Martial law in russia:मार्शल लॉ लगाने का क्या होता है मतलब, पुतिन ने यूक्रेन के इलाकों में क्यों लगाया

Martial law in russia meaning: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के चार अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों में बुधवार को मार्शल लॉ लगाने की घोषणा की है। यूक्रेन के इन क्षेत्रों पर रूस ने पिछले महीने ही अवैध तरीके से कब्जा कर लिया था। रूसी सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में पुतिन ने रूस के इलाके में क्षेत्रीय नेताओं को इमरजेंसी अधिकार सौंपने के साथ ही, यूक्रेन के कब्जा किए गए चारों क्षेत्रों- डोनेत्स्क, लुहांस्‍क, खेरसॉन और जैपसोरिजिया में मार्शल लॉ लगाने का ऐलान कर दिया। रूस ने यूक्रेन के इन इलाकों को प्रायोजित जनमत संग्रह के जरिए अपने अधिकार में लिया है, जिसे ना तो यूक्रेन ने स्वीकार किया है और ना ही अंतरराष्ट्रीय जगत ने। सवाल है कि पुतिन की ओर से वहां मार्शल लॉ थोपे जाने का मतलब क्या है और इसका परिणाम क्या होगा।

मार्शल लॉ क्या है

मार्शल लॉ क्या है

रूसी कानून के मुताबिक मार्शल लॉ के माध्यम से मिलिट्री और कानून को लागू करवाने वाली एजेंसियों की शक्तियों में विस्तार किया जाता है। मार्शल लॉ लागू होने का मतलब है कि सेना को कर्फ्यू लगाने से लेकर, आवाजाही की स्वतंत्रता रोकने, नागरिकों की संपत्तियां जब्त करने, संचार माध्यमों पर निगरानी रखने का अधिकार मिल जाता है। यही नहीं, मार्शल लॉ मिलिट्री को तबाह हो चुके शहरों का पुनर्निमाण करने के लिए नागरिकों को आदेश देने का भी हक देता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में यूरोप प्रोग्राम के डायरेक्टर मैक्स बर्गमैन ने वाशिंगटन पोस्ट से कहा है, 'मार्शल लॉ का पूरी तरह से मतलब है कि अर्थव्यस्था के सामान्य शासन या कानून के शासन का निलंबन।' उनके मुताबिक, 'यह सेना को नागरिकों की संपत्तियां, बिल्डिंगें जब्त करने और जरूरत के हिसाब से संसाधन लगाने की अनुमति देता है; और इस तरह से मिलिट्री को फैसले लेने का अधिकार सुनिश्चित करना।'

पुतिन ने यूक्रेन के इलाकों में क्यों लगाया मार्शल लॉ

पुतिन ने यूक्रेन के इलाकों में क्यों लगाया मार्शल लॉ

रूस ने पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के चारों क्षेत्रों- डोनेत्स्क, लुहांस्‍क, खेरसॉन, जैपसोरिजिया का नियंत्रण सीधे अपने हाथों में नहीं लिया है। इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह मार्शल लॉ के प्रावधानों को वहां पर किस तरह से लागू करेंगे या फिर वे वहां की मौजूदा परिस्थितियों को कैसे सेना के नियंत्रण में सौंपेंगे। बर्गमैन का कहना है कि 'वहां जमीन पर जो कुछ हो रहा है, उसे सिर्फ एक औपचारिक रूप दिया गया है।' वहां यह साबित करने की कोशिश है कि इन क्षेत्रों में चुनाव हुए थे और '(वे) खुशी से रूस के हिस्सा बने हैं और सिविलियन अधिकार से शासन किया जा रहा है।' मतलब, 'हम सिर्फ सैन्य तौर पर क्षेत्र पर काबिज हैं...' और यह एक महत्वपूर्ण संकेत है।' उनके मुताबिक यह कदम रूसी सेना के लिए ज्यादा संसाधन जुटाने में भी काम आ सकता है।

रूस ने आखिरी बार मार्शल लॉ का इस्तेमाल कब किया था

रूस ने आखिरी बार मार्शल लॉ का इस्तेमाल कब किया था

रूस ने सोवियत संघ के विघटन के बाद से मार्शल लॉ का इस्तेमाल नहीं किया है। सोवियत संघ के जमाने में यह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लगाया गया था। बर्गमैन के ही मुताबिक 'सोवियत काल में रूस ने कई लड़ाइयां लड़ीं, लेकिन उसने अपने रेग्युलर फोर्स के साथ इसका सामना किया। उसे बड़े पैमाने पर लामबंदी की आवश्यकता नहीं थी...' पिछले कुछ दशकों में रूस ने जॉर्जिया और यूक्रेन जैसे पड़ोसियों पर हमला किया, सीरिया में भी दखल दिया, लेकिन उस दौरान उसे इतनी बड़ी लामबंदी की जरूरत कभी नहीं पड़ी। उनके मुताबिक यूक्रेन पर युद्ध थोपने के समय से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन के नाम पर अपने देश में जो प्रोपेगेंडा शुरू किया था, वह अब दूसरे विश्व युद्ध की लामंबदी की तरह बदल चुकी है। जबकि, पहले पुतिन ने स्पेशल ऑपरेशन के नाम पर रूसियों से बलिदान देने का भी आह्वान किया था।

पुतिन के फरमान का क्या प्रभाव पड़ सकता है

पुतिन के फरमान का क्या प्रभाव पड़ सकता है

यूक्रेन के कब्जा किए हुए चार क्षेत्रों में मार्शल लॉ का फरमान जारी करने के साथ ही पुतिन ने 26 क्षेत्रों में 'रेस्पॉन्स लेवल' लगाया है, जिसमें रूस की राजधानी मास्को भी शामिल है। कई एक्सपर्ट को लगता है कि इसका रूस में घरेलू स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। रूस ने अपने उन क्षेत्रों में कुछ युद्ध के दौरान वाली पाबंदियां लगाई हैं, जो यूक्रेन की सीमा पर हैं या उससे सटे हैं, जैसे कि क्रास्नोडार, बेलगोरोद, ब्रयांस्क, वोरोनेझ, कुर्स्क और रोस्तोव के साथ-साथ क्रीमिया भी। लेकिन, यूक्रेन के कब्जा किए इलाकों पर थोपी गई पाबंदियों से यह एक स्टेप कम है। यह कदम इन इलाकों में मौजूद उद्योगों पर एक विशेष नियंत्रण के लिए हो सकता है, जिससे कि अगर जरूरत पड़ी तो सेना को फौरन सहायता पहुंचाई जा सके। बर्गमैन ने कहा है, 'हम जो देख पा रहे हैं वह एक 'बॉयलिंग फ्रॉग' वाली रणनीति की तरह है, जहां हर बड़े कदम की घोषणा करने के बजाय जो शायद रूसी जनता को विह्वल कर देगा, इन्हें धीरे-धीरे लागू करने का आइडिया है।'

क्या बहुत आगे की सोच रहे हैं पुतिन

क्या बहुत आगे की सोच रहे हैं पुतिन

एक्सपर्ट मानते हैं कि पुतिन का यह फैसला थोड़ा भी सफल होता है और रूस को और ज्यादा सैनिक और संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है तो यह इसका विस्तार भी कर सकता है। जिन क्षेत्रों पर अवैध कब्जा किया गया है, इन उपायों से तैनाती भी बढ़ाई जा सकती है। यूक्रेन के नेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस काउंसिल के सचिव ओलेक्सी दानिलोव ने ट्वीट किया है, 'कब्जे वाले क्षेत्रों में पुतिन का मार्शल लॉ....यूक्रेन की आबादी को बड़े पैमाने पर (रूस के) दबे-कुचले क्षेत्र में निर्वासन की तैयारी है, ताकि कब्जे वाले क्षेत्र की जातीय संरचना को बदला जा सके।'

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