Israel Politics: जंग के बीच खतरे में नेतन्याहू की कुर्सी, दो पूर्व PM ने खोला मोर्चा, कितने खतरे में है सरकार?

Israel Politics: इज़राइल की राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के दो बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett) और विपक्षी नेता याइर लापिड (Yair Lapid) अब एक साथ आ गए हैं। दोनों नेताओं ने अपनी पार्टियों के विलय का ऐलान किया। उनका साफ मकसद है आने वाले चुनावों में नेतन्याहू सरकार को सत्ता से बाहर करना।

नई पार्टी का नाम रखा 'Together'

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इज़राइल में विपक्ष लंबे समय से बिखरा हुआ था। अब पहली बार ऐसा दिख रहा है कि नेतन्याहू के खिलाफ अलग-अलग विचारधाराओं वाले नेता एक मंच पर आने को तैयार हैं। बेनेट के ऑफिस की तरफ से बताया गया कि दोनों पार्टियों के विलय के बाद नई पार्टी का नाम 'Together' रखा जाएगा।

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पहले ऐलान में बेनेट का बड़ा दावा

एक ज्वॉइंट स्टेटमेंट में नेफ्ताली बेनेट ने कहा-

"मैं यह घोषणा करते हुए खुश हूं कि आज रात मैं अपने देश के लिए अब तक का सबसे ज़ायोनी और देशभक्तिपूर्ण कदम उठा रहा हूं।"

बेनेट का यह बयान उनके समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि यह गठबंधन सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देशहित के लिए है।

'बेनेट दक्षिणपंथी हैं, लेकिन ईमानदार'

याइर लापिड ने भी इस मौके पर बेनेट की तारीफ की। उन्होंने कहा:

"बेनेट एक दक्षिणपंथी नेता हैं, लेकिन ईमानदार हैं, और हमारे बीच भरोसा है। साथ ही इस गठबंधन का मकसद देश में बढ़ते राजनीतिक विभाजन को खत्म करना, विपक्षी वोटों को जोड़ना और अगले चुनाव में जीत हासिल करना है।"

उनके मुताबिक, अब इज़राइल को आगे बढ़ाने के लिए नई राजनीति की जरूरत है।

नेतन्याहू सरकार पर 7 अक्टूबर हमले को लेकर सवाल

बेनेट ने घोषणा की कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाएगा। यह वही हमला था जिसने इज़राइल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे। नेतन्याहू सरकार पर आरोप लगा कि उसने खतरे को गंभीरता से नहीं लिया। साथ ही, कुछ आर्मी ऑफिसर ने ये तक दावा किया था कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े नाम इसमें संदेह के दायरे में आ सकते हैं। अब तक मौजूदा सरकार ने ऐसी जांच की मांग को ठुकराया है, जिसपर नेतन्याहू घिरते रहे हैं।

सर्वे क्या कहते हैं?

तब से लेकर अब तक आए कई सर्वे बताते हैं कि अगर चुनाव आज हो जाएं, तो नेतन्याहू की राह आसान नहीं होगी। अधिकांश सर्वेक्षणों में नेफ्ताली बेनेट को नेतन्याहू के खिलाफ सबसे मजबूत चेहरा माना गया है।

इजरायल में सीटों का गणित समझिए

23 अप्रैल को जारी N12 न्यूज़ सर्वेक्षण के मुताबिक:

• बेनेट की पार्टी को 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) में 21 सीटें मिलने का अनुमान था
• नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 25 सीटें मिलने का अनुमान था

यानी नेतन्याहू अब भी आगे हैं, लेकिन अंतर बहुत बड़ा नहीं है। गठबंधन बनने के बाद यह गणित बदल सकता है।

लापिड की पार्टी क्यों कमजोर हुई?

उसी सर्वे में याइर लापिड की पार्टी को सिर्फ 7 सीटें मिलने का अनुमान था। यह संख्या उनकी मौजूदा 24 सीटों से काफी कम है। इसका मतलब साफ है कि अकेले लापिड की पकड़ कमजोर हुई है, इसलिए उन्होंने बेनेट के साथ हाथ मिलाकर नया रास्ता चुना।

कौन हैं याइर लापिड?

62 साल के लापिड पहले टीवी न्यूज़ एंकर रहे हैं। बाद में राजनीति में आए और खुद को धर्मनिरपेक्ष मध्यम वर्ग की आवाज़ के तौर पर स्थापित किया। लापिड 1 जुलाई 2022 से 29 दिसंबर 2022 तक इजरायल के पीएम पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी राजनीति खासकर इन मुद्दों पर केंद्रित रही है:

• टैक्स का बोझ
• सैन्य सेवा में असमानता
• धार्मिक दलों को विशेष सुविधाएं
• मिडिल क्लास की परेशानियां

कौन हैं नेफ्ताली बेनेट?

54 साल के नेफ्ताली बेनेट पहले सेना कमांडो रह चुके हैं। बाद में टेक सेक्टर में सफल बिजनेसमैन बने और करोड़पति बने। उनकी छवि एक राष्ट्रवादी लेकिन व्यावहारिक नेता की रही है। यही वजह है कि वे दक्षिणपंथी वोटरों के साथ-साथ कुछ न्यूट्रल वोट भी खींच सकते हैं। वे 13 जून 2021 से 30 जून 2022 तक इजरायल के प्रधानमंत्री रहे हैं।

वॉर मैनेजमेंट पर भी नेतन्याहू घिरे

लापिड और बेनेट दोनों नेतन्याहू के युद्ध प्रबंधन (War Management) के मुखर आलोचक रहे हैं। खासकर गाजा युद्ध और ईरान के साथ तनाव को लेकर उन्होंने सरकार को घेरा है। लापिड ने हाल ही में ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर को राजनीतिक आपदा बताया था। उनका कहना था कि सरकार ने बिना रणनीति के फैसले लिए, जिससे देश की छवि और सुरक्षा दोनों प्रभावित हुई।

क्या पहली बार साथ आ रहे दोनों पूर्व PM?

बेनेट और लापिड का साथ आना नया जरूर है, लेकिन पहली बार नहीं। 2021 के चुनावों में दोनों नेताओं ने मिलकर नेतन्याहू के लगातार 12 साल के शासन का अंत किया था। उस समय उन्होंने कई छोटे दलों को साथ जोड़कर गठबंधन सरकार बनाई थी। हालांकि वह सरकार ज्यादा समय नहीं चली और केवल 18 महीने बाद गिर गई। इससे पहले 2013 में भी दोनों नेता नेतन्याहू की सरकार में शामिल हुए थे। उस समय उनके गठबंधन की वजह से नेतन्याहू के पारंपरिक रूढ़िवादी यहूदी सहयोगी बाहर रह गए थे।

नेतन्याहू की वापसी और कट्टर दक्षिणपंथी सरकार

इज़राइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेतन्याहू ने नवंबर 2022 में सत्ता में वापसी की थी। वापसी के बाद उन्होंने देश के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकार बनाई। इसमें कट्टर राष्ट्रवादी और धार्मिक दलों को शामिल किया गया। शुरुआत में इसे मजबूत सरकार माना गया, लेकिन बाद में कई विवाद सामने आए।

क्या नेतन्याहू के लिए खतरे की घंटी है?

अब असली सवाल यही है। अगर बेनेट और लापिड अपने वोट बैंक को जोड़ने में सफल रहते हैं, तो नेतन्याहू के लिए अगला चुनाव मुश्किल हो सकता है। लेकिन इज़राइल की राजनीति हमेशा गठबंधन आधारित रही है। वहां सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी बनना काफी नहीं, बल्कि भारत की तरह बहुमत जुटाना असली गेम होता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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