चिड़ियाघर के पिंजरे में अकेली बंद लंगूर हो गई प्रेगनेंट, मां बनने की वजह का हैरान करने वाला खुलासा
चिड़ियाघर ने कहा है, कि लंगूर का बच्चा, जिसका अभी नाम नहीं रखा गया है, उसका वजन लगभग 2 किलोग्राम (4.4 पाउंड) है और अपनी मां मोमो के साथ रह रहा है।

जापान के चिड़ियाघर में फरवरी 2021 में गर्भवती हुई मादा लंगूर की गुत्थी सुलझाने का दावा किया गया है। ये मादा लंगूर, जो कई सालों से पिंजरे में अकेले बंद थी, उसके गर्भवती होने के बाद चिड़ियाघर के सभी कर्मचारी हैरान रह गये थे। वहीं, इस घटना के दो साल बीतने के बाद अब चिड़ियाघर के कर्मचारियों को लगता है, कि उन्होंने उस रहस्य को सुलझा लिया है, कि अकेले रहने वाली मादा लंगूर कैसे गर्भवती हो गई।

जापान के चिड़ियाघर का है मामला
चिड़ियाघर में अकेली रहने वाली मादा लंगूर के गर्भवती होने का ये मामला फरवरी 2021 की है, जब जापान के नाकासाकी शहर के कुजुकुशिमा चिड़ियाघर और बॉटनिकल गार्डन की है। ये मादा लंगूर जब गर्भवती हुई थी, उस वक्त उसकी उम्र 12 साल थी। इस मादा लंगूर का नाम मोमो है और वो उस वक्त प्रेगनेंट हुई, जब उसके पिंजरे में कोई नर लंगूर नहीं रखा गया था। बावजूद इसके मोमो ने बच्चे को जन्म दिया। अब दो साल बाद मादा लंगूर के बच्चे का डीएनए टेस्ट रिपोर्ट सामने आई है, जिसके जरिए पता लगाने की कोशिश की गई है, कि आखिर उस बच्चे का पिता कौन है और इस सिद्धांत के जरिए ये पता लगाने की भी कोशिश की गई है, कि आखिर गिबन्स कैसे मिलते हैं।

कैसे हुई प्रेगनेंट?
मादा लंगूर कैसे प्रेगनेंट हुई, इसका पता लगाने के लिए चिड़ियाघर में मौजूद सभी लंगूरों का भी डीएनए टेस्ट किया गया और बच्चे के डीएनए से उस रिपोर्ट को मिलाया गया। इस दौरान पता चला, कि बच्चे का पिता 34 साल का एक फुर्तिला मेल गिब्बन इटो है, जिसका पिंजरा मोमो के गर्भवती होने के समय उसके ही पिंजरे से सटाकर रखा गया था। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने बताया है, कि ऐसा माना जा रहा है, कि मोमो और इटो ने अपने बाड़ों के बीच स्टील प्लेट में मौजूद एक छोटे से छेद के माध्यम से संभोग करने में कामयाबी हासिल की थी। छेद का व्यास लगभग 9 मिलीमीटर (0.3 इंच) था। इस छोटे से छेद के जरिए इन दोनों ने संभोग किया था और इस वजह से मादा लंगूर गर्भवती हो गई थी।

पूरी तरह स्वस्थ है बच्चा
चिड़ियाघर ने कहा है, कि लंगूर का बच्चा, जिसका अभी नाम नहीं रखा गया है, उसका वजन लगभग 2 किलोग्राम (4.4 पाउंड) है और अपनी मां मोमो के साथ रह रहा है और वो पूरी तरह से स्वस्थ है। चिड़ियाघर के उप निदेशक हिदेकी हिसानो ने कहा, कि "यह दुनिया में पैदा हुआ एक अनमोल जीवन है, हम उसकी अच्छी देखभाल करना जारी रखेंगे और आशा करते हैं कि वह एक स्वस्थ लंबा जीवन जीएगा।" आपको बता दें, कि गिबन्स सबसे छोटे वानरों की प्रजाति वाला जानवर होता है, लेकिन उनके पास ज़ोर से गाने वाली आवाज़ें होती हैं और ये 35 मील प्रति घंटे की रफ्तार से एक शाखा से दूसरे शाखा तक झूल सकती हैं। दुनिया में दर्जनों गिब्बन प्रजातियां हैं, जो एशिया के कुछ हिस्सों की मूल निवासी मानी जाती है। ये प्रजाति भारत में भी पाई जाती है। ये प्रजाति तेजी से विलुप्त होने के कगार की तरफ है और अंतर्राष्ट्रीय संघ में एक लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में इस लिस्ट किया गया है। इंसानी गतिविधियों की वजह से इनकी प्रजाति खतरे में आई है।












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