Pakistan में Period Tax खत्म, फिर भी काफी महंगा! फूड या पैड्स में से एक ही नसीब, भारत में क्या है हाल?

Period Tax Pakistan: पाकिस्तान सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सैनिटरी पैड्स और टैम्पोन पर लगने वाला 18 फीसदी सेल्स टैक्स खत्म करने का ऐलान किया है। पाकिस्तान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा जरूरी कदम है। हालांकि इस फैसले के बाद एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ टैक्स हटाने से उन लाखों-करोड़ों महिलाओं की जिंदगी बदल जाएगी, जो आर्थिक तंगी की वजह से आज भी सैनिटरी पैड्स खरीद नहीं पातीं? जानेंगे पाकिस्तान में महिलाओं की दुर्दशा और पीरियड पॉवर्टी का हाल।

दो महिलाओं ने दिलाई पूरे पाकिस्तान की महिलाओं को जीत

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। इसके पीछे सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों का लंबा संघर्ष रहा। लाहौर हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर याचिका भी दायर की गई थी। 'विमेन ऑफ द ईयर' महनूर उमर और अहसान जहांगीर खान ने मांग की थी कि सैनिटरी पैड्स को एक जरूरी स्वास्थ्य उत्पाद माना जाए। लगातार बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने आखिरकार इन उत्पादों से 18 फीसदी सेल्स टैक्स हटाने का फैसला लिया।

Period Tax Pakistan

पाकिस्तान में कितनी गंभीर है 'पीरियड पॉवर्टी'?

टैक्स हटाना अच्छी शुरुआत जरूर है, लेकिन पाकिस्तान में पीरियड पॉवर्टी यानी माहवारी से जुड़ी गरीबी की स्थिति बेहद गंभीर है। यूनिसेफ (UNICEF) के मुताबिक, पाकिस्तान में पीरियड्स वाली सिर्फ 12 फीसदी महिलाएं ही ब्रांडेड सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल कर पाती हैं। यानी करीब 88 फीसदी महिलाएं और लड़कियां आज भी पुराने कपड़ों या असुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। इसका सबसे बड़ा कारण गरीबी, जागरूकता की कमी और सामाजिक रूढ़ियां हैं।

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पीरियड्स की वजह से स्कूल छोड़ रही हैं लड़कियां

पाकिस्तान में माहवारी को लेकर जागरूकता की कमी का असर लड़कियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, हर पांच में से एक लड़की पीरियड्स के दौरान स्कूल जाना छोड़ देती है। ग्रामीण इलाकों में हालात और भी खराब हैं, जहां न साफ शौचालय हैं और न ही सैनिटरी नैपकिन आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में सिर्फ टैक्स हटाने से यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होने वाली।

क्या टैक्स हटने से सस्ते हो जाएंगे पैड्स?

विशेषज्ञों का कहना है कि 18 फीसदी सेल्स टैक्स हटने से कीमतों में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन इससे सैनिटरी पैड्स सभी महिलाओं की पहुंच में नहीं आ जाएंगे। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान में पैड्स और उनके कच्चे माल पर कुल टैक्स का बोझ अब भी करीब 40 फीसदी है। जब तक सरकार बाकी टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी में भी कटौती नहीं करेगी, तब तक कीमतों में बड़ी कमी आना मुश्किल है।

महंगाई ने बढ़ाई गरीब परिवारों की मुश्किल

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट और महंगाई का सामना कर रहा है। बलूचिस्तान जैसे गरीब इलाकों में एक मां को अपनी तीन बेटियों के लिए हर महीने करीब 40 अमेरिकी डॉलर सिर्फ सैनिटरी पैड्स पर खर्च करने पड़ते हैं। वहीं पाकिस्तान में एक परिवार की औसत मासिक आय करीब 140 अमेरिकी डॉलर है। ऐसे में कई परिवारों के सामने राशन खरीदें या सैनिटरी पैड्स, जैसी मजबूरी खड़ी हो जाती है।

खुले में पैड खरीदने पर सुननी पड़ती है डांट

सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि समाज की सोच भी बड़ी समस्या है। बलूचिस्तान के क्वेटा और मस्तुंग जैसे इलाकों में कई लड़कियां मेडिकल स्टोर से पैड्स खरीदने में शर्म महसूस करती हैं। वे दुकान खाली होने का इंतजार करती हैं ताकि कोई उन्हें देख न ले। कई जगह अगर कोई लड़की खुलेआम सैनिटरी पैड खरीदती है, तो उसे लोगों की बातें और डांट तक सुननी पड़ती है।

सिर्फ टैक्स नहीं, सोच बदलना भी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की इस समस्या का समाधान सिर्फ टैक्स हटाने से नहीं होगा। सरकार को स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगानी होंगी, ग्रामीण इलाकों में मुफ्त सैनिटरी पैड्स उपलब्ध कराने होंगे और पीरियड्स को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने होंगे। साथ ही पैड्स के कच्चे माल पर लगने वाले करीब 40 फीसदी टैक्स में भी कमी करनी होगी।

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भारत में क्या है पीरियड प्रोडक्ट्स की स्थिति?

भारत में पीरियड प्रोडक्ट्स (Sanitary Pads, Tampons) पर वर्तमान में GST शून्य (0%) है। हालांकि, इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw Materials) पर आज भी 12% से 18% तक GST लगता है।

Period Tax Pakistan

यही वजह है कि लोग लंबे समय से मांग कर रहा है कि केवल तैयार प्रोडक्ट ही नहीं, बल्कि उसके इनपुट पर भी टैक्स कम किया जाए। कच्चे माल पर टैक्स होने की वजह से प्रोडक्ट के दाम में कोई खास अंतर नहीं आया है। यह एक तरह से घुमाकर कान पकड़ने वाली बात है, जिसमें कहने को टैक्स फ्री है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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