Lawrence Bishnoi Gang कनाडा में आतंकवादी संगठन घोषित, कैसे बना ‘डॉन’? जेल से चलाता है आतंक का साम्राज्य
Canada Declares Lawrence Bishnoi Gang Terror Group: भारत के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक, लॉरेंस बिश्नोई, एक बार फिर सुर्खियों में है। कनाडा सरकार ने 29 सितंबर 2025 को लॉरेंस बिश्नोई गैंग को अपने आपराधिक संहिता (क्रिमिनल कोड) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। यह फैसला भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार के बीच आया है, जो 2023 में खालिस्तानी कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या के बाद तनावपूर्ण हो गए थे।
कनाडा के इस कदम ने बिश्नोई गैंग की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और भारत में इसके आतंक के साम्राज्य को उजागर किया है। आइए, लॉरेंस बिश्नोई कौन है, उसका गैंग कैसे काम करता है, और कनाडा का यह फैसला क्यों अहम है...

Who Is Lawrence Bishnoi: अपराध की दुनिया का 'डॉन'
- जन्म और शुरुआती जीवन: 1993 में पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारांवाली गांव में जन्मे बलकरन बरार (Balkaran Brar), जिसे बाद में लॉरेंस बिश्नोई के नाम से जाना गया, एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल थे और परिवार के पास 110 एकड़ जमीन थी। लॉरेंस ने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी और बीए की पढ़ाई की। उसके चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने मीडिया को बताया कि लॉरेंस हमेशा महंगे कपड़े और जूते पहनता था, और जेल में रहते हुए भी परिवार उस पर सालाना 35-40 लाख रुपये खर्च करता है।
- अपराध की दुनिया में कदम: लॉरेंस का अपराध की ओर रुझान 2008 में शुरू हुआ, जब वह पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों के दौरान एक प्रतिद्वंद्वी पर गोली चलाने के आरोप में पहली बार जेल गया। पुलिस डोजियर के मुताबिक, 2008 से 2013 तक उनके खिलाफ 84 में से 18 मामले कॉलेज के दिनों में दर्ज हुए। वह पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संगठन (SOPU) का सक्रिय सदस्य था, जहां उसकी मुलाकात संपत नेहरा (Sampat Nehra), गोल्डी बरार (Goldie Brar), और काला राणा(Kala Rana) जैसे गुर्गों से हुई, जो बाद में उसके गैंग की रीढ़ बने। 2011 में SOPU अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद, उसने हिंसक गतिविधियों को और बढ़ाया।
- जेल से साम्राज्य: 2014 में राजस्थान के सालासर बालाजी मंदिर जाते समय पुलिस मुठभेड़ में पकड़े जाने के बाद से लॉरेंस अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल (Sabarmati Central Jail) में बंद है। इसके बावजूद, वह मोबाइल फोन के जरिए अपने गैंग को ऑपरेट करता रहा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मार्च 2023 की चार्जशीट के अनुसार, बिश्नोई 700 गुर्गों के नेटवर्क को नियंत्रित करता है, जिनमें 300 पंजाब से हैं। उसकी तुलना भगोड़े 'डॉन' दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) से की गई है।
Lawrence Bishnoi Network: हत्या, उगाही और आतंक का नेटवर्क
लॉरेंस बिश्नोई गैंग उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, और दिल्ली में सक्रिय है। यह गैंग हत्या, जबरन वसूली, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल है। कनाडा में इसकी मौजूदगी भारतीय डायस्पोरा, खासकर सिख समुदाय, को निशाना बनाने के लिए जानी जाती है। गैंग की कुछ प्रमुख गतिविधियां:-
- हाई-प्रोफाइल हत्याएं: मई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moose Wala) की हत्या, दिसंबर 2023 में राजपूत नेता सुखदेव गोगामेड़ी की हत्या, और अक्टूबर 2024 में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया।
- Salman Khan पर हमले: 1998 में काले हिरण शिकार मामले के बाद से बिश्नोई समुदाय (जो काले हिरण को पवित्र मानता है) सलमान खान को निशाना बनाता रहा। अप्रैल 2025 में सलमान के घर के बाहर गोलीबारी और नवंबर 2023 में धमकियां इसकी मिसाल हैं।
- कनाडा में आतंक: गैंग ने कनाडा में सिख समुदाय और कारोबारियों को निशाना बनाया। जून 2023 में खालिस्तानी कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में गैंग का नाम जोड़ा गया, जिसने भारत-कनाडा संबंधों में तनाव पैदा किया।
कनाडा का आतंकवादी संगठन घोषित करने का फैसला
29 सितंबर 2025 को कनाडा के जन सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी (Gary Anandasangaree) ने बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया। इस फैसले के पीछे क्या-
- संपत्ति जब्ती: कनाडा में गैंग की कोई भी संपत्ति, नकदी, वाहन या अन्य संसाधन फ्रीज या जब्त किए जा सकते हैं।
- कानूनी कार्रवाई: यह कदम कनाडाई पुलिस को आतंकवाद से जुड़े अपराधों, जैसे वित्तपोषण, भर्ती, और सीमा पार गतिविधियों, के लिए गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की शक्ति देता है।
- प्रवेश पर रोक: संदिग्ध गैंग सदस्यों को कनाडा में प्रवेश से रोका जा सकता है।
- सुरक्षा बढ़ाना: कनाडा सरकार ने कहा कि यह गैंग भारतीय डायस्पोरा, खासकर सिख समुदाय, में भय और धमकी का माहौल पैदा करता है। यह कदम समुदायों को सुरक्षित बनाने के लिए है।
कनाडा के इस फैसले की मांग लंबे समय से थी। अगस्त 2025 में कनाडा के विपक्षी सांसद फ्रैंक कैपुटो, सरे की मेयर ब्रेंडा लॉक, ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी, और अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने गैंग को आतंकवादी घोषित करने की मांग की थी।
भारत-कनाडा संबंधों पर प्रभाव
यह फैसला भारत और कनाडा के बीच सुधरते कूटनीतिक संबंधों का हिस्सा है। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया। इसके बाद दोनों देशों ने राजनयिकों को निष्कासित किया था।
हालांकि, नए कनाडाई पीएम मार्क कार्नी (Mark Carney) के नेतृत्व में संबंधों में सुधार शुरू हुआ। सितंबर 2025 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कनाडा की नथाली ड्रॉइन के बीच मुलाकात के बाद यह फैसला लिया गया। भारत ने कनाडा से खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, और बिश्नोई गैंग को आतंकवादी घोषित करना इस दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
Lawrence Bishnoi Criminal History: बिश्नोई का आपराधिक साम्राज्य- कैसे काम करता है?
लॉरेंस बिश्नोई, जेल में रहते हुए भी, अपने गैंग को मोबाइल फोन और सहयोगियों के जरिए ऑपरेट करता है। गोल्डी बरार (जो 2023 में गैंग से अलग हो गया), संपत नेहरा, और काला जठेड़ी जैसे गुर्गों ने इसके नेटवर्क को फैलाया। गैंग की गतिविधियां:
- उगाही और धमकी: गैंग पंजाब के संगीत उद्योग, कबड्डी खिलाड़ियों, और कारोबारियों से उगाही करता है।
- हथियार और ड्रग्स: हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में गैंग का बड़ा रोल है।
- प्रतिद्वंद्वी गैंग: बिश्नोई गैंग की दविंदर बंबीहा गैंग से दुश्मनी रही, जिसके चलते चंडीगढ़ और पंजाब में कई गोलीबारी की घटनाएं हुईं।
मामलों की संख्या
पुलिस और NIA के अनुसार, बिश्नोई के खिलाफ 75-84 मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, उगाही, और हथियार तस्करी जैसे अपराध शामिल हैं। 36 मामले अभी कोर्ट में लंबित हैं।
बिश्नोई की वर्तमान स्थिति? कहां है?
लॉरेंस बिश्नोई वर्तमान में अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। गुजरात सरकार ने CrPC की धारा 268 के तहत अगस्त 2025 तक उनके स्थानांतरण पर रोक लगा रखी है। उसकी वकील रजनी खत्री (Lawrence Bishnoi Lawyer Rajni Khatri) का दावा है कि जेल से कोई फोन बरामद नहीं हुआ और उनके खिलाफ कोई संचार साधन साबित नहीं हुआ।
लॉरेंस बिश्नोई, जो कभी छात्र नेता था, आज भारत और कनाडा में आतंक का पर्याय बन चुका है। कनाडा का गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करना न केवल इसकी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर नकेल कसेगा, बल्कि भारत-कनाडा संबंधों में सहयोग को भी मजबूत करेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या जेल में बंद बिश्नोई का साम्राज्य अब रुकेगा, या यह आतंक का सिलसिला और बढ़ेगा? पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस सवाल का जवाब देगी। क्या आप मानते हैं कि कनाडा का यह कदम बिश्नोई गैंग को रोक पाएगा? अपनी राय कमेंट में साझा करें!
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