Iran US tension impact: ईरान जंग से अमेरिका में हाहाकार! पेट्रोल-डीजल से लेकर जेट ईंधन तक हुआ महंगा
Iran US tension impact: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता ने जेट ईंधन (हवाई जहाज के तेल) की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। इसका सीधा असर अमेरिकी एयरलाइनों पर पड़ रहा है, जिन्हें न केवल टिकटों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं, बल्कि कई उड़ानें भी रद्द करनी पड़ रही हैं।
इस मुद्दे ने अमेरिकी सीनेट में एक बड़ी बहस को जन्म दिया है, जहां ऊर्जा नीति और वैकल्पिक ईंधन (SAF) पर सरकारी समर्थन कम करने को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। यह स्थिति यात्रियों और विमानन उद्योग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

आसमान छूती ईंधन की कीमतें
पिछले कुछ समय में जेट ईंधन की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 200 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। हालांकि कीमतों में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अभी भी ये एयरलाइनों के बजट से बाहर हैं। अलास्का एयरलाइंस जैसी बड़ी कंपनियों को इस तिमाही में करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। खर्च कम करने के लिए एयरलाइंस अपने वसंत (स्प्रिंग) के शेड्यूल में कटौती कर रही हैं, जिसका सीधा असर आम यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर पड़ रहा है।
सीनेट में सरकार की घेराबंदी
सीनेटर मारिया कैंटवेल ने इस संकट के लिए सरकार की ऊर्जा नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से तीखे सवाल किए कि आखिर क्यों टिकाऊ विमान ईंधन (SAF) के लिए दी जाने वाली टैक्स छूट और मदद को कम किया जा रहा है। कैंटवेल का तर्क है कि यदि सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा नहीं देगी, तो अमेरिकी विमानन क्षेत्र हमेशा मध्य-पूर्व के तेल और वहां की राजनीतिक अस्थिरता पर निर्भर रहेगा, जो देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
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ऊर्जा मंत्री का बचाव और तर्क
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्वीकार किया कि ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें चिंता का विषय हैं, लेकिन उन्होंने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि वर्तमान कीमतें चार साल पहले की तुलना में अभी भी कम हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टिकाऊ या वैकल्पिक ईंधन अभी काफी महंगे हैं और उनके उत्पादन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी सीमित है। राइट के अनुसार, वैकल्पिक ईंधन की ऊंची लागत और सप्लाई नेटवर्क की कमी भी इस महंगाई का एक बड़ा कारण है।
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आम जनता और अर्थव्यवस्था पर बोझ
ईंधन की इस महंगाई का असर सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है; डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने से पूरी परिवहन व्यवस्था महंगी हो गई है। एयरलाइंस अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई अब यात्रियों से महंगे टिकट और अतिरिक्त शुल्कों के जरिए कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने नई ऊर्जा तकनीकों को प्रोत्साहन नहीं दिया, तो भविष्य में यात्रा और माल ढुलाई का खर्च और भी बढ़ सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।












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