जिस भारतीय वैक्सीन पर उठ रही थी ऊंगली, वो 'कोवैक्सीन' निकली बेहद कारगर, 617 वेरिएंट को किया निष्क्रिय

भारत की स्वदेश कोवैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ काफी ज्यादा कारगर साबित हुआ है। अमेरिका के महामारी विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने कहा है कि भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोरोना वायरस के 617 वेरिएंट के खिलाफ कारगर है।

वॉशिंगटन, अप्रैल 28: आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को लेकर रिसर्च में सामने आया है कि भारत द्वारा विकसित स्वदेश वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ काफी ज्यादा कारगर है और अगर भारत तेजी के साथ इस वैक्सीन से लोगों को वैक्सीनेट करने में कारगर रहा है तो भारत कोरोना वायरस के प्रकोप से बाहर निकल सकता है। अमेरिकी रिसर्च में सामने आया है कि भारतीय वैक्सीन कोवैक्सीन कोरोना वायरस संक्रमण रोकने में बेहद कारगर है और इसकी पुष्टि व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइजर और विश्व के बड़े महामारी विशेषज्ञों में से एक डॉ. एंथनी फाउची ने किया है। डॉ. फाउची ने भारतीय वैक्सीन को लेकर कई और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

बेहद कारगर भारतीय वैक्सीन

बेहद कारगर भारतीय वैक्सीन

रिसर्च में पता चला है कि भारत में विकसित स्वदेशी कोवैक्सीन कोरोना वायरस के 617 वेरिएंट्स को निष्क्रिय करने में सफल साबित हुई है। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइजर डॉ. एंथनी फाउची ने मंगलवार को भारतीय वैक्सीन कोवैक्सीन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि 'हम वैक्सीन्स को लेकर लगातार रिसर्च कर रहे हैं और हर दिन आने वाली डेटा पर स्टडी करते हैं और हालिया डेटा से ये पता चला है कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के 617 वेरिएंट्स को निष्क्रिय करने में कामयाब रही है। अभी जो भारत में मुश्किलें देख रहे हैं, उन मुश्किलों को दूर करने में कोवैक्सीन काफी अहम साबित हो सकता है।'

78 प्रतिशत से ज्यादा कारगर

78 प्रतिशत से ज्यादा कारगर

मंगलवार को जारी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन इम्यून सिस्टम को सार्स सीओवी-2 कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना सिखाता है और ये शरीर में काफी प्रभावी तरह से काम करता है। आपको बता दें कि भारत की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरॉलजी और आईसीएमआर के साथ मिलकर भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन को बनाया है, जिसे भारत स्वदेशी वैक्सीन कहा गया है। भारत सरकार ने इस वैक्सीन को 3 जनवरी को इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी थी। बाद में ट्रायल के दौरान पाया गया कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 78 प्रतिशत तक कारगर है।

अमेरिका देगा मदद

अमेरिका देगा मदद

वहीं, व्हाइट हाउस कोविड-10 रिस्पांस टीम के सीनियर एडवाइजर डॉ. एंडी स्लाविट ने कहा है कि 'अमेरिका से सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की स्ट्राइक टीम भारत जा रही है जिसके जरिए अमेरिया ये सुनिश्चित करना चाहेगा कि वैक्सीन बनाने के लिए जरूरी रॉ मैटेरियल्स लोकेट कर सकें। मुझे लगता है कि ये वैक्सीन काफी ज्यादा कारगर साबित होने वाली है'। आपको बता दें कि अमेरिका से भारत आने वाली स्ट्राइक टीम में सीडीसी एपेडेमिक इंटेलिजेंस सर्विस ऑफिसर के अलावा लैब लीड और दूसरे स्वास्थ्य अफसर शामिल होंगे। ये टीम सीधे अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगी। भारत ने प्राथमिकता के आधार पर मेडिकल सामानों की एक लिस्ट अमेरिका को सौंपी है, जिसमें सात सामान शामिल हैं। जिसमें भारत सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 10 और 45 लीटर क्षमता वाले ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन जेनरेटर, ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट, रेमडेसिविर इंजेक्शन, फावीपिरावीर शामिल हैं।

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