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Israel-Iran War: ईरान ने दागा सबसे दर्दनाक बम, सालों तक रहेगी दहशत, धरी रह गई इजरायल की धमकी

Israel-Iran War: ईरान-इजरायल के बीच चल रही जंग हर बीतते पल के साथ तेज होती जा रही है। अब इस जंग में ईरान ने वो कदम उठाया जिसे इजरायल अभी तक उठाने से बच रहा था। दरअसल गुरुवार को ईरान ने एक मिसाइल से सेंट्रल इजराइल पर हमला किया, जिसमें क्लस्टर बम का इस्तेमाल किया गया। इजराइली अधिकारियों के अनुसार, आठ दिनों से चल रहे युद्ध में इस तरह के हथियारों का पहली बार उपयोग किया गया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक, इस ईरानी बम को ज्यादा से ज्यादा आम नागरिकों को निशाना बनाने के इरादे से दागा गया है।

कहां गिराया क्लस्टर बम?

वाशिंगटन स्थित इजराइली दूतावास ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा, "आज, ईरानी सेना ने इजराइल के घनी आबादी वाले इलाके में क्लस्टर सबम्यूनिशन से युक्त मिसाइल दागी।" यह हमला शुक्रवार को ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल हमलों के बीच हुआ। इजराइली मीडिया के मुताबिक, मिसाइल का वॉरहेड लगभग 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर फटा, जिससे बीच इजराइल में 8 किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 छोटे बम गिरे। फिलहाल, इसे ईरानी अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

Israel-Iran War

क्या होता है क्लस्टर बम?

क्लस्टर बमों को दुनिया के खतरनाक हथियारों में से एक माना जाता है। क्योंकि युद्ध भले ही खत्म हो जाए इनके फटने का खतरा 50 साल बाद भी रहता है। क्लस्टर बम में एक खोखला खोल होता है जिसे हवा से गिराया जाता है या जमीन से दुश्मन की जमीन पर दागा जाता है। ये बम हवा में ही फट जाता है और छोटे बम छोड़ता है, जिनकी संख्या सैकड़ों में हो सकती है। जो 1 किलोमीटर से भी ज्यादा बड़े इलाके में तबाही मचा सकते हैं। क्लस्टर बम छोटे बमों को बड़े इलाकों में अलग-अलग जगहों पर गिरा देते हैं, जिनमें से कुछ फटते भी नहीं हैं और ये वही छोटे बम होते हैं जिनके फटने का खतरा 50 साल भी बना रहता है। लिहाजा युद्ध खत्म होने के बाद भी नागरिकों की जान पर खतरा बना रहता है। उन्हें ढूंढ़ना और हटाना भी एक महंगी प्रक्रिया है, बावजूद इसके सारे बम नहीं हटाए जा पाते।

वर्ल्ड वॉर-2 में पहली बार दागा गया था क्लस्टर बम

पहली बार इस बम का इस्तेमाल दूसरे विश्व युद्ध में किया था। तब से लेकर अब तक इन पर बैन लगाने की मांग रही है। साल 2008 में इस पर रोक लगाने के लिए बैठक भी हुई जिसमें 123 देशों ने इस पर हस्ताक्षर भी किए। लेकिन अमेरिका और यूक्रेन समेत दूसरे कुछ देशों ने इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया। किस्मत का खेल देखिए जब यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू हुआ तब रूस ने यूक्रेन के डेब्रोपिलिया पर इसी बम से हमला किया था। जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 40 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

इजरायल में बढ़ा मौत का आंकड़ा

इजराइली अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि चार दिन पहले एक ईरानी मिसाइल से क्षतिग्रस्त हुई इमारत से एक महिला का शव बरामद किया गया है, जिससे एएफपी के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइल में मरने वालों की संख्या 24 से बढ़कर 25 हो गई है। वहीं, ईरान ने रविवार तक इजराइली हमलों में कम से कम 639 लोगों के मरने की सूचना दी है। मृतकों में शीर्ष सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक से लेकर आम नागरिक तक शामिल हैं। हालांकि, तेहरान ने तब से कोई अपडेटेड आंकड़ा नहीं दिया है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।

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