शोध में हुआ बड़ा खुलासा, मनुष्य अपनी आकाशगंगा में अकेला नहीं है,बल्कि हैं....

शोध में हुआ बड़ा खुलासा, मनुष्य अपनी आकाशगंगा में अकेला नहीं है,बल्कि हैं....

नई दिल्‍ली। इंसान बरसों से पृथ्‍वी के अलावा अन्‍य ग्रहों पर जीवन तलाश रहा हैं। वैज्ञनिकों न इस बात से कभी इंकार नहीं किया हैं। यहीं कारण वैज्ञानिक धरती से रेडियो तरंगें भेजकर एलियन्स से संपर्क करने की कोशिश करते रहे हैं। कई वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस ब्रह्मांड में इंसानों जैसी कई और बुद्धिमान सभ्यताएं अलग-अलग ग्रहों पर मौजूद हैं जिनमें से एलियन भी है। अब तक एलियन पर कई फिल्‍में भी बन चुकी हैं जिसके बाद एलियन्‍स के वजूद को लेकर लोगों में उत्‍सुकता और बढ़ गई हैं। अब हाल में ही किए गए शोध के बाद वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा के बारे में नया दावा किया हैं, आइए जानते हैं क्या हैं वो दावा?

आकाशगंगा में मनुष्य के अलावा 36 और बुद्धिमान सभ्यताएं, जो संवाद कर सकती हैं

आकाशगंगा में मनुष्य के अलावा 36 और बुद्धिमान सभ्यताएं, जो संवाद कर सकती हैं

धरती के अलावा अन्‍य ग्रह पर भी जीवन हैं हाल ही में हुआ एक शोध कुछ इसी तरह की बात दोहराता है। इंग्लैंड की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक हमारी आकाशगंगा, मंदाकिनी में मनुष्य के अलावा 36 और बुद्धिमान सभ्यताएं (इंटेलिजेंट सिविलाइजेशन्स) हो सकती हैं। बुद्धिमान सभ्यता से मतलब ऐसी सभ्यता से है जो संवाद कर सके। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरह की सभ्यता के बनने में लगभग 5 अरब सालों का वक्त लगता है। धरती की बात करें तो यहां पर बुद्धिमान सभ्यता बनने में साढ़े चार अरब सालों का वक्त लगा था।

 फिलहाल इनमें से किसी से भी संपर्क कर पाना संभव नहीं है

फिलहाल इनमें से किसी से भी संपर्क कर पाना संभव नहीं है

द एस्ट्रोफिजिकल जरनल में छपा एक अध्ययन कहता है कि हमारी मंदाकिनी (मिल्कीवे) में मनुष्यों जैसी 36 से अधिक बुद्धिमान सभ्यताएं मौजूद हो सकती हैं लेकिन, फिलहाल इनमें से किसी से भी संपर्क कर पाना संभव नहीं है। इतनी बड़ी संख्‍या में बुद्धिमान सभ्‍यताएं आपको आश्चर्यचकित कर सकती है लेकिन यह देखते हुए कि मिल्की वे 100 और 400 बिलियन सितारों के बीच कहीं भी घर होने का अनुमान है। वैज्ञानिक बताते हैं कि इन सभ्यताओं से धरती की औसत दूरी 17,000 हजार प्रकाशवर्ष है। इसके चलते इन सभ्यताओं की स्थिति का सटीक अंदाज़ा लगा पाना या उनसे संपर्क कर पाना मौजूद वैज्ञानिक संसाधनों में संभव नहीं हो सकता है।

इस उद्देश्‍य से किया गया था ये शोध

इस उद्देश्‍य से किया गया था ये शोध

यह शोध करने वाले प्रमुख खगोलविद और इंग्लैंड की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिस्टोफर कोंसेलिचे के मुताबिक ‘इस अध्ययन का उद्देश्य ब्रह्मांड के पैमाने पर जीवन के विकास को समझना था। इससे न सिर्फ यह पता चल सकता है कि जीवन कैसे पैदा होता है बल्कि यह भी पता चलता है कि इसका अस्तित्व कितने लंबे समय के लिए रहने वाला है.' वे यह भी कहते हैं कि ‘हो सकता है कि ब्रह्मांड में मौजूद एक मात्र सभ्यता केवल धरती पर हो। लेकिन ऐसा होना हमारे लॉन्ग टर्म एग्ज़िस्टेंस लिए एक बुरा संकेत होगा.'

जानिए क्या होती है आकाशगंगा

जानिए क्या होती है आकाशगंगा

हम जिस ग्रह पर रहते है उसका नाम पृथ्वी है। पृथ्वी हमारे सौर मंडल के बाकी ग्रहों के तरह एक अहम् हिस्सा है। लेकिन हमारा ये सौर मंडल कहाँ पर है? हमारा सौर मंडल आकाशगंगा का बस एक छोटा सा हिस्सा है, यू कहें को इतना छोटा हिस्सा की कल्पना से ही परे हैं। आकाशगंगा बहुत सारी गैसों, धुल और अरबों ग्रहों के सौर मंडल का संयुक्त रूप से बना एक आकार है। इसे आप दुसरे शब्दों में ऐसे समझ सकते है की बहुत सारे ग्रह मिलकर एक सौर मंडल का निर्माण करते है और ऐसे करोडों- अरबों से भी ज्यादा सौर मंडल मिलकर बनाते है एक आकाशगंगा। एक आकाशगंगा एक विशालकाय रूप है जिसमे सौर मंडल के साथ साथ धुल के कणों, बहुत सारी गैसों का भी संयोजन रहता है। आकाशगंगा गुरुत्वाकर्षण बल से पूर्णतया जुड़ा रहता है। हमारे आकाशगंगा के बिलकुल बीचो बीच में एक बहुत ही भारी black hole भी है! जब कभी रात में अगर आप खुले आकाश को देखे तो आपको बहुत सारे तारों को देखने का मौका मिलता है जिसमे हमारे आँखों के सामने आकाशगंगा में उपस्थित अन्य तारे भी हम देख सकते है। जिस तरह से करोडों अरबों ग्रहों से बने आकाशगंगा में हम सभी रहते है ऐसी ही बहुत सारी आकाशगंगायें मौजूद है। ये उतनी ही जितना शायद हम कभी गिन भी न पाए।

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