US Iran: ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद घुटनों पर ईरान, सबसे घातक यूरेनियम भंडार सौंपने को तैयार, खुलेगा होर्मुज!

Iran US Peace Deal: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच विश्व राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता के तहत अपने सबसे खतरनाक और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के स्टॉक को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस बात की पुष्टि की है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध को समाप्त करने और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।

Donald Trump

आइए जानते हैं इस पूरी ऐतिहासिक डील के मुख्य बिंदु, पर्दे के पीछे की रणनीति और आने वाले दिनों में इसके क्या प्रभाव होने वाले हैं...

यूरेनियम सौंपने पर बनी सैद्धांतिक सहमति

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि वह अपने पास मौजूद करीब-पीस-ग्रेड (Weapons-Grade) के करीब पहुंच चुके यूरेनियम के भंडार को छोड़ देगा। हालांकि, यह समझौता अभी शुरुआती और व्यापक स्तर पर है।

यूरेनियम को ईरान से बाहर कैसे भेजा जाएगा, इसे कैसे पतला (Dilute) किया जाएगा या बेअसर किया जाएगा, इसके सटीक नियमों और प्रक्रियाओं (Mechanisms) पर आने वाले 30 से 60 दिनों के भीतर होने वाली परमाणु वार्ताओं में विस्तार से चर्चा की जाएगी। अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी कि अगर उसने शुरुआती समझौते में यूरेनियम पर प्रतिबद्धता नहीं जताई, तो बातचीत रद्द कर दी जाएगी और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

क्या है ईरान के यूरेनियम स्टॉक का गणित?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास फिलहाल 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित लगभग 400 किलोग्राम (970 पाउंड) यूरेनियम का भंडार है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के बेहद करीब माना जाता है।

इजरायल और अमेरिका लगातार यह दावा करते रहे हैं कि अगर ईरान ने इसे थोड़ा और रिफाइन कर लिया, तो वह बहुत ही कम समय में कई परमाणु बम तैयार कर सकता है। यही वजह है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और मुख्य वार्ताकारों ने इस स्टॉक को नष्ट करने या देश से बाहर भेजने को प्राथमिक शर्त बनाया था।

पिछले फैसलों से ईरान का बड़ा यू-टर्न

ईरान का यह कदम उसकी रणनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अभी कुछ दिनों पहले तक ईरानी सूत्रों का दावा था कि एक सख्त निर्देश जारी किया था कि देश का यूरेनियम भंडार किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा। लेकिन अमेरिकी दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते तेहरान को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इस स्टॉक को ठिकाने लगाने के लिए साल 2015 के ओबामा काल के परमाणु समझौते जैसा फॉर्मूला अपनाया जा सकता है, जिसके तहत ईरान अपना यूरेनियम रूस को ट्रांसफर कर सकता है, या फिर इसकी शुद्धता को घटाकर इसे हथियारों के लिए बेकार किया जा सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बनी सहमति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस संभावित समझौते (Memorandum of Understanding - MoU) में कुल 14 मुख्य धाराएं (Clauses) शामिल हैं। इस समझौते का सबसे बड़ा तात्कालिक फायदा यह होगा कि ईरान और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी जंग पूरी तरह थम जाएगी। इसके अलावा, दुनिया के कुल तेल सप्लाई का पांचवां हिस्सा जहां से गुजरता है, उस होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।

अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को हटाएगा, जिससे बिना किसी टोल या टैक्स के अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकेगी। हालांकि, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी का कहना है कि जलडमरूमध्य का प्रबंधन अभी भी ईरान के हाथ में ही रहेगा।

अमेरिकी सैन्य विकल्प और 'बंकर-बस्टर' का खौफ

पर्दे के पीछे की कहानी यह भी है कि यदि ईरान इस समझौते के लिए राजी नहीं होता, तो अमेरिका ने बेहद आक्रामक सैन्य रणनीति तैयार कर रखी थी। अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने हाल ही में ईरान के 'इस्फहान परमाणु संयंत्र' (Isfahan Nuclear Facility) में जमीन के नीचे छिपे यूरेनियम भंडारों को निशाना बनाने के विकल्प तैयार किए थे।

इन विकल्पों में जमीन को भेदने वाले भारी 'बंकर-बस्टिंग' बमों का इस्तेमाल शामिल था। एक समय पर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस स्टॉक को जब्त करने के लिए अमेरिका-इजरायल के कमांडो ऑपरेशन की योजना पर भी विचार किया था, लेकिन हाई-रिस्क होने के कारण उसे मंजूरी नहीं दी गई। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा था, 'या तो हम एक अच्छी डील पर दस्तखत करेंगे, या फिर हम उन्हें तबाह कर देंगे।'

अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्ति होगी रिलीज

इस डील के बदले में ईरान को एक बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। समझौते के तहत विदेशों में फ्रीज (जब्त) पड़े लगभग 25 अरब डॉलर के ईरानी फंड को धीरे-धीरे रिलीज किया जाएगा।

अधिकारियों ने साफ किया है कि पुनर्निर्माण सहायता से जुड़ी इस भारी रकम का एक बड़ा हिस्सा तभी जारी होगा जब ईरान परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अंतिम समझौते पर पूरी तरह मुहर लगा देगा। यह तेहरान के लिए एक बड़े वित्तीय प्रोत्साहन की तरह काम करेगा ताकि वह आगे की बातचीत से पीछे न हटे।

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पाकिस्तान की मध्यस्थता और आगे का रास्ता

इस ऐतिहासिक कूटनीति के पीछे पाकिस्तान और खाड़ी देशों की बड़ी भूमिका सामने आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लंबी बातचीत के बाद इस प्रगति की घोषणा की है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उम्मीद जताई है कि ईरान और अमेरिका के बीच अगले दौर की अंतिम वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान कर सकता है। फिलहाल दोनों देश '50-50' की स्थिति में हैं, जहां अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी या युद्ध का एक नया दौर शुरू होगा।

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