Iran Execution: ईरान ने अरब स्ट्रगल मूवमेंट के नेता को फांसी पर लटकाया, पश्चिम को चिढ़ाने के लिए ले ली जान?
अरब स्ट्रगल मूवमेंट का मकसद ईरान से अहवाज़ क्षेत्र की आजादी है और इसके लिए लंबे अर्से से ये ग्रुप ईरान सरकार से टक्कर ले रहा है।

Iran executed an Iranian-Swedish: ईरान ने एक ईरानी-स्वीडिश नागरिक को फांसी पर चढ़ा दिया है, जिसके पास दोहरी नागरिक थी। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी-स्वीडिश नागरिक को शनिवार को फांसी पर चढ़ा दिया गया है, जिसके बाद ईरान सरकार की काफी आलोचना की जा रही है।
ईरान का कहना है, कि हबीब असौद, जिसे फांसी पर चढ़ाया गया है, वो ईरान में साल 2018 में हुए सैन्य परेड पर हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें कम से कम 25 लोग मारे गये थे। आपको बता दें, कि पश्चिमी देशों से तनाव के बीच ईरान ने हाल के सालों में तेहरान के कई 'दुश्मनों' को फांसी पर चढ़ाया है।
फ़राजुल्लाह चाआब, जिसे हबीब असौद के नाम से भी जाना जाता था, वो अहवाज़ की मुक्ति के लिए अरब संघर्ष आंदोलन के नेता थे। ये एक अरब अलगाववादी आंदोलन है, जिसने ईरान के तेल-समृद्ध खुज़ेस्तान प्रांत में तेल पाइपलाइन पर बमबारी समेत कई अन्य हमले किए हैं। 2018 में ईरानी सैन्य परेड पर हुए हमले के बाद इस इस ग्रुप ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।
हबीब असौद को ईरान ने दी फांसी
ईरान ने ईरानी-स्वीडिश नागरिक को इस वक्त फांसी दी है, जब पिछले साल स्वीडन की एक अदालत ने ईरान के रहने वाले एक शख्स को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। ईरानी नागरिक पर साल 1988 में ईरान-इराक युद्ध खत्म होने के बाद ईरान में नरसंहार का आरोप था।
ईरानी नागरिक को स्वीडिश कोर्ट से सजा मिलने के बाद ईरान ने गहरी नाराजगी जताई थी।
तेहरान, जिसने पश्चिम के साथ बातचीत में कैदियों को सौदेबाजी को एक कार्ड के तौर पर इस्तेमाल किया है, उसने उस वाक्य पर गुस्से से प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ईरान ने स्वीडिश कोर्ट के फैसले को लेकर पश्चिमी देशों के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की थी।
वहीं, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच देश के परमाणु कार्यक्रा को लेकर काफी तनाव बना हुआ है, क्योंकि यूएन की रिपोर्ट में भी कह दिया गया है, कि परमाणु बम बनाने से ईरान अब कुछ ही कदम दूर है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जिस स्वीडिश-ईरानी शख्स को तेहरान ने फांसी पर चढ़ाया है, ईरान को लगता है कि उसके पश्चिमी देशों से काफी घनिष्ठ संबंध हैं, लिहाजा पश्चिम को जवाब देने के लिए उसे फांसी दे दी गई।
ईरानी कोर्ट की समाचार एजेंसी मिजान ने एक लंबे बयान में हबीब असौद को फांसी दिए जाने की पुष्टि की है। ईरानी समाचार एजेंसी ने हबीब असौद को आतंकवादी ग्रुप का नेता कहा है। हालांकि, ईरान की तरफ से हबीब असौद के बम धमाके में शामिल होने को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया गया, लेकिन ईरान ने दावा किया, कि हबीब असौद के अमेरिका, स्वीडन और इजरायल की खुफिया एजेंसियों से संबंध थे।
ईरान ने हबीब असौद के ग्रुप पर ईरानी सरकारी कार्यालयों और अन्य साइटों पर कई हमले करने के आरोप लगाए और दावा किया, कि इसमें 450 लोग या तो मारे गये या गंभीर घायल हुए। ईरान एजेंसी ने हबीब असौद का एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें ईरानी अधिकारियों से उसकी पूछताछ हो रही है, जिसमें उसे अपराध स्वीकार करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता संदिग्ध है।
तुर्की से अपहरण कर लाया था ईरान
कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि हबीब असौद का तुर्की में ईरानी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने अपहरण किया था और फिर उसे ईरान लाया गया था। बाद में ईरान ने भी कहा, कि उसके 'अज्ञात अधिकारियों' ने नबंवर 2019 में हबीब असौद को तुर्की में पकड़ा था।
ईरान ने साल 2020 में निर्वासित ईरानी पत्रकार रुहोल्लाह को भी फांसी पर चढ़ा दी थी और उन्हें भी फांसी देने से पहले हबीब असौद वाला एजेंडा ही इस्तेमाल किया गया था।
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वहीं, स्वीडिश विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम ने हबीब असौद की फांसी की निंदा की है। उन्होंने एक बयान में कहा, कि "मौत की सजा एक अमानवीय और अपरिवर्तनीय सजा है, और स्वीडन, बाकी (यूरोपीय संघ) के साथ, सभी परिस्थितियों में फांसी की सजा की निंदा करता है।"
वहीं, ओस्लो स्थित समूह ईरान ह्यूमन राइट्स ने भी हबीब असौद को बंद दरवाजे के पीछे कानूनी कार्रवाई और फिर फांसी को "घोर अनुचित" बताया और ईरान सरकार की निंदा की है।












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