पाकिस्तान नहीं जापान पर है सबसे अधिक कर्ज, फिर भी कैसे बिना टेंशन के और ऋण ले लेता है ये देश?
जबरदस्त कर्जे में डूबे रहने के बावजूद जापान पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार है। हर साल जापान को 'ऋण खरीद' के जरिए निवेशक पैसा उधार दे देते हैं जिससे अर्थव्यवस्था टिकी हुई है।

श्रीलंका के बाद अब पाकिस्तान अपने आर्थिक हालात को लेकर बेहद चर्चा में है। विदेशी मुद्रा भंडार भी गिरकट न्यूनतम हो चुका है। बीते साल आई बाढ़ से देश उभर नहीं पा रहा है। पाकिस्तान पर कर्ज बढ़ता जा रहा है और अब ये उसकी जीडीपी का 97 फीसदी के बराबर पहुंच चुका है। हालांकि सबसे अधिक चौंकाने वाली बात ये है कि जापान पर उसकी जीडीपी का 237 फीसदी कर्ज है। फिर भी कोई अर्थशास्त्री देश जापान की अर्थव्यवस्था के डूबने की भविष्यवाणी करता नहीं दिखाई देता। जितने कर्ज में जापान है अगर कोई और एशियाई देश होता तो अब तक खतरे की घंटी बज जुकी होती। लेकिन जापान के मामले में कहीं कोई शोर नहीं हो रहा है... आखिर इसकी वजह क्या है?

जापान पर उसकी GDP का 237% कर्ज
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल सितंबर के आखिरी दिनों में जापान (Japan) के ऊपर कर्ज की राशि 9.087 ट्रिलियन डॉलर थी। ये राशि उसके जीडीपी से 237 फीसदी ज्यादा है। जापान पर भारी कर्ज होने के पीछे सबसे बड़ा कारण ये है कि अपनी अर्थव्यस्था में चलायमान रखने के लिए सरकार ने कई सालों तक घरेलू खर्चे में अधिक पैसा लगाया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 'पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनोमिक्स' के सीनियर फेलो ताकेशी ताशीरो की मानें तो जापान में लोग अधिक बचाते हैं, जबकि निवेश कम है। इसलिए यहां डिमांड बहुत ही कमजोर है। ऐसे में सरकार की ओर से 'आर्थिक प्रोत्साहन' की आवश्यकता महसूस होती है।

स्वास्थ्य-सुरक्षा पर अधिक खर्च
ताकेशी ताशीरो के मुताबिक इस समस्या की एक अहम वजह जापान में आबादी भी है। जापानी लोग दुनिया के बाकी लोगों की तुलना में अधिक उम्र तक जीते हैं। ऐसे में उनकी सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक खर्च होता है। ऐसा माना जाता है कि जापान में लोग भविष्य को लेकर अधिक आशंकित रहते हैं और बचत पर ज्यादा जोर देते हैं। इसके लिए जापानी लोग रिटायर होने से पहले जितना संभव हो अपनी सारी कमाई बचाने में लगा देते हैं।

कर्ज में डूबे होने के बाद टिका है देश
दिलचस्प बात ये है कि इस हद तक कर्जे में डूबे रहने के बावजूद जापान पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार है। हर साल जापान को 'ऋण खरीद' के जरिए निवेशक पैसा उधार दे देते हैं जिससे अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापान पर कर्ज का बोझ 90 के दशक में बढ़ना शुरू हुआ क्योंकि इस दौरान वित्तीय और रियल एस्टेट कारोबार में में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फिर भी आंकड़ों के मुताबिक साल 1991 में जीडीपी (GDP) और कर्ज अनुपात 39 फीसदी ही था। लेकिन इसके बाद साल दर साल जापान की इकॉनमी में गिरावट आती रही और कर्ज बढ़ता रहा।

जापान को कैसे मिल जाता है कर्ज
जापान अंतरराष्ट्रीय बाजार से इस वादे पर कर्ज लेता है कि वह निवेशकों को उनके पूरे पैसे थोड़े मुनाफे के साथ लौटा देगा। चूंकि जापान आजतक कभी दिवालिया नहीं हुआ है इसलिए उसे ये पैसे मिल भी जाते हैं। ताशीरो के मुताबिक जापान को बड़े पैमाने पर कर्ज मिलने के पीछे की अहम वजह उसका विकसित देश होना है। विकसित देश होने के नाते जापान के बॉन्ड की अधिक वैल्यू होती जो कि कर्ज़ के बदले बेहतर सिक्योरिटी की तरह काम करता है। दुनिया में कई निवेशक हैं जो मुनाफे से अधिक अपने पैसे की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए जापान पसंदीदा देश होता है।
घटती जन्मदर से परेशान हुआ जापान, पीएम बोले- देश को बचाने के लिए 'अभी नहीं तो कभी नहीं' वाला हाल












Click it and Unblock the Notifications