'होलोकास्ट के बाद यहूदियों से पहली बार इतनी बर्बरता'; इजराइली PM की पत्नी ने पोप को पत्र लिख की ये मांग
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू ने रविवार को पोप फ्रांसिस को पत्र लिखकर हमास द्वारा बंदी बनाए गए बंधकों की "बिना शर्त रिहाई" की मांग में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
सारा नेतन्याहू ने पोप फ्रांसिस को खत लिखा जिसमें उन्होंने 7 अक्टूबर को इजराइल में हमास के आतंकियों द्वारा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर की गई बर्बरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि हमास ने अकारण हमले के दौरान निर्दोष नागरिकों का नरसंहार किया, बच्चों को जलाया और महिलाओं के साथ बलात्कार किया।

सारा नेतन्याहू ने इसे 'महाप्रलय' (हिटलर के शासन के दौरान) के बाद यहूदियों के खिलाफ हुई सबसे बड़ी बर्बर घटना बताया। सारा ने लिखा है कि हमले को 78 दिन बीत चुके हैं और 129 बंधकों को अभी भी रिहा नहीं किया गया है।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई बंधक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। सारा ने लिखा कि उनमें से कई घायल और बीमार हैं। वे भूख से पीड़ित हैं, और कुछ को जीवित रहने के लिए आवश्यक बुनियादी दवाओं से वंचित कर दिया गया है।"
सारा ने नोआ अरगामनी नाम की एक बंधक का भी जिक्र किया। अरगामनी को 7 अक्टूबर को हमले के दौरान बंधक बना लिया गया था। सारा ने साझा किया कि नोआ की मां स्टेज 4 के ब्रेन कैंसर से जूझ रही हैं और अपनी बेटी से मिलना चाहती हैं।
सारा ने लिखा, "परम पावन (पोप फ्रांसिस) मैं आपसे चाहती हूं कि आप इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें और बंधकों की रिहाई कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।"
पत्र में, इजराइली प्रधानमंत्री की पत्नी ने पोप से यह भी अनुरोध किया कि वह रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति को गाजा में रखे गए सभी बंधकों से मिलने और उन्हें चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने के लिए कहें।
आपको बता दें कि बीते महीने नवंबर में एक सप्ताह के लिए इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ था। युद्धविराम के दौरान, इजराइली जेलों में बंद 240 फिलिस्तीनियों की आजादी के बदले में 80 इजराइलियों सहित 105 बंधकों को रिहा किया गया था। हालांकि, युद्धविराम को आगे बढ़ाने की बातचीत विफल होने के बाद युद्ध फिर से शुरू हो गया था।












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