येरूशलम में तनाव के बीच इजरायल और UAE के बीच बड़ी डील, भारत को भी होगा जबरदस्त फायदा

महीनों की बातचीत के बाद मंगलवार को दुबई में इजराइल की अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्री ओरना बारबीवई और यूएई के वित्त मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मैरी ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

दुबई, जून 02: इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और इस तरह से यूएई पहला अरब राज्य बन गया है, जिसने इजरायल के साथ पहला बड़ा व्यापार समझौता किया है। इजरायल और यूएई के बीच हुआ ये व्यापार समझौता दो मध्य पूर्वी देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया एक अहम कदम है, लेकिन इससे भारत को भी जबरदस्त फायदा होगा।

इजरायल-यूएई में व्यापार समझौता

इजरायल-यूएई में व्यापार समझौता

महीनों की बातचीत के बाद मंगलवार को दुबई में इजराइल की अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्री ओरना बारबीवई और यूएई के वित्त मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मैरी ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के बाद यूएई में इजरायल के राजदूत अमीर हायेक ने ट्विटर पर कहा कि, "हो गया"। उन्होंने पहले पोस्ट किए गए एक अन्य ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि "यूएई और इज़राइल अगले घंटे एफटीए पर हस्ताक्षर करेंगे"। यूएई-इजरायल बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष डोरियन बराक ने कहा कि व्यापार समझौते ने टैक्स रेट, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और इंटलेक्च्वल प्रॉपर्टी को परिभाषित किया है, जो ज्यादा से ज्यादा इजरायली कंपनियों को यूएई में अपने कार्यालय खोलने के लिए प्रोत्साहित करेगा, खासकर दुबई में कई इजरायली कंपनियां अपने दफ्तर खोल सकेंगी।

एक हजार इजरायली कंपनियों को फायदा

एक हजार इजरायली कंपनियों को फायदा

यूएई-इजरायल बिजनेस काउंसिल का परिषद का अनुमान है कि, दोनों देशों के बीच हुई इस समझौते के बाद इस साल के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात में या उसके माध्यम से काम करने वाली लगभग 1,000 इज़राइली कंपनियां दक्षिण एशिया, सुदूर पूर्व और मध्य पूर्व के साथ व्यापार कर रही होंगी। डोरियन बराक ने कहा कि, 'घरेलू बाजार के जरिए आप पूरे अवसर को भुना नहीं सकते हैं और अवसर वास्तव में दुबई में स्थापित हो रहा है, और दुबई आने वाली कई कंपनियों के पास कई क्षेत्रों में व्यापक व्यापार स्थापित करने के अवसर मिलेंगे'।

सामानों पर टैक्स हटेगा

सामानों पर टैक्स हटेगा

हस्ताक्षर करने से पहले इज़राइल के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने कहा था कि, यह समझौता खाद्य, कृषि, सौंदर्य प्रसाधन, चिकित्सा उपकरण और दवा सहित 96% सामानों पर शुल्क हटा देगा। वहीं, यूएई ने भविष्यवाणी की है, जैसा कि इस व्यापार समझौते के तहत हमने अनुमान लगाया है, कि अगले पांच सालों में इससे हमारे बीच का व्यापार हर साल 10 अरब डॉलर के करीब बढ़ेगा। अमीरात के व्यापार मंत्री थानी अल-ज़ायोदी ने ट्विटर पर कहा कि, "हमारा समझौता विकास को गति देगा, रोजगार पैदा करेगा और पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के एक नए युग की ओर ले जाएगा।" उन्होंने कहा कि, 'हम सब मिलकर सामने आने वाली बाधाओं को दूर करेंगे और व्यापक व्यापार और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देंगे, जो हमारे साझा मार्ग के लिए एक ठोस आधार तैयार करेंगे, नागरिकों की भलाई में योगदान देंगे और व्यापार करना आसान बनाएंगे।"

येरूशलम हिंसा के बीच समझौता

येरूशलम हिंसा के बीच समझौता

इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ये समझौता उस वक्त हुआ है, जब येरूशलम में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है और तीन दिन पहले इजरायली फोर्स अल-अक्शा मस्जिद में दाखिल हुई थी और हिंसक झड़प में कई फिलिस्तीनी घायल हो गये थे। जिसको लेकर यूएई के विदेश मंत्रालय की तरफ से एक ट्वीट किया गया था औऱ कहा गया था, कि अल-अक्शा मस्जिद परिसर में 'इजरायली सैनिकों के संरक्षण में चरमपंथी ताकतों को दाखिल किया गया था'। इसके साथ ही यूएई ने हिंसक झड़प की निंदा की थी। हालांकि, इसके बाद भी इजरायल के लोगों ने येरूशलम पर कब्जे के समर्थन में रैली निकाली थी और कई जगहों पर फिलिस्तीनियों के साथ उनका संघर्ष हुआ था। जिसको लेकर संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि, 'इजरायली अधिकारियों को तनाव कम करने की दिशा में कोशिश करनी चाहिए, ताकि अस्थिरता का माहौल ना बने।'

भारत को होगा फायदा

भारत को होगा फायदा

वहीं, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत को काफी फायदा होगा, क्योंकि यूएई और भारत के बीच पहले ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो चुके हैं और पिछले साल ही भारत अमेरिका को पीछा कर यूएई का दूसरा सबसे बड़ा भागीदार बना है। वहीं, दोनों देशों का लक्ष्य अगले कुछ सालों में व्यापारिक भागीदारी को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाना है। वहीं, भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने इजरायल और यूएई के बीच हुए इस समझौते को काफी अहम बताया और कहा कि, भारत-यूएई और इजरायल भी एक तरह से समझौते से जुड़ गये हैं और तीनों मिलाकर एक त्रिस्तरीय व्यापार सहयोग बढ़ेगा। आपको बता दें, भारत और इजरायल के बीच इसी साल 18 फरवरी को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानि सीईपीए हुआ था।

मध्य पूर्व में भारत की मौजूदगी

मध्य पूर्व में भारत की मौजूदगी

मध्य पूर्व देशों में भारत की मौजूदगी सालों से रही है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ साथ सऊदी अरब, कतर, ओमान और कुवैत जैसे देशों में भारत के करीब सवा करोड़ से ज्यादा नागरिक रहते हैं। इतना ही नहीं, इन देशों में रहने वाले भारतीयों से साल 2021 में भारत को 87 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा आया, लिहाजा मोदी सरकार जानती है, कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध को अगर और भी ज्यादा मजबूत किया जाए, तो इसका जबरदस्त फायदा भारत को मिल सकता है। लिहादा खुद पीएम मोदी ने 2015, 2018 और 2019 में यूएई के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों को नये स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। पीएम मोदी से पहले भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1981 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी।

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