खामेनेई का तख्तापलट तय! ईरान में हिंसक हुआ प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोगों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद' के लगाए नारे
Iran Protests: ईरान में नए साल की शुरुआत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों हिंसक हो गया। देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बेतहाशा महंगाई और गहरे मुद्रा संकट के बीच ईरान में सत्ता बदलने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा। कुछ प्रदर्शनकारियाें और सुरक्षा बलों के एक सदस्य की भी मौत हुई है।अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसे पिछले तीन सालों में ईरान का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बताया है।
तेहरान की सड़कों पर उतरे लाखों प्रदर्शनकारियों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद' और 'डेथ टू डिक्टेटर' जैसे नारे लगाए। यह आंदोलन अब ईरान के 21 प्रांतों तक फैल चुका है, शहरों के साथ गांवों में भी लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जिससे मौजूदा सरकार पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है।
शहरों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलाबारी
कई शहरों में सरकार विरोधी रैलियां निकाली गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की। नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग डटे रहे।

ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगहों पर सीधी झड़पें हुईं। तेहरान में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने 1979 की इस्लामिक क्रांति में अपदस्थ किए गए शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए।
दो की मौत और 13 लोग हुए घायल
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार लोरदेगन में इन झड़पों में दो की मौत हो गई है लोगों की मौत हो गई। वहीं, कुहदश्त में बसीज स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल के एक सदस्य की मौत और 13 अन्य के घायल होने की पुष्टि हुई है।
कई महिला छात्रों को गिरफ्तार किया गया
दिसंबर 2025 में हुई कार्रवाई के तहत, 31 दिसंबर को तेहरान के वोलंजक स्थित शहीद बेहेश्ती विश्वविद्यालय के छात्रावासों पर छापा पड़ा। यहां विरोध प्रदर्शनों में शामिल कई महिला छात्रों को गिरफ्तार किया गया। सूत्रों के अनुसार, तेहरान विश्वविद्यालय की छात्र नेता सरीरा करीमी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
इस्फ़हान, हमादान, बागमलेक, पियान, बाबोल और देहलोरन सहित विभिन्न शहरों के लोग सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे निर्वासित राजकुमार रज़ा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं और पिछले विद्रोहों में मारे गए प्रदर्शनकारियों को भी याद कर रहे हैं।
क्यों सड़कों पर उतरे ईरान के नागरिक?
ईरानी सत्ता के खिलाफ इस व्यापक आक्रोश का मुख्य कारण देश में गहराता आर्थिक संकट है। ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गई है। साथ ही, महंगाई दर 42 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जिससे आम जनता बुरी तरह त्रस्त और परेशान है।
'डरो मत, हम सब साथ हैं!' का नारा भीड़ में लगातार गूंज रहा
'डरो मत, हम सब साथ हैं!' का नारा भीड़ में लगातार गूंज रहा है। इस्फ़हान में नागरिकों को एकजुट करने के आह्वान के साथ 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे भी लगे। देहलोरन और बागमलेक में राजशाही व ईरान के पूर्व शासक रजा शाह पहलवी के समर्थन में आवाज उठी, जो मौजूदा शासन के खिलाफत है।
प्रभावशाली हस्तियों का भी मिला समर्थन
इस आंदोलन को अब कुछ प्रभावशाली हस्तियों का भी समर्थन मिल रहा है। सुन्नी मौलाना मोलावी अब्दोलहामिद ने गिरते जीवन स्तर और राजनीतिक गतिरोध को इन विद्रोहों का मूल कारण बताया। वहीं, मशहूर फिल्ममेकर जाफर पनाही ने इसे 'इतिहास को आगे बढ़ाने वाला' करार दिया।
पनाही ने टिप्पणी की, "लोगों का साझा दर्द अब सड़कों पर चीख बन कर उभर रहा है।" वैश्विक स्तर पर, पश्चिमी देशों के नेता भी इन प्रदर्शनों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन स्पष्ट कर रहे हैं। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने 'संघर्ष जारी रखने' का आह्वान किया है।












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