रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारतीय NSA डोभाल से की सीक्रेट बैठक, भारत-रूस में क्या खिचड़ी पक रही है?
NSA अजीत डोभाल, मॉस्को में आयोजित अफगानिस्तान को लेकर स्पेशल बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे, जिसमें रूस के अलावा चीन ने भी हिस्सा लिया था। इस बैठक से पाकिस्तान को दूर रखा गया था।

Doval Meets Putin: जियो-पॉलिटिक्स पिछले कुछ सालों में जितनी तेजी से बदल रही है, वो पहले इतनी तेजी से करवटें नहीं लेती थीं। पहले कहावत थी, कि जियो पॉलिटिक्स में नेताओं की मुलाकात का असर कुछ सालों के बाद दिखना शुरू होता था, लेकिन अब मुलाकातों का असर घंटों के अंदर में दिखना शुरू हो जाता है और भारत-रूस-अमेरिका के बीच भी काफी तेजी से घटनाक्रमों में बदलाव हो रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वो है भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर। आखिर पुतिन और डोभाल के बीच की दुर्लभ मुलाकात क्यों हुई है, ये एक रहस्यमयी चर्चा का विषय बन गया है।

पुतिन और डोभाल की मुलाकात
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अजीत डोभाल के साथ एक घंटे तक आमने-सामने की बैठक की और इस बैठक में दोनों के बीच क्या बात हुई, इसके बारे में ना तो रूस की ही तरफ से कुछ बताया गया है और ना ही भारत की तरफ से कोई जानकारी दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा गया है, कि दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने और पर्यावरण को लेकर चर्चा की गई है। लेकिन, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पुतिन और डोभाल के बीच हुई बैठक में इन सबके अलावा कई और मुद्दों पर बात हुई होगी। लेकिन, मॉस्को और नई दिल्ली, दोनों इस बैठक को लेकर चुप हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दूतावास ने गुरुवार को एक ट्वीट में कहा, कि डोभाल ने पुतिन से मुलाकात की, लेकिन विस्तार से नहीं बताया, कि ये मुलाकात क्यों की गई है?

डोभाल को स्पेशल बैठक के लिए बुलाया गया
ज्यादातर मीडिया रिपोर्ट्स में इस बैठक को लेकर काफी ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिसमें पुतिन भी शामिल हुए थे। एचटी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण और सदियों पुराने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर विस्तार से बात की है। दोनों पक्षों ने हाई-क्लासिफाइड बैठक के दौरान भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त संबंधों को लागू करने पर सहमति व्यक्त की है। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को में स्थित राजनयिकों के मुताबिक, एनएसए अजीत डोभाल ने राष्ट्रपति पुतिन से कुछ ही घंटों के अंदर दो बार मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन ने खास तौर पर अजीत डोभाल को बैठक के लिए बुलाया था और रूसी नेता और डोभाल के बीच की ये बैठक काफी दुर्लभ मानी जा रही है।

अफगानिस्तान पर बात के लिए रूस में बैठक
दरअसल, भारत के नेशनस सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, अफगानिस्तान के मुद्दे पर स्पेशल चर्चा के लिए मॉस्को में थे। इस बैठक में भारत और रूस के अलावा ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया है। जबकि, पाकिस्तान को इस बैठक से दूर रखा गया। लेकिन, इस मुलाकात के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अजीत डोभाल को बंद दरवाजे के अंदर एक सीक्रेट मीटिंग के लिए बुलाया। NSA अजीत डोभाल ने राष्ट्रपति पुतिन के दाहिने हाथ माने जाने वाले रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के साथ द्विपक्षीय आदान-प्रदान भी किया। पुतिन और पेत्रुशेव दोनों एनएसए डोभाल को अतीत से जानते हैं और रूसी एनएसए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अजीत डोभाल के लगातार संपर्क में रहते हैं, लिहाजा पुतिन और अजीत डोभाल के बीच हुई इस सीक्रट बैठक को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं।
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क्या डोभाल ने पहुंचाया पीएम मोदी का संदेश?
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को पीएम मोदी का संदेश पहुंचाया हो सकता है। रूस की राजधानी मॉस्को में अफगानिस्तान पर आयोजित 5वीं क्षेत्रीय वार्ता के आयोजन में भारत ने अहम भूमिका निभाई है, जिसमें आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने को लेकर चर्चा की गई है। चीन की एनएसए ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया, लिहाजा अफगानिस्तान में पाकिस्तान का खेल कैसे खत्म हो रहा है, ये प्वाइंट पाकिस्तानी मीडिया में हाइलाइट किए जा रहे हैं। जबकि, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है, कि वह अफगान समाज के हित में एक समावेशी और प्रतिनिधि व्यवस्था के साथ काबुल का समर्थन करने के साथ साथ, वह सब कुछ करेगा, जो इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रांत और पाकिस्तान स्थिति आतंकवादी समूहों पर लगाम लगाएगा और वास्तविक खुफिया जानकारी साझा करने के लिए भारत सहमत है।

पाकिस्तान को बड़ा झटका
इस दौरान खास तौर पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का जिक्र किया गया है। इस बैठक में यह फैसला लिया गया है, कि 1267 यूएनएससी समिति द्वारा नामित सभी आतंकवादी समूहों और आतंकवादियों को अफगानिस्तान से संचालित करने के लिए अभयारण्य या आश्रय मुहैया कराने से वंचित किया जाना चाहिए। पाकिस्तान के लिए ये बहुत बड़ा झटका है, ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले दिनों चीन ने यूएनएससी में पाकिस्तानी आतंकवादी को ग्लोबस आतंकवादी घोषित करने में अपने वीटो को हटाकर पाकिस्तान को सख्त संदेश भी दिया है। दूसरी तरफ, रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के सालों तक प्रमुख रहने वाले पुतिन और भारत के शानदार जासूसों में से एक माने जाने वाले अजीत डोभाल के बीच क्या बातचीत हुई है, वो अभी भी एक सीक्रेट है।












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