बिलावल भुट्टो क्यों हुए भारत आने के लिए तैयार? पाकिस्तानी विदेश मंत्री का दौरा कम कर पाएगा संबंधों में तनाव

पिछले साल अप्रैल महीने में शहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद बिलावल 33 वर्ष की आयु में पाकिस्तान के "सबसे युवा" विदेश मंत्री बने। बिलावल भुट्टो को 2007 में अपनी मां की हत्या के बाद पीपीपी की बागडोर विरासत में मिली थी।

Bilawal Bhutto India Visit News

Bilawal Bhutto India Visit News: पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत की यात्रा करेंगे। इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पिछली द्विपक्षीय यात्रा जुलाई 2011 में हुई थी, जब हिना रब्बानी खार भारत आई थीं।

बिलावल भुट्टो जरदारी की यात्रा की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्षों से तनावपूर्ण चल रहे हैं। खासकर कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनयिक संबंध निम्नतम स्तर तक पहुंच चुके हैं।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, कि "बिलावल भुट्टो जरदारी भारत के गोवा में 4-5 मई 2023 को होने वाली एससीओ काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स (सीएफएम) में पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।"

ऐसे में बिलावल भुट्टो जरदारी की भारत यात्रा के बारे में जानना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है? लिहाजा, पाकिस्तान के नेताओं ने पहले कब भारत का दौरा किया है? आईये हम समझने की कोशिश करते हैं।

बिलावल भुट्टो करेंगे भारत का दौरा

इस साल जनवरी महीने में इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के माध्यम से भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को भारत आने और एससीओ की बैठक में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था, जिसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा की घोषणा की गई है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया को बताया, कि "बैठक में हमारी भागीदारी एससीओ चार्टर और प्रक्रियाओं के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता और पाकिस्तान द्वारा अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में क्षेत्र को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है।"

आपको बता दें, कि भारत ने पिछले साल उज़्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के समापन समारोह के दौरान एससीओ की अध्यक्षता अपने हाथ में ली थी। आपको बता दें, कि एससीओ की अध्यक्षता बारी बारी से इसके सभी सदस्य देशों को दी जाती है।

भारत और पाकिस्तान के अलावा, एससीओ के अन्य सदस्य देश चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं। इन आठ सदस्य देशों में वैश्विक जनसंख्या का लगभग 42 प्रतिशत और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें चार पर्यवेक्षक राज्य - अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया - और छह संवाद सहयोगी - अर्मेनिया, अजरबैजान, कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका और तुर्की भी शामिल हैं।

माना जा रहा है, कि पाकिस्तान अपने विदेश मंत्री को भारत भेजकर यह संदेश देना चाहता है, कि वो भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से लंबे अर्से से बात चल रही है और बिलावल भुट्टो का दौरा होने के बाद, दोनों देशों के बीच के तनाव काफी कम हो जाएंगे। हालांकि, पाकिस्तान में इस साल आम चुनाव होने हैं, लिहाजा व्यापारिक संबंधों के शुरू होने की उम्मीद नहीं के बराबर है।

Bilawal Bhutto India Visit News

बिलावल भुट्टो जरदारी की भारत यात्रा का महत्व

पुलवामा हमले के बाद भारत ने साल 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया था, जिसके बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच युद्ध की नौबत तक आ गई थी। पुलवामा हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गये थे।

वहीं, अगस्त 2019 में, भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया, और जम्मू और कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। इसके बाद, तत्कालीन इमरान खान सरकार ने अपने राजदूत को वापस बुलाकर और भारत के साथ व्यापार संबंधों को खत्म कर दिया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले पाकिस्तान ने भारत को भी चिढ़ाया भी है, लिहाजा ये संबंध नीचले स्तर तक जा चुका है, लिहाजा बिलावल भुट्टो का भारत दौरा, उम्मीद की एक रोशनी जरूर दिखा रहा है।

हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से कहा गया है, कि बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी।

जब पाकिस्तानी नेताओं ने भारत का दौरा किया

दिसंबर 2016 में, तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़, जिन्हें द वायर के अनुसार "वास्तविक विदेश मंत्री" माना जाता था, उन्होंने हार्ट ऑफ़ एशिया सम्मेलन में भाग लेने के लिए पंजाब में अमृतसर का दौरा किया।

वहीं, आखिरी बार एक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री मई 2014 में उस वक्त भारत की धरती पर कदम रखा था, जब नरेन्द्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नवाज शरीफ को अपने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा था।

वहीं, मार्च 2011 में, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने चंडीगढ़ में अपने भारतीय समकक्ष मनमोहन सिंह के साथ भारत-पाकिस्तान विश्व कप क्रिकेट सेमीफ़ाइनल देखा। जबकि, 2012 में, पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी दिल्ली पहुंचे थे और सात वर्षों में किसी पाकिस्तानी राष्ट्राध्यक्ष की ये भारत की पहली यात्रा थी।

जरदारी ने भारतीय प्रधान मंत्री सिंह से मुलाकात की और राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रसिद्ध मस्जिद में उनका सम्मान भी किया गया। वार्ता के बाद, जरदारी और मनमोहन सिंह, दोनों ने परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच संबंध सुधारने की पारस्परिक इच्छा व्यक्त की थी।

वहीं, इससे पहले साल 2005 में, जनरल परवेज मुशर्रफ, जो उस समय पाकिस्तानी राष्ट्रपति थे, उन्होंने 17 अप्रैल को फिरोज शाह कोटला स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गये छठे वनडे को देखा था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+