पीएम मोदी से मांफी मांगो... मालदीव में राष्ट्रपति मुइज्जू पर भड़का विपक्ष, एस जयशंकर ने क्या कहा?
मालदीव में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ही देश की राजनीति दो ध्रवों में बंट गई है। देश का सत्ता पक्ष राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व में चीन की ओर झुका नजर आ रहा है वहीं विपक्ष खुल कर भारत के समर्थन में उतर गया है।
जम्हूरी पार्टी के नेता कासिम इब्राहिम ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से औपचारिक रूप से माफी मांगने और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए 'राजनयिक सुलह' करने का अनुरोध किया है।

इब्राहिम की यह मांग चीन समर्थक माने जाने वाले मुइज्जू की उन टिप्पणियों के संदर्भ में की गयी है जिसमें इस महीने की शुरुआत में उन्होंने किसी देश का नाम लिए बगैर भारत को धमकाने वाला देश बताया था।
कासिम इब्राहिम ने कहा कि पड़ोसी देश के बारे में हमें इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए, जो दोनों देशों के रिश्ते को प्रभावित करती है। मैं राष्ट्रपति मोइज्जू से औपचारिक रूप से माफी मांगने के लिए कहता हूं।
जम्हूरी पार्टी के नेता ने यह मांग तब की है जब एक दिन पहले ही विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने सोमवार को कहा कि उसकी मुइज्जू पर महाभियोग चलाने के लिए एक प्रस्ताव रखने की तैयारी है।
हालांकि कासिम इब्राहिम ने विपक्षी पार्टियों को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू को उनके पद से हटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। कासिम ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए हुए नेता हैं। ऐसा कोई भी प्रयास लोकतंत्र में भरोसा कम करता है।
इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत और चीन को लेकर अपनी राय रखी है। जयशंकर ने कहा है कि सब पड़ोसियों के बीच परेशानियां आती हैं, मगर आख़िरकार पड़ोसियों को पड़ोसियों की जरूरत होती है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ''चीन भारत के पड़ोसियों को प्रभावित करेगा, लेकिन भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति से डरना नहीं चाहिए। सब पड़ोसियों के बीच समस्याएं आती हैं लेकिन अंततः पड़ोसियों को पड़ोसियों की जरूरत होती है।''
एस जयशंकर ने कहा कि चीन के प्रभाव को लेकर प्रतिद्वंद्विता बढ़ी है लेकिन इसे भारतीय कूटनीति का फेल होना कहना ठीक बात नहीं है। जयशंकर ने कहा कि, ''हमें समझना होगा कि चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में प्रतिस्पर्धी राजनीति के रूप में इन देशों को प्रभावित करेगा।"
जयशंकर ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए। मुझे लगता है कि हमें कहना चाहिए- ठीक है, वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है। आप अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करें, हम अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे।''
जयशंकर ने कहा कि, ''आज के समय में हमें प्रतिस्पर्धा से घबराना नहीं चाहिए। हमें इसका स्वागत करना चाहिए और इसे स्वीकरा करने लायक क्षमता रखनी चाहिए।''












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