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Operation Sindhu: ईरान-इजरायल युद्ध में कितने भारतीय छात्र फंसे? ऑपरेशन सिंधु ने कैसे दी मौत को मात?

Iran Israel War 2025 Operation Sindhu: ईरान-इजरायल युद्ध 2025 दिनोंदिन भयावह होता जा रहा है। दोनों देशों के आकाश में मिसाइलों और ड्रोन हमलों की गूंज है, जबकि ज़मीन खून और मलबे में तब्दील हो चुकी है। सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं और कई लोग घायल हैं। इस भयावह हालात के बीच भारत के नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

भारत सरकार ने युद्ध शुरू होते ही 'ऑपरेशन सिंधु' लॉन्च किया, जिसके तहत अब तक 400 भारतीय छात्रों को युद्धग्रस्त इलाकों से सुरक्षित निकालकर स्वदेश लाया जा चुका है। इनमें से अधिकतर छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं, जो ईरान में मेडिकल या मजहबी शिक्षा प्राप्त कर रहे थे।

Operation Sindhu Iran Israel War 2025

शुक्रवार रात एक विशेष विमान के जरिए 290 छात्र नई दिल्ली पहुंचे। इससे पहले बुधवार को 110 छात्रों को स्वदेश लाया गया था। शनिवार को दो और उड़ानों के जरिए 710 छात्रों की वापसी प्रस्तावित है। इसके बाद कुल 1,110 भारतीय छात्रों की सुरक्षित घर वापसी हो जाएगी।

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कैसे किया जा रहा रेस्क्यू?

चूंकि युद्ध के चलते ईरान का हवाई मार्ग बंद है, इसलिए छात्रों को तेहरान से सड़क मार्ग द्वारा अर्मेनिया ले जाया जा रहा है। वहां से विशेष चार्टर्ड फ्लाइट्स के ज़रिए भारत भेजा जा रहा है। अर्मेनिया सरकार और भारतीय दूतावास इस मानवीय अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरान ने भारतीय छात्रों के लिए विशेष मानवीय रुख दिखाते हुए अपने एयरस्पेस का उपयोग करने की अनुमति दी है, जिससे राहत कार्य को गति मिली है।

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ईरान में कितने भारतीय छात्र?

भारत सरकार के अनुसार करीब 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में रहते हैं, जिनमें 1,500 छात्र शामिल हैं। ये छात्र अधिकतर शाहिद बेहेश्ती, तेहरान, हमादान, गोलेस्तान और केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे संस्थानों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं।

क्यों जाते हैं भारतीय छात्र ईरान?

भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए NEET अनिवार्य है। हर साल लगभग 20 लाख छात्र परीक्षा देते हैं, जबकि सीटें केवल एक लाख के आसपास होती हैं। NEET में कम रैंक आने या सीट न मिलने पर छात्र ईरान या यूक्रेन जैसे देशों का रुख करते हैं।

भारत में निजी कॉलेजों से एमबीबीएस की डिग्री लेने में 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक खर्च आता है, जबकि ईरान में यही डिग्री 15 से 25 लाख रुपये में मिल जाती है। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया भी सरल है, जो भारतीय छात्रों को आकर्षित करती है।

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