तीन मुस्लिम देशों के अल्पसंख्यकों को फौरन मिलेगी भारतीय नागरिकता, सरकार ने बड़ा कदम उठाया
पासपोर्ट एक्सपायर होने के बाद पाकिस्तानी दूतावास अपने अल्पसंख्यक हिन्दुओं से भारी पैसा वसूलता है और ज्यादातर मामलों में उनके एप्लीकेशन को खारिज कर देता है।

Minority: भारत सरकार ने तीन मुस्लिम देशों, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने में कोई मुश्किल ना हो, इसके लिए बहुत बड़ा फैसला किया है और उनकी नागरिकता प्रक्रिया को आसान कर दिया है। भारत सरकार ने वैध दस्तावेजों के साथ भारत आने वाले हिन्दू, सिख, पारसी, ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय के अल्पसंख्यकों को फौरन नागरिकता देने का रास्ता साफ कर दिया है।

सरकार ने क्या फैसला लिया है?
गृह मंत्रालय से छह अल्पसंख्यक समुदायों, हिंदू, सिख, पारसी, ईसाई, बौद्ध और जैन के लोगों को भारत में नागरिकता देने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए नया आदेश दिया है, कि उनके पास कोई भी वैध दस्तावेज हो, तो उन्हें नागरिकता दे दी जाए। इसके साथ ही अगर उनका पासपोर्ट और वीजा खत्म हो गया है,तो भी ये दस्तावेज मान्य रहेंगे। बहुत जल्द नागरिकता पोर्टल में इस संबंध में बदलाव कर दिए जाएंगे। भारत सरकार के एक सरकारी स्रोत ने इसकी पुष्टि कर दी है। आपको बता दें कि, नागरिकता पोर्टल का संचालय केन्द्रीय गृह-मंत्रालय करता है और वर्तमान में केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के उन हिंदू और सिख आवेदकों के लिए सहायक दस्तावेजों के रूप में समाप्त हो चुके पासपोर्ट को स्वीकार करता है, जो 31 दिसंबर 2009 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं और जिन्होंने एक्सपायरी डेट से पहले ऑनलाइन आवेदन कर रखा है।

अभी उठानी पड़ती है परेशानी
भारत में पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था सीमांत लोक संगठन (एसएलएस) के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा के मुताबिक, पोर्टल 1 जनवरी 2010 को या उसके बाद आने वाले लोगों के लिए एक्सपायर्ड पाकिस्तानी पासपोर्ट स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने कहा कि, "2010 में भारत में प्रवेश करने वाले एक पाकिस्तानी हिंदू के लिए, ऑनलाइन सिस्टम, एक्सपायर हो चुके पासपोर्ट को स्वीकार नहीं करता है, जिसके कारण आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है। इसके बाद व्यक्ति या परिवार को दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के पास जाना पड़ता है, जो पासपोर्ट को नवीनीकृत करने के लिए मोटी रकम वसूलते हैं और कभी-कभी मामूली आधार पर इसे अस्वीकार भी कर देते हैं। भले ही वह व्यक्ति 1955 के अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के योग्य है, क्योंकि उसने भारत में लगभग 12 साल बिताए हैं, फिर भी उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।"

आपराधिक आरोपों से छूट
2015 में गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में संशोधन किया था और धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले इन छह समुदायों से संबंधित विदेशी प्रवासियों को पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के प्रावधानों से छूट देकर उनका भारत में रहना वैध कर दिया था, इनमें वो लोग भी शामिल थे, जिनके पासपोर्ट एक्सपायर हो चुके हैं। इस संशोधन के तहत इन तीनों देशों को अल्पसंख्यकों को एक्सपायर पासपोर्ट के साथ भी भारत में रहने की छूट दे दी गई थी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती थी। हालांकि, इसके बाद भी ऑनलाइन पोर्टल उनकी नागरिकता के आवेदनों को संसाधित करने के लिए समाप्त दस्तावेजों को स्वीकार नहीं करता है। सरकारी सूत्र ने कहा कि,"ऑनलाइन पोर्टल में बदलाव किए जाएंगे ताकि विदेशी पासपोर्ट और वीजा, जो एक्सपायर हो चुके हैं, वो नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।"

CAA अभी तक प्रभाव में नहीं आया है
अभी तक भारतीय नागरिकता चाहने वाले लोग या तो दीर्घकालिक वीजा (एलटीवी) या तीर्थयात्री वीजा पर भारत आते हैं। पांच साल के लिए दिए गए एलटीवी को भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सबसे बड़ा कदम माना जाता है। वहीं, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए)-2019, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले तीन पड़ोसी देशों के इन छह गैर-मुस्लिम समुदायों के गैर-दस्तावेजी (या अवैध) प्रवासियों को नागरिकता देने का इरादा रखता है, उसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। भारत सरकार की तरफ से इस कानून को लागू करने का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। सीएए कानून, विदेशों से आए अल्पसंख्यकों को काफी तेजी से ट्रैक करता है और उन्हें भारतीय नागरिकता दिलाने का रास्ता पूरी तरह से साफ कर देता है। सीएए कानून, भारतीय नागरिकता के लिए 11 साल भारत में रहने की अनिवार्यता को खत्म कर सिर्फ 5 सालों का कर देता है। कई पाकिस्तानी हिंदू, जो कानूनी रूप से भारत में प्रवेश कर चुके हैं और भारत में 11 साल से ज्यादा समय देश में बिता चुके हैं, उन्हें अभी भी भारतीय नागरिकता का इंतजार है।

हजारों अल्पसंख्यकों को है इंतजार
हिंदू सिंह सोढा के मुताबिक, 18,000 रजिस्टर्ड पाकिस्तानी हिंदू हैं, जो भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में संसद को सूचित किया था, कि साल 2018 से 2021 के बीच, सरकार को अल्पसंख्यक समूहों से 8,244 नागरिकता के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 3,117 आवेदकों को नागरिकता प्रदान की गई थी। गृह मंत्रालय की साल 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में जब कोविड महामारी का दौर था, उस वक्त भी अप्रैल से दिसंबर सके बीच पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक समुदायों के 1414 सदस्यों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र दिए गए थे। गृह मंत्रालय ने 31 जिलों के जिला कलेक्टरों और नौ राज्यों के गृह सचिवों को वैध पासपोर्ट और वीजा पर भारत में प्रवेश करने वाले छह अल्पसंख्यक समुदायों के संबंध में रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण द्वारा भारतीय नागरिकता प्रदान करने की शक्तियां भी सौंपी हैं। मार्च और दिसंबर 2021 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा 2,439 एलटीवी दिए गए थे। इनमें से 2,193 पाकिस्तान से, 237 अफगानिस्तान से और नौ बांग्लादेश के नागरिक थे।
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