Koh E Noor Row: जोहरान ममदानी ने किंग चार्ल्स मांग लिया कोहिनूर, बकिंघम पैलेस ने क्या जवाब दिया?
Koh E Noor Row: भारत का कोहिनूर हीरा जो 177 साल ब्रिटेन के पास उसको वापस लाने की समय दर समय मांग उठती रही है। लेकिन अब ये मांग एक भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता ने की है, जिससे ये एक बार फिर कोहिनूर का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। ये मुद्दा ऐसे टाइम पर बाहर आया है जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की न्यूयॉर्क यात्रा पर गए हैं। दरअसल न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने किंग चार्ल्स से अपील की कि वह कोहिनूर हीरा भारत को वापस लौटाने पर विचार करें। क्या है पूरा मामला, आसान भाषा में समझते हैं।
किंग से क्या बोले मेयर ममदानी?
न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- "अगर मुझे किंग से अकेले में बात करने का मौका मिलता, तो मैं शायद उन्हें कोहिनूर हीरा वापस करने के लिए मोटिवेट करता।" बाद में किंग चार्ल्स इसी समारोह में ममदानी से मिले भी।

बकिंघम पैलेस ने चुप्पी साधी
इस पूरे मामले पर बकिंघम पैलेस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं मेयर ममदानी के कार्यालय ने भी यह पुष्टि नहीं की कि उन्होंने यह मुद्दा सीधे किंग चार्ल्स के सामने उठाया या नहीं। हालांकि, उनकी सार्वजनिक टिप्पणी के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया।
भारत कई बार कर चुका है मांग
भारत पहले भी कई बार 105 कैरेट के कोहिनूर हीरे को वापस लौटाने की मांग कर चुका है। भारत इसे राष्ट्र के इतिहास से गहराई से जुड़ी धरोहर मानता है। कई भारतीयों के लिए ब्रिटेन के पास कोहिनूर का होना औपनिवेशिक अत्याचार और लूट का प्रतीक माना जाता है।
कैसे ब्रिटेन पहुंचा कोहिनूर?
1850 में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के गवर्नर-जनरल ने यह हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंपा था। इससे पहले 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्ज़ा किया था और एक भारतीय शासक से यह हीरा ले लिया गया था। इसी के बाद कोहिनूर ब्रिटिश शाही खजाने का हिस्सा बन गया।
आज भी संवेदनशील मुद्दा
भारत को 1947 में ब्रिटिश शासन से आज़ादी मिली थी। लेकिन ब्रिटिश उपनिवेशवाद और उस दौर में हुए अत्याचार आज भी भारत में बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। कोहिनूर हीरे का मामला भी इन्हीं ऐतिहासिक घावों से जुड़ा माना जाता है। साथ ही ऐसे ही कई ऐतिहासिक आर्टपीस ब्रितानी शासक उस दौर में अपने साथ ले गए थे। जिन्हें बाद में म्यूजियम में सजाया गया है।
कोहिनूर का लंबा और विविध इतिहास
हिस्टोरिक रॉयल पैलेसेस चैरिटी के मुताबिक, कोहिनूर हीरा सिर्फ ब्रिटेन या भारत तक सीमित इतिहास नहीं रखता। यह पहले भारत के मुगल सम्राटों, ईरान के शाहों, अफगानिस्तान के अमीरों और सिख महाराजाओं के पास भी रह चुका है। यही वजह है कि इसका इतिहास बेहद लंबा, जटिल और कई स्तरों वाला माना जाता है।
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