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Khaleda Zia Death: संघर्ष, पहली महिला PM और जेल! सैनिक की पत्नी से सर्वोच्च पद तक, कैसा रहा खालिदा जिया का सफर

Khaleda Zia death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया का आज सुबह 6 बजे ढाका के एक अस्पताल में निधन हो गया। 80 वर्षीय जिया पिछले 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं और लंबे समय से लिवर सिरोसिस, किडनी की बीमारी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं।

दो बार देश की कमान संभालने वाली जिया ने एक सैन्य अधिकारी की पत्नी से देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय किया। उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में दशकों से चले आ रहे 'बैटल ऑफ बेगम्स' के एक युग का औपचारिक अंत हो गया है।

Khaleda Zia death

khaleda zia who: सैनिक की पत्नी से देश की पहली महिला PM तक

खालिदा जिया का राजनीतिक सफर उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में हुई हत्या के बाद शुरू हुआ। 1984 में BNP की कमान संभालने के बाद उन्होंने 1991 के लोकतांत्रिक चुनावों में जीत हासिल की और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री (First female Prime Minister of Bangladesh) बनीं। वे 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक दो बार सत्ता के शीर्ष पर रहीं। उनके नेतृत्व में BNP ने देश की राजनीति में अवामी लीग के सामने एक मजबूत विकल्प पेश किया।

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भ्रष्टाचार के आरोप और 10 साल की जेल

खालिदा जिया का राजनीतिक करियर कानूनी विवादों से भी घिरा रहा। 2018 में ढाका की एक विशेष अदालत ने उन्हें जिया अनाथालय ट्रस्ट मामले में सरकारी धन के गबन का दोषी पाया। शुरुआत में उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने बढ़ाकर 10 साल कर दिया था। इस सजा के कारण वे कई वर्षों तक जेल और नजरबंदी में रहीं, जिससे उनकी सक्रिय राजनीति और स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा।

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'बैटल ऑफ बेगम्स': हसीना के साथ कट्टर दुश्मनी

बांग्लादेश की राजनीति पिछले तीन दशकों से खालिदा जिया और शेख हसीना (Khaleda Zia vs Sheikh Hasina) के बीच की प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द सिमटी रही। हालांकि 1980 के दशक में दोनों ने सैन्य शासन के खिलाफ मिलकर आंदोलन किया था, लेकिन 1990 में लोकतंत्र की बहाली के बाद दोनों कट्टर दुश्मन बन गईं। सत्ता के लिए उनके बीच चलने वाले इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने 'बैटल ऑफ बेगम्स' का नाम दिया, जिसने बांग्लादेश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया।

तख्तापलट के बाद रिहाई और अंतिम समय

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे और देश छोड़ने के ठीक एक दिन बाद खालिदा जिया को जेल से रिहा किया गया था। रिहाई के बाद वे बेहतर इलाज के लिए 4 महीने लंदन में रहीं और 6 मई 2025 को स्वदेश लौटीं। उनके निधन से पहले, उनके बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को लंदन से बांग्लादेश वापस आए। जिया के छोटे बेटे अराफात रहमान का इसी साल पहले ही निधन हो चुका था।

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विरासत: संकट में घिरी पार्टी की जिम्मेदारी

खालिदा जिया के निधन के बाद अब BNP की पूरी जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे तारिक रहमान के कंधों पर आ गई है। जिया ने उस समय पार्टी संभाली थी जब वह बिखराव के कगार पर थी, और उसे देश की सत्ता तक पहुंचाया। वर्तमान में, जब बांग्लादेश एक संक्रमणकालीन सरकार के दौर से गुजर रहा है, जिया का जाना पार्टी के लिए एक बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक संकट पैदा कर सकता है। उनके समर्थकों के बीच वे एक अडिग नेता के रूप में जानी जाती रहीं।

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