Bangladesh: बांग्लादेश में 75% बढ़े रेप केस, 87% नाबालिग बनीं शिकार, 49 की उम्र सिर्फ 0-6 के बीच
Bangladesh: बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस (Human Rights Congress for Bangladesh Minorities) ने 22 अगस्त, 2025 को बांग्लादेश में यौन हिंसा की बढ़ती लहर पर चिंता जताई है। यह विशेष रूप से हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों को निशाना बना रही है। इस मानवाधिकार संस्था के अनुसार, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान हिंसा महामारी का रूप ले चुकी है।
87 फीसदी नाबालिगों को बनाया शिकार
HRCBM ने बताया कि 2025 की पहली तिमाही में, यानी तीन महीने से भी कम समय में, बलात्कार के 342 मामले आधिकारिक तौर पर दर्ज किए गए। इनमें से 87 प्रतिशत पीड़ित 18 साल से कम उम्र की लड़कियां थीं। संस्था का मानना है कि ये आंकड़े केवल एक छोटा सा हिस्सा हैं, और वास्तविक संख्या हजारों में हो सकती है, जो चुप्पी, डर और सरकारी रवैये के चलते सामने नहीं आती।

49 बच्चियों की उम्र 0-6 साल के बीच
दर्ज किए गए कुल मामलों में 49 मामले ऐसे हैं जिनमें रेप पीड़िताओं की उम्र 0-6 साल के बीच है। 94 केस में बच्चियों की उम्र 7 से 12 साल है। जबकि 103 केस ऐसे हैं जिनमें बच्चियों की उम्र 13-18 साल है। इसके अलावा 60 मामलों में उम्र का खुलासा नहीं हो सका। इन बच्चियों में 7 ऐसी बच्चियां भी शामिल हैं जो शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांग हैं। बच्चियों से रेप के मामले में 2024 की तुलना में 75 प्रतिशत ज्यादा हैं।
ज्यादातर मामले नहीं होते दर्ज
बांग्लादेश में जिस तरह की राजनीतिक अस्थिरता है, वह भी एक कारण है कि ज्यादातर मामले या तो पुलिस स्टेशन तक नहीं पहुंचते या पहुंचते भी हैं तो उन्हें बेइज्जत कर लौटा दिया जाता है। साथ ही कई मामलों में न तो पीड़िता का पता चलता है और न ही गुनाहगार का। इसलिए माना जा रहा है कि बहुत कम ही मामले हैं जो इन दिनों बांग्लादेश में दर्ज हो रहे हैं।
तत्काल जांच की मांग
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, HRCBM ने बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय के उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा की महामारी की तत्काल न्यायिक जांच की मांग की गई है, जिसमें अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से और असंगत रूप से निशाना बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
महिलाओं के खिलाफ क्रूरता
HRCBM की नई जनहित याचिका ने बांग्लादेश में यौन हिंसा की बढ़ती लहर की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच का आह्वान किया है। इसमें जवाबदेही, संरचनात्मक सुधार और अल्पसंख्यक महिलाओं व लड़कियों के लिए विशेष सुरक्षा की मांग की गई है, जो लक्षित क्रूरता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
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