इस देश में अब गिने-चुने बच्चे ही हो रहे हैं पैदा, 'प्रेगनेंट' होने वाले पुरूष मंत्री को मिली जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री किशिदा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, उन्होंने ओगुरा की नियुक्ति में घटती आबादी की समस्या का समाधान करने के लिए एक "युवा और ताजा दृष्टिकोण" जुटाने की कोशिश की है।
टोक्यो, अगस्त 11: भारत के सबसे अच्छे दोस्तों में शुमार जापान घटते जन्मदर को लेकर काफी ज्यादा परेशान हो गया है और जापान में जन्मदर इतना कम हो गया है, कि अगले कुछ सालों में जापान बूढ़ों के देश में तब्दील हो जाएगा। जापान में साल 1950 के बाद आबादी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है, जिसने सरकार के पैरों तले जमीन को हिला दिया है और जापान सरकार ने जन्मदर से निपटने के लिए प्रभारी महिला मंत्री को उनके पद से हटा दिया है और उनकी जगह नियुक्त किया है, जो एक बार बैठक के दौरान 'प्रेगनेंट' पेट लेकर पहुंचे थे और इस संकट से सरकार को आगाह करने की कोशिश की थी।

'गर्भवती' होकर बैठक में पहुंचे थे मंत्री
जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया है और उन्होंने बैंक ऑफ जापान के पूर्व अधिकारी मसानोबु ओगुरा, जो 41 साल के हैं, उन्हें सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ नेता सेइको नोडा की जगह नियुक्त किया है। सेइको नोडा एक महिला और मां हैं, जिनके पास अब तक देश की जनसंख्या बढ़ाने के लिए काम करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन वो इस काम में नाकाम रही हैं। पिछले महीने एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने जनसंख्या संकट के लिए जापान के 'एक पुरुष-प्रधान राजनीतिक दुनिया की "उदासीनता और अज्ञानता" को' गिरती जन्म दर के लिए दोषी ठहराया था, जो जापान की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। जापान में अब जन्मदर की तुलना में मृत्युदर ज्यादा हो गया है। वहीं, नये मंत्री मसानोबु ओगुरा, जिनकी अपनी कोई संतान नहीं है, वो पिछले साल अप्रैल के महीने में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के युवा प्रभाग की एक बैठक में 'गर्भवस्था पेट' लेकर पहुंचे थे।

साढ़े सात किलो का था 'पेट'
प्रधानमंत्री किशिदा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, उन्होंने ओगुरा की नियुक्ति में घटती आबादी की समस्या का समाधान करने के लिए एक "युवा और ताजा दृष्टिकोण" जुटाने की कोशिश की है। क्योइकू अखबार ने बताया कि ओगुरा ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस पद पर नामित होने के बाद कहा कि, परिवारों को बच्चों की परवरिश में मदद करने वाली नीतियों में वृद्धि एक जरूरी काम है। उन्होंने कहा,'सच को स्वीकार करने की यही वक्त है।' आपको बता दें कि, पिछले साल मीटिंग के दौरान जब वो पहुंचे थे, तो उन्होंने अपने पेट में साढ़े सात किलो का वजन बांधा और दिखाने की कोशिश की थी, कि एक गर्भवती महिला किन-किन परेशानियों से जूझती है और कैसे इतना वजन लेकर काम भी करती हैं।

महिलाओं का दर्द को जानने की कोशिश
जापान की संकेई अखबार ने उस समय की रिपोर्ट में बताया था कि, ओगुरा और दो अन्य पुरुष सांसदों को अपनी दैनिक दिनचर्या के दौरान 7.3 किलोग्राम (16 पाउंड) गर्भावस्था पेट रखना था, ताकि बच्चे जब पेट में होता है, तो उस वक्त शरीर पर क्या बोझ होता है, उसे समझा जा सके। ओगुरा के ब्लॉग के अनुसार, शरीर से बंधा हुआ सूट, गर्भावस्था के सात महीने के बिंदु पर वजन बढ़ाने का अनुकरण करने के लिए है। उन्होंने ब्लॉग में समझाया कि, जैकेट पहनते समय उन्हें पीठ दर्द का अनुभव हुआ था और जब वो ट्रेन या बस या फिर भीड़-भाड़ वाली जगह से गुजरते थे, तो उन्हें चिंता होने लगती थी, जब कोई यात्री उनसे टकरा जाता था। हालांकि, उन्होंने मंत्री बनने के बाद कहा कि, 'ऐसा नहीं है, कि मेरे पास अन्य लोगों की तुलना में इस नीति के बारे में ज्यादा सार्थक राय हैं, लेकिन अब मुझे लगता है कि, मैं गर्भवती महिलाओं का समर्थन करने के लिए एक सांसद के रूप में ज्यादा काम कर सकता हूं'।

जापान में रिकॉर्ड संख्या में कम बच्चों का जन्म
जापान स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जापान में रिकॉर्ड संख्या में कम, यानि सिर्फ 8 लाख 11 हजार 604 बच्चों का ही जन्म हुआ। जबकि, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद करीब 1 करोड़ 40 लाख लोगों की मौत हुई है। स्थिति ये है, कि जापान में अब 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को भी काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, क्योंकि कामकाजी लोगों का भारी अभाव हो गया है। जापान में 65 साल की उम्र से ज्यादा लोगों की संख्या बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई है, यानि देश की एक तिहाई जनसंख्या बूढ़ी हो चुकी है। ओगुरा की नियुक्ति के साथ सिर्फ दो महिलाएं हीं किशिदा के नए मंत्रिमंडल का हिस्सा बनी हैं। वहीं, जापान की राजनीति में महिलाओं को बढ़ावा नहीं देने के आरोप लगते रहे हैं और जापान सरकार में इस वक्त सिर्फ 2 महिलाएं हीं शामिल हैं। वहीं, बात जनसंख्या की करें, तो जापान की जनसंख्या साल 2021 के मुताबिक सिर्फ 12 करोड़ 32 लाख 23 हजार 561 थी, जिनमें से 59 प्रतिशत आबादी कामकाजी है।

बुरी तरह गिर रही है जापान की जनसंख्या
जापान की जनसंख्या 1 जनवरी, 2022 तक कुल 125.93 मिलियन थी, जो 1950 में दर्ज किए गए आंकड़ों के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। यह नवीनतम सरकारी डेटा बुधवार को सामने आया। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने आंतरिक मामलों और संचार के मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मृत्यु जन्म से अधिक हो गई और कोविड-19 सीमा नियंत्रण विदेशियों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर देता है, जापान की कुल आबादी गिरकर 125,927,902 हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 726,342 या 0.57 प्रतिशत कम है।

2017 में बज गया था खतरे का अलार्म
जापान की जनसंख्या 2017 की जनगणना के अनुसार 12 करोड़ 80 लाख थी। रिपोर्ट का अनुमान था कि इस सदी के आखिर तक जापान की संख्या आधी रह जाएगी यानी करीब पांच करोड़ 30 लाख। जापान में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी सबसे अधिक बताई जाती है। इस देश में मेहनत और श्रम करने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। सरकारी अनुमान में बताया गया था कि 2040 तक यहां बुजुर्गों की संख्या 35 फीसदी से अधिक हो जाएगी। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना महामारी के कारण देश में जनसंख्या के बढ़ने की स्थिति को और भी अधिक विकट बना दिया है।
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