बिलावल भुट्टो के भारत दौरे पर पुंछ हमले का होगा असर? पाकिस्तान के घातक मंसूबों की क्रोनोलॉज समझिए

पुलवामा हमले के बाद भारत ने साल 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया था, जिसके बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच युद्ध की नौबत तक आ गई थी।

poonch Terror attack

Jammu and Kashmir Terrorist Attack: पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के भारत दौरे का ऐलान होने के कुछ ही देर बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय सैनिकों पर भीषण हमला हुआ। इस हमले में इंडियन आर्मी के पांच जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। इस कायराना हमले का साया अब बिलावल के दौरे पर पड़ रहा है।

गुरुवार का पुंछ में इंडियन आर्मी पर हुआ हमला, भारत-पाकिस्तान संबंधों में कड़वाहट को और बढ़ा सकता है, जो पहले से ही ठंडे बस्ते में हैं।

सूत्रों ने कहा कि जैश समर्थित आतंकी समूह, पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने पुंछ हमले की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों को संदेह है, कि इस घटना में चार आतंकवादी शामिल थे। आपको बता दें, कि जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह है।

बिलावल की यात्रा पर भारत का स्टैंड

इस्लामाबाद ने गुरुवार को एक घोषणा में कहा है, कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने गोवा जाएंगे। वहीं, बिलावल की यात्रा को लेकर भारत ने कहा है, कि बहुपक्षीय आयोजन में अकेले एक देश की भागीदारी पर ध्यान देना उचित नहीं होगा।

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, कि इसी तरह के निमंत्रण सभी SCO सदस्य राज्यों को दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "किसी एक विशेष देश की भागीदारी को देखना वास्तव में उचित नहीं होगा"।

कई आतंकवादी समूह पाकिस्तानी धरती से भारत के खिलाफ काम करते हैं और विशेष रूप से घाटी में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाते रहते हैं। भारत ने बार-बार पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया है, और राज्य और गैर-राज्य एक्टर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुंछ हमले से कुछ ही दिन पहले, मीडिया रिपोर्टों में खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया था, कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में विशिष्ट लक्ष्यों पर ग्रेनेड हमले की योजना बना रहा था, ईद के बाद हत्याएं, और जी-20 बैठक के आसपास श्रीनगर में हमले की योजना बना रहा है। रिपोर्ट में कहा गया था, कि सुरक्षा बल, राजनीतिक कार्यकर्ता और जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग, जो केंद्र शासित प्रदेश में हैं, वो आतंकियों का मुख्य लक्ष्य हो सकते हैं।

क्या पुंछ हमले का भुट्टो की यात्रा पर असर पड़ेगा?

पुंछ में आतंकी हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध प्रभावित होने की संभावना है और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की यात्रा प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, गोवा में एससीओ की बैठक में अभी दो हफ्ते बाकी हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को हुए आतंकी हमले ने यात्रा के मिजाज पर सवालिया निशान लगा दिया है।

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तत्काल मरम्मत से परे तनावपूर्ण प्रतीत होते हैं, जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर अक्सर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों की वजह से भारत ने अब पाकिस्तान पर विश्वास करना बंद कर दिया है। लिहाजा, द्विपक्षीय संबंधों पर आतंकी हमलों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

इससे पहले भी, भारत और पाकिस्तान के बीच नियोजित शांति वार्ता 26/11 के मुंबई हमलों के बाद ठप हो गई थी, जिसमें कम से कम 179 लोगों की जान चली गई। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने उस घातक हमले को अंजाम दिया था।

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कैसे पुलवामा हमले ने भारत-पाक संबंधों को बदल दिया

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    जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में 2019 के आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध गंभीर रूप से तनावपूर्ण हो गए थे, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा कम से कम 40 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। जवाबी कार्रवाई में भारत ने बालाकोट में आतंकी कैंपों पर सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

    भारत ने उसके बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया, दिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में और गिरावट आई। जम्मू और कश्मीर में हुए सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक, पुलवामा हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान को दिया 'मोस्ट-फेवर्ड नेशन' का दर्जा वापस ले लिया। वहीं, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी अभिनेताओं और कलाकारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

    भारत पर आगे क्या करेगा?

    भारत ने हमेशा अपनी 'पड़ोसी पहले नीति' को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा की है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है, कि दोनों देशों को आतंकवाद और हिंसा से मुक्त माहौल में मुद्दों को सुलझाना चाहिए और ऐसा अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है।

    भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है, कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा और चेतावनी दी है, कि वह भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के सभी प्रयासों से निपटने के लिए दृढ़ और निर्णायक कदम उठाएगा।

    मई में गोवा में एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक एक ऐसा अवसर है, जहां दोनों देश एक बहुपक्षीय मंच पर जुड़ सकते हैं। लेकिन पुंछ हमले के बाद द्विपक्षीय बातचीत की कोई भी कोशिश रुक सकती है। लिहाजा, यह देखना होगा कि बिलावल भुट्टो जरदारी की भारत यात्रा कैसी होती है?

    इसे भी पढ़ें, बिलावल भुट्टो क्यों हुए भारत आने के लिए तैयार? पाकिस्तानी विदेश मंत्री का दौरा कम कर पाएगा संबंधों में तनाव

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