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Israel Independence Day: कहानी उस शख्स की जिसने 2 हजार साल बाद बनाया इकलौता यहूदी देश 'इज़राइल'

Israel Independence Day: 14 मई 1948 को इतिहास ने एक नया मोड़ लिया जब इज़राइल ने ब्रिटिश शासन से आजादी की घोषणा की। यह घटना पश्चिम एशिया (West Asia) की राजनीति और भूगोल को बदल देने वाला क्षण था। यहूदी एजेंसी के चेयरमैन डेविड बेन-गुरियन (David Ben-Gurion) ने स्वतंत्र इज़राइल राष्ट्र (Israel) की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। इस रिपोर्ट में जानते कैसे डेविड बेन-गुरियन ने सालों के संघर्ष के बाद यहूदियों को अपना खुद का देश दिलाया?

Israel Independence Day

यह घोषणा इतनी खास क्यों थी?

ये पहली बार था जब करीब 2000 साल बाद यहूदियों को अपना खुद का देश मिला। इस ऐलान में कहा गया कि यहूदियों का इस ज़मीन से पुराना और गहरा रिश्ता है।साथ ही, होलोकॉस्ट जैसी भयानक त्रासदी के बाद एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक देश की जरूरत और सपना दोनों ही जताया गया। सबसे अहम बात हर इंसान को बराबरी का हक़ देने का वादा किया गया।

कौन थे डेविड बेन-गुरियन?

डेविड बेन-गुरियन को इजराइल का जनक (Israel Founding Father) कहा जाता है। उन्होंने ही 14 मई 1948 को इज़राइल की आज़ादी का ऐलान किया था और वो देश के पहले प्रधानमंत्री भी बने। बेन-गुरियन का जन्म 16 अक्टूबर 1886 को पोलैंड के एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनका असली नाम डेविड ग्रून था। 1906 में वो फिलिस्तीन (उस वक्त उस्मानी साम्राज्य के अधीन) चले आए और 1909 में उन्होंने अपना नाम बदलकर बेन-गुरियन रख लिया।

यहूदी राष्ट्र के लिए संघर्ष

1935 से वो यहूदी एजेंसी के प्रमुख बने और यहीं से उन्होंने यहूदी राष्ट्र की स्थापना के लिए पूरी ताकत लगा दी। 1946 में वो विश्व ज़ायोनी संगठन के प्रमुख भी बने।

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इजराइल की स्थापना और नेतृत्व

14 मई 1948 को उन्होंने इजराइल को आजाद राष्ट्र घोषित किया और आजादी की घोषणा पर सबसे पहले दस्तखत भी किए। उन्होंने अलग-अलग यहूदी मिलिशियाओं को मिलाकर इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) बनाई। उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए देश की नींव रखी, संस्थाएं बनाई और लाखों यहूदी प्रवासियों को बसाने में मदद की।

प्रधानमंत्री पद छोड़ा और राजनीति से संन्यास लिया

1963 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद छोड़ा और 1970 में पूरी तरह राजनीति से संन्यास ले लिया। इसके बाद वो नेगेव रेगिस्तान के सदे बोकर नाम के किबुज में एक साधारण झोपड़ी में रहने लगे और वहीं 1973 में उनका निधन हो गया। उन्हें 20वीं सदी के 100 सबसे अहम लोगों में गिना गया (Time Magazine के अनुसार)। आज भी इज़राइल में उन्हें बहुत सम्मान और श्रद्धा से याद किया जाता है।

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