असंभव को संभव बनाएगा जापान, धरती से चंद्रमा तक चलाएगा बुलेट ट्रेन, ब्लूप्रिंट किया जारी

टोक्यो, 15 जुलाईः आने वाले वर्षों में इंसान पृथ्वी से बुलेट ट्रेन पर सवार होकर चांद और मंगल ग्रह तक जा सकेगा। इस असाधारण प्रोजेक्ट पर जापान ने काम करना शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत जापान धरती से चांद तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम कर रहा है। जापान की योजना पहले इस बुलेट ट्रेन को चंद्रमा तक ले जाने की है, अगर उसकी ये योजना अगर सफल रहती है तो फिर इसे मंगल तक ले जाया जाएगा।

पिछले सप्ताह इस प्रोजेक्ट की हुई घोषणा

पिछले सप्ताह इस प्रोजेक्ट की हुई घोषणा

इस प्रोजेक्ट को जापान के क्योटो विश्वविद्यालय और निर्माण फर्म काजिमा कॉर्पोरेशन ने तैयार किया है। काजिमा कंस्ट्रक्शन ने क्योटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के सहयोग से पिछले सप्ताह एक संवाददाता सम्मेलन में भविष्य की योजनाओं की घोषणा की है। जापान में शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक कृत्रिम अंतरिक्ष आवास और पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल को जोड़ने वाली अंतर-ग्रहीय ट्रेन प्रणाली के लिए नई योजनाओं का अनावरण किया है।

ग्रैविटेशन पैदा करेगी ट्रेन

ग्रैविटेशन पैदा करेगी ट्रेन

क्योटो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेस बुलेट ट्रेन के लिए हेक्सागोन स्पेस ट्रैक सिस्टम नामक प्रणाली तैयार की जाएगी। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इंटरप्लेनेटरी स्पेस ट्रेन पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल के बीच यात्रा करते समय अपना गुरुत्वाकर्षण पैदा करेगी।

अंतरिक्ष जाएंगे मनुष्य

अंतरिक्ष जाएंगे मनुष्य

क्योटो विश्वविद्यालय के एसआईसी मानव अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र के निदेशक योसुके यामाशिकी ने समाचार सम्मेलन के दौरान कहा कि अन्य देशों की अंतरिक्ष विकास योजनाओं में दूर-दूर तक इस तरह की कोई योजना नहीं है। यामाशिकी ने कहा, "हमारी योजना महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का प्रतिनिधित्व करती है जो यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि भविष्य में मनुष्य अंतरिक्ष में जा सकेंगे।"

ग्लास हैबिबेट कर रहा तैयार

ग्लास हैबिबेट कर रहा तैयार

इसके लिए जापान एक अन्य योजना पर भी काम कर रहा है। जापान मंगल ग्रह पर ग्लास हैबिटेट बनाने की सोच रहा है। यह देश मंगल ग्रह पर एक ऐसा आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट बनाने पर काम कर रहा है, जिसका वातावरण बिल्कुल पृथ्वी जैसा होगा, ताकि मनुष्य वहां आराम से रह सके। इस दौरा इंसान पर ग्रह के वातावरण का कोई इफेक्ट ना पड़े। दरअसल, कम गुरुत्वाकर्षण वाले स्थानों पर इंसानों की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में जापान मंगल ग्रह पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को तैयार करने के लिए घूर्णी गतियों के माध्यम से केन्द्रापसारक बल का उपयोग करेंगे, जो चंद्रमा से छह गुना अधिक है।

कृत्रिम पर्यावरण होगा निर्मित

कृत्रिम पर्यावरण होगा निर्मित

इस आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट के प्रोजेक्ट को द ग्लास नाम जापानी शोधकर्ताओं ने दिया है। इसके तहत जापानी वैज्ञानिकों ने चांद पर एक 1,300 फीट की संरचना बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं। यह कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण के साथ एक शंक्वाकार जीवित संरचना होगी जहां 'जल-जंगल-जमीन' सहित सार्वजनिक परिवहन का निर्माण किया जाएगा। चंद्रमा पर स्थित इस पर्यावरण को "लुनाग्लास" कहा जाएगा, जबकि मंगल ग्रह पर स्थित यह निवास स्थान "मार्सग्लास" कहलाएगा।

चंद्रमा पर ठिकाना बनाने की योजना

चंद्रमा पर ठिकाना बनाने की योजना

जापान का यह प्रोजेक्ट ऐसे समय में तैयार हो रहा है जब कई बड़े देश चंद्रमा पर स्थायी ठिकानों की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का लक्ष्य 2025 से पहले मनुष्यों को चंद्रमा के सतह पर वापस लाना है। बता दें कि नासा इस दशक के अंत में मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस लाने की योजना बना रहा है। इसके अलावा चांद पर इंसानी बस्ती बसाने के प्रयास भी जारी हैं।

पूरा होने में लगेंगे 120 साल

पूरा होने में लगेंगे 120 साल

द इंडिपेंडेंट ने बताया कि इसके एक सरलीकृत्र संस्करण को 2050 तक पूरा करने की योजना है, जबकि इसे पूरी तरह सफल बनाने में 70 साल और लग सकते हैं। इसका मतलब इसे अंतिम रूप तक पहुंचने में लगभग 120 साल और लगेंगे।

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