Shoaib Akhtar के भाई के जनाजे में आतंकियों का जमावड़ा, कंधे पर हाथ रखे दिखे दहशतगर्द- Video
Shoaib Akhtar With Terrorist: पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के जनाजे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जून 2026 के आखिरी हफ्ते में इस्लामाबाद में हुए इस जनाजे में खेल और राजनीति से जुड़े कई बड़े लोग पहुंचे थे। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े राजनीतिक संगठन पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के दहशतगर्दों को भी वहां मौजूद देखा गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
यह मामला तब सामने आया, जब इस्लामाबाद के एच-8 कब्रिस्तान में हुए नमाज-ए-जनाजा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोग आराम से घूमते और शोएब अख्तर के परिवार के सदस्यों से मिलते-जुलते नजर आए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि इन तस्वीरों को छिपाने की कोशिश भी नहीं की गई।

PMML नेताओं की मौजूदगी पर उठे सवाल
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा और उसके राजनीतिक दल PMML के आधिकारिक मीडिया विंग ने खुद इन तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में PMML के इस्लामाबाद अध्यक्ष इनाम उर रहमान कम्बोह अपने सहयोगियों के साथ दिखाई दिए। उन्हें शोएब अख्तर के परिवार से गले मिलकर सांत्वना देते हुए भी देखा गया। इसके बाद सवाल उठने लगे कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के निजी पारिवारिक कार्यक्रम तक इतनी आसानी से पहुंच कैसे मिली।
लश्कर और PMML के रिश्ते क्यों हैं चर्चा में?
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है। कई विशेषज्ञ इसे मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के नेटवर्क से जुड़ा राजनीतिक मंच है। उनका दावा है कि जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगने के बाद इस नेटवर्क ने राजनीतिक पहचान के साथ काम करना शुरू किया। इनाम उर रहमान कम्बोह को भी इसी संगठन का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
अब तक शोएब अख्तर ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर फिलहाल शोएब अख्तर या उनकी टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को प्रतिबंधित संगठनों द्वारा मुख्यधारा के कार्यक्रमों के जरिए खुद को सामान्य और स्वीकार्य दिखाने की कोशिश के रूप में देख रही हैं। आने वाले दिनों में यह मामला पाकिस्तान की राजनीति, सुरक्षा और खेल जगत में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।
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