगातार खराब होती स्वास्थ्य को देखते हुए देश में उनकी विरासत को संभाल लिया है। पिछले काफी महीनों से लगातार देखा जा रहा था कि, सऊदी किंग ने सार्वजनिक समारोह से लेकर देश की राजनीतिक या फिर किसी दूसरे कार्यक्रमों में भाग लेना बंजद कर दिया था। वहीं, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने विदेशी मेहमानों की मेहमाननवाजी शुरू कर दी थी।

2017 में बने थे उत्तराधिकारी
क्राउन प्रिंस मोहम्मद को जून 2017 में सऊदी अरब के सिंहासन का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया था और नियुक्ति के साथ ही वो सऊदी अरब के वास्तविक नेता बन गये थे। वहीं, धीरे-धीरे उन्होंने देश का राजपाट संभालना शुरू कर दिया था वहीं, पिछले हफ्ते जब उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का सऊदी अरब में स्वागत किया था और उनकी मेजबानी की थी, उसके बाद से ही स्पष्ट हो गया था, कि मोहम्मद अब सऊदी अरब के 'बेताज बादशाह' बन गये हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति से सीधी मुलाकात से पहले तक क्राउन प्रिंस को सिर्फ देश का उत्तराधिकारी ही माना जा रहा था।

कार्यक्रम में नहीं दिखे किंग सलमान
सऊदी अरब के किंग सलमान, जो आमतौर पर गर्मजोशी से गले मिलने और काफी मैत्रीपूर्ण तरीके से हाथ मिलाने के लिए जाने जाते रहे हैं, पहली बार ऐसा हुआ है, जब सऊदी अरब में किसी देश के राष्ट्रपति के आगमन के वक्त कार्यक्रम से पूरी तरह नदारद रहे और उनकी जगह पर मोहम्मद ने ही पूरा कामकाज संभाला। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की यास्मीन फारूक ने कहा कि, ''सऊदी के क्राउन प्रिंस ने तभी किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति से सऊदी अरब में सीधी मुलाकात की है, या फिर किसी दूसरे देश में राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में शिरकत की है, जब देश का किंग स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकता है''।

और बढ़ा क्राउन प्रिंस का महत्व
यास्मीन फारूक ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि, ''सबसे खास बात ये है कि, नेशनल मीडिया या फिर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में क्राउन प्रिंस और किंग सलमान की भूमिका समानांतर हो गई थी, यहां तक कि क्राउन प्रिंस की स्वीकृति अब काफी बढ़ चुकी है''। आपको बता दें कि, कोविड-19 महामारी प्रकोप के बाद से किंग सलमान नियोम में रह रहे है, जो लाल सागर में स्थिति है जहां भारी निर्माण कार्य चल रहा है। किंग सलमान की सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक विदेशी अधिकारी के साथ आखिरी मुलाकात मार्च 2020 में हुई थी, जब वे ब्रिटेन के तत्कालीन विदेश मंत्री डॉमिनिक रैब से मिले थे और उनकी आखिरी विदेश याक्षा 2020 में हुई थी, जब वो ओमान के सुल्तान कबूस की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने देश से बाहर गये थे।

अलग है मोहम्मद के शासन का तरीका
प्रिंस मोहम्मद ने खुद को उदारवादी इस्लाम के चैंपियन के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है, जो देश से इस्लामिक कट्टरपंथ को हटा देना चाहते हैं, लिहाजा उन्होंने सऊदी अरब के लिए बनाए गये विजन 2030 के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, 2018 में प्रिंस मोहम्मद उस वक्त भारी विवादों में घिर गये थे, जब सऊदी अरब के मशहूर पत्रकार जमाल खशोगी की तुर्की स्थिति सऊदी दूतावास में हत्या कर दी गई थी और क्राउन प्रिंस पर हत्या करवाने का आरोप लगा था। इस साल भी सार्वजनिक हुई अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि, क्राउन प्रिंस के कहने पर ही इंस्ताबुल में जमाल खशोगी की हत्या की गई थी।

क्राउन प्रिंस का शासन मॉडल
क्राउन प्रिंस मोहम्मद, जिन्हें एमबीएस के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को सिर्फ कच्चे तेल के इर्द-गिर्द ही रखने के प्रयासों से इतर देश की अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश की है और इसके लिए उन्होंने सऊदी अरब के बाजार को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया है। इसके अलावा उन्होंने सऊदी अरब में व्यापक सामाजिक परिवर्तन कानून भी लागू किए हैं, जिसके तहत महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में ड्राइविंग की इजाजत देना हो, या फिर देश के नागरिकों की आय बढ़ाने के लिए कानून बनाना या फिर देश को पर्यटन के लिहाज से खोलना हो या फिर देश में मनोरंजन को लेकर खुली छूट देना हो, सऊदी अरब में प्रिंस मोहम्मद ने कई सामाजिक सुधार किए हैं। पहली बार ही ऐसा हुआ है, जब इसी महीने सऊदी अरब में म्यूजिक कंसर्ट का आयोजन किया गया है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कलाकार जस्टिन बीबर और भारत के स्टार सलमान खान ने परफॉर्म किया था। सबसे खास बात ये है कि, ये बदलाव आम असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कार्रवाई के साथ आए हैं।

इजरायल को लेकर बदली नीति
क्राउन प्रिंस मोहम्मद का अपने पिता किंग सलमान की तुलना में इजराइल के प्रति रूख अधिक खुला लग रहा है। ऐसी रिपोर्ट आम हो चुके हैं कि, कि पर्दे के पीछे सऊदी अरब और इजरायल के अधिकारियों में बातचीत जारी है। वहीं, सऊदी अरब ने अपने एयर स्पेस को इजरायली विमानों के गुजरने के लिए भी खोल दिया है। वाशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के क्रिस्टिन दीवान के मुताबिक, प्रिंस मोहम्मद को सऊदी किंग की लंबी उम्र का फायदा मिला है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि, "किंग सलमान की मौजूदा उपस्थिति युवा क्राउन प्रिंस के साथ साथ उनके अपरंपरागत कार्यों को भी संभालती है, जो उनके बगैर काफी मुश्किल रहता''। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किंग सलमान मंगलवार के शिखर सम्मेलन में क्यों मौजूद नहीं थे। हालांकि, सऊदी सरकार के सलाहकार अली शिहाबी ने कहा कि किंग सलमान ठीक हैं और सावधानी बरत रहे हैं।

प्रतिद्वंदियों को देश से खदेड़ा
क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के प्रमुखों के साथ बैठक करते हुए शिखर सम्मेलन से पहले खाड़ी के दूसरे देशों दौरे पर शुरुआत की थी, जिसमें उन्होंने देश के प्रमुखों से मुलाकात की थी। नाम न छापने की शर्त पर एक पश्चिमी राजनयिक ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि, "शाही अदालत में कई भी मौजूदा व्यवस्था केवल क्राउन प्रिंस के कार्यालय के माध्यम से होती है।" उन्होंने कहा कि, "किंग सलमान अब तस्वीर में नहीं है और क्राउन प्रिंस अब तक राजा ने नहीं हैं, वो सिर्फ अपने महल के राजा हैं।'' उन्होंने कहा कि, सिंहासन के लिए उनका रास्ता पूरी तरह से साफ है और प्रतिद्वंदियों को खदेड़ने के बाद अब कोई और बाधा बचा नहीं है''। वाशिंगटन स्थित मध्य पूर्व विशेषज्ञ हुसैन इबिश ने कहा, "शाही परिवार के अंदर या बाहर प्रभावी विरोध का कोई पहचान योग्य स्रोत नहीं है।"

और शक्तिशाली हुए मोहम्मद बिन सलमान
उन्होंने कहा कि "एमबीएस (मोहम्मद बिन सलमान) वास्तव में अधिक प्रमुख और शक्तिशाली होते जा रहे हैं"। खासकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सऊदी अरब के साथ अब यह डर भी खत्म हो गया है कि, अंतर्राष्ट्रीय नेता सीधे तौर पर सऊदी क्राउन प्रिंस से बात नहीं करना चाहते हैं।'' ये डर उस वक्त काफी बढ, गया था जब अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद एमबीएस से बात करने से इनकार कर दिया था। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रम्प की तुलना में एक कठिन दृष्टिकोण की कसम खाई थी, और उन्होंने अभी तक प्रिंस मोहम्मद के साथ सीधे संवाद नहीं किया है।
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