Shani Pradosh Vrat 2026: आज शनि प्रदोष व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त- पूजा विधि और महत्व?

Shani Pradosh Vrat: हर महीने आने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम उपवास है। आज ये पावन दिन आया है, इस दिन शनिवार है इसलिए इस व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने से इस उपवास का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए इस दिन महादेव के साथ-साथ न्याय के देवता शनिदेव की आराधना की जाती है।

काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखते हैं, उनके जीवन से बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं, भगवान शिव को शनिदेव का गुरु माना जाता है इसलिए शनिवार के दिन आने वाले प्रदोष काल में शिव पूजा करने से न केवल भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, बल्कि शनिदेव भी भक्तों पर अपनी शुभ दृष्टि बनाए रखते हैं।

Shani Pradosh Vrat 2026

दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक शनि प्रदोष व्रत करता है, उसे जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही संतान सुख, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और करियर में सफलता के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है।'

शनि प्रदोष व्रत तिथि 2026

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून को रात 10 बजकर 21 मिनट से शुरू हो गई थी और इसका समापन 28 जून को रात 12 बजकर 42 मिनट पर होगा, उदयातिथि मान्य होने की वजह से ये व्रत 27 जून को रखा गया है।

शनि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:48 तक
  • अमृत काल: सुबह 09:26 से 11:14 तक

शनि प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व

दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'भगवान शिव को शनिदेव का गुरु माना गया है इसलिए शनि प्रदोष के दिन महादेव की सेवा और पूजा करने से शनिदेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यदि कोई जातक लंबे समय से मानसिक, शारीरिक या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है तो उसे ये व्रत जरूर करना चाहिए, उसे जल्द ही कष्टों से मुक्ति मिलेगी।'

उन्होंने कहा कि 'कुंडली में मौजूद शनि जनित दोषों जैसे साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए यह व्रत अचूक माना गया है। इस दिन शिव लिंग का अभिषेक करने से भक्तों के बिगड़े काम बनने लगते हैं और उन्हें करियर व व्यवसाय में मनचाही प्रगति हासिल होती है।'

तामसिक प्रवृत्तियों का नाश होता है

ज्येष्ठ मास के इस पवित्र शनि प्रदोष व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति के भीतर की तामसिक प्रवृत्तियों का नाश होता है। यह दिन आत्ममंथन करने और अपने कर्मों को सुधारने का एक बेहतरीन आध्यात्मिक अवसर प्रदान करता है। सच्चे भाव से की गई यह आराधना जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर देती है।

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल और नीले या काले फूल अर्पित करें। अंत में भगवान शिव और शनिदेव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।

शनि प्रदोष व्रत के दिन क्या करें और क्या न करें

शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातः स्नान करके भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें और प्रदोष काल में शिवलिंग का गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित करें तथा "ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल और उड़द अर्पित कर जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है।

क्रोध, झूठ, अपशब्द, विवाद से बचें

इस दिन सत्य, संयम और शांत व्यवहार रखें। वहीं, क्रोध, झूठ, अपशब्द, विवाद और किसी का अपमान करने से बचें। मांस, मदिरा, तामसिक भोजन (लहसुन-प्याज सहित) और किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करें। गरीब, बुजुर्ग, मजदूर और असहाय लोगों का अनादर न करें तथा पूजा-पाठ में लापरवाही या जल्दबाजी से भी बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों का पालन करने से भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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