हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की 'मौत' से दहला ईरान, सुप्रीम लीडर ने की इमरजेंसी बैठक, क्या करेगा शिया देश?
Iran's Khameinei holds emergency: इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने जिस पैमाने पर हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर पर हमला किया है, वैसे हमले में किसी का भी बचना नामुमकिन की तरह है और संभावना है, कि हसन नसरल्लाह मारा गया है।
लिहाजा, लेबनान में इजराइली सेना के हमलों ने ईरान के भीतर काफी ज्यादा चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत वाली रिपोर्ट ने ईरान को बहुत बड़ा झटका दिया है। द न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है, कि इजराइली खुफिया एजेंसियों ने शुरू में माना था, कि इन हमलों में नसरल्लाह मारा गया है, लेकिन अभी भी इजराइली फोर्स जानकारियां जुटा रही हैं और आखिरी नतीजे तक नहीं पहुंची है।

हमलों की वजह से 6 व्यक्तियों की मौत हो गई है, जिनमें हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, और कमांड सेंटर के अगल बगल वाले कई बिल्डिंग्स तबाह हो चुके हैं। लेकिन, नसरल्लाह को लेकर अभी भी अटकलें जारी हैं।
नसरल्लाह को लेकर ईरान में सुप्रीम बैठक
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजराइली हमले के जवाब में सर्वोच्च राष्ट्रीय परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक का तत्काल आयोजन किया है। ये बैठक कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि हमास चीफ इस्माइल हानिया की तेहरान में इजराइली हमले में हुई हत्या के बाद भी नहीं बुलाई गई थी। इस परिषद का काम राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करना और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय नीति दोनों का मार्गदर्शन करना है।
इस सभा के दौरान, ईरानी अधिकारियों ने नसरल्लाह के बारे में हिज़्बुल्लाह से कम्युनिकेशन की कमी पर अपनी चिंताएं जताई हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि वे उनके नेतृत्व और वर्तमान संकट को किस गंभीरता से देखते हैं।
इन हमलों के मद्देनजर ईरान का रुख पूरी तरह निंदा करने वाला रहा है, साथ ही उसने लेबनान और उसके लोगों के साथ एकजुटता से खड़े होने की शपथ भी ली है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्रालय ने इजराइली कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है और इसे 'युद्ध अपराध' करार दिया है। ईरान में बेचैनी और चिंता की भावना साफ देखी जा सकती है। ईरानी अधिकारी लगातार नसरल्लाह की हालचाल जानने की कोशिश कर रहे हैं, लेकन उनका हावभाव और उनके चेहरे की बेचैनी बताता है, कि नसरल्लाह का मारा जाना ईरान के लिए कितना बड़ा झटका हो सकता है।
इस संकट के महत्व को देखते हुए, ईरान ने इस्लामिक सहयोग संगठन के आपातकालीन सत्र का आह्वान किया है। इस कदम का मकसद, लेबनान की स्थिति के लिए मुस्लिम देशों के बीच समर्थन जुटाना और संभवतः प्रतिक्रिया का कॉर्डिनेशन करना है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की तीखी आलोचना की और उन पर लेबनान में हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
ईरान में हिज्बुल्लाह समर्थकों का प्रदर्शन
वहीं, ईरानी सरकार की प्रतिक्रिया तेहरान की सड़कों पर भी दिखाई द रही और फिलिस्तीन और हिज़्बुल्लाह के समर्थन में प्रदर्शन किए गये हैं। ईरानी राज्य टेलीविजन ने वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों के विरोध के संदेशों के साथ-साथ विरोध की तस्वीरें प्रसारित कीं। इन प्रसारणों का मकसद, ईरानी जनता और व्यापक क्षेत्र को मौजूदा हमले के बावजूद हिज़्बुल्लाह के लचीलेपन के बारे में आश्वस्त करना था।
प्रदर्शन करने वालों में सुप्रीम नेशनल काउंसिल के एक प्रमुख सदस्य सईद जलीली भी शामिल थे, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रतिरोध और अस्तित्व की भावना को दोहराया।
कूटनीतिक गतिविधियों, सार्वजनिक प्रदर्शनों और आधिकारिक बयानों की यह झड़ी लेबनान पर ना सिर्फ इजराइली हमलों के गहरे प्रभाव को रेखांकित करती है, बल्कि मध्य पूर्व में भयंकर संघर्ष छिड़ने की आशंका को और बढ़ाती हैं। नसरल्लाह की सुरक्षा के लिए ईरान की चिंता और इजराइली कार्रवाइयों का उसका तीखा विरोध गहरे तनाव को दर्शाता है, जिसके और बढ़ने की संभावना है।












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