Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Indian Iron Dome: भारत के पास भी है इजरायल जैसा 'आयरन डोम’, एक साल पहले हो चुकी सफल टेस्टिंग, जानें खासियत

Indian Iron Dome: देश में एक हलचल सी पैदा हो गई है, जैसे ही गृह मंत्रायल की तरफ से सोमवार को पूरे देश में मॉक ड्रिल का आदेश आया तो एक बार फिर से 1965 और 1971 के युद्ध की चर्चा ने जोर पकड़ लिया। साथ ही भारत के हथियारों की गिनती और देश रक्षा प्रणाली को लेकर भी आम जनता की उत्सुकता बढ़ गई। क्योंकि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान को भारत की तरफ से कार्रवाई का डर सता रहा है। भारत की तरफ से किसी भी वक्त पाकिस्तान पर एक्शन हो सकता है ऐसी खबरें अतंर्राष्ट्रीय मीडिया में छाई हुई हैं। लिहाजा भारत के डिफेंस सिस्टम को जानने के बारे में दिलचस्पी और बढ़ जाती है। मॉक ड्रिल के बीच सभी के मन में ये भी आशंका है कि अगर पाकिस्तान की तरफ से मिसाइलों द्वारा हमला होता है तो उस स्थिति से निपटने के लिए भारत क्या करने वाला है। लेकिन आपको इसमें घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है।

2024 में रेडी था भारत का आयरन डोम

दरअसल एक साल पहले ही वर्ष 2024 में भारत ने अपना आयरन डोम तैयार कर लिया था जो कि बिल्कुल इजरायल के आयरन डोम की तर्ज पर काम करता है। इसके लिए भारत ने पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में 'आयरन डोम' का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। यह नया एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) के नाम से जाना जाता है, DRDO द्वारा विकसित फोर्थ जनरेशन का शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। जिसे हवाई खतरों को देखते हुए भारत की सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Indian Iron Dome

क्या है भारत का अपना आयरन डोम?

VSHORADS सिस्टम उन्नत तकनीक से लैस है, जिसकी वजह से इसे आसानी से किसी भी स्थान पर ले जाया और तैनात किया जा सकता है। इसका मेन टारगेट कम उड़ान वाले विमानों, ड्रोन्स और हेलीकॉप्टरों को मार गिराना है। इसके अलावा, यह मिसालइल द्वारा हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसे आप आसान भाषा में मल्टीपर्पज डिफेंस सिस्टम कह सकते हैं।

कैसे करता है काम देसी आयरन डोम?

इस आयरन डोम में एक रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम और इंटीग्रेटेड एविओनिक्स सिस्टम से लैस है। इसकी कंट्रोल्ड रिएक्शन तकनीक किसी भी दिशा में मिसाइल को Thrust देने में सक्षम हैं। साथ ही इमेजिंग इंफ्रारेड होमिंग सिस्टम भी लगा है। इस तकनीक से दुश्मन के हवाई हमलों को ट्रैक करने में मदद मिलती है। जिसके बाद यह अटैक पर काम करता है।

क्या-क्या खासियत है इसमें?

इसकी कॉन्फिगुरेशन की बात करें तो VSHORADS मिसाइल का वजन 20.5 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 6.7 फीट और व्यास 3.5 इंच है। यह 2 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है। मिसाइल की रेंज 250 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक है और यह लगभग 1800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है। सतह से हवा में मार करने वाली इस मिसाइल ने परीक्षणों के दौरान अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदकर अपना लोहा मनवाया है।

जंग में कितना जरूरी है एयर डिफेंस सिस्टम?

रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल तथा हमास के बीच तनाव जैसे वैश्विक संघर्षों के कारण हाल के दिनों में ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम की आवश्यकता काफी बढ़ गई है। इन स्थितियों ने उन बातों को सामने लाया है जो मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम को हवाई खतरों से अपने क्षेत्रों की सुरक्षा करती हैं। परीक्षण के दौरान, सेना के अधिकारियों ने ग्राउंड बेस्ट मैन पोर्टेबल लॉन्चर का उपयोग करके मिसाइल के प्रदर्शन का निरीक्षण किया था। जिसमें आज तक, तीन सफल परीक्षण किए जा चुके हैं, जो अपने टारगेट को हिट करने में शत प्रतिशत सफल रहे।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

भारत द्वारा इस स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम का विकास इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह बलों के बीच क्षेत्रीय तनाव के बीच हुआ है। देश ने अपने टी-90 टैंकों की क्षमताओं को भी बढ़ाया है, जिससे उसकी सैन्य शक्ति और मजबूत हुई है। यह प्रगति भारत की रक्षा क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो संभावित हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए एक मजबूत कदम है। VSHORADS सिस्टम न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि सेना की ताकत को भी कई गुना बढ़ा देता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+