रूस-बेलारूस के मेगा मिलिट्री ड्रिल में भारत की एंट्री से हिला वॉशिंगटन! डोनाल्ड ट्रंप की क्यों बढ़ी बेचैनी?

India in Zapad Military exercise: रूस और बेलारूस में हुए Zapad-2025 सैन्य अभ्यास में भारत की मौजूदगी ने वैश्विक राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। 12 से 16 सितंबर तक चले इस मेगा ड्रिल में भारत की 65 सदस्यीय टुकड़ी ने हिस्सा लिया, जबकि रूस ने 1 लाख सैनिकों, 333 एयरक्राफ्ट और 247 नेवल वेसल्स की ताक़त झोंक दी।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद मिलिट्री ड्रेस पहनकर मैदान में उतरे और युद्ध जैसी तैयारियों का जायजा लिया। ऐसे वक्त में जब भारत-अमेरिका रिश्ते टैरिफ विवाद से तनावपूर्ण हैं, रूस के साथ भारत का खड़ा होना वॉशिंगटन और नाटो के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है।

India in Zapad Military exercise

रूस-बेलारूस के 41 साइट्स पर हुआ सैन्य अभ्यास

Zapad-2025 सैन्य अभ्यास रूस और बेलारूस के 41 ट्रेनिंग साइट्स पर आयोजित किया गया। इसमें करीब 100,000 सैनिकों, 333 एयरक्राफ्ट, 247 नेवल वेसल्स और न्यूक्लियर-केपेबल बॉम्बर्स तक को शामिल किया गया। सबमरीन और हैवी आर्टिलरी की तैनाती ने इसे और भी शक्तिशाली बना दिया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद मिलिट्री ड्रेस पहनकर निजनी नोवगोरोद के मुलिनो ट्रेनिंग ग्राउंड का दौरा किया और अभ्यास की स्थिति का जायजा लिया।

भारत की 65 सदस्यीय टुकड़ी ने लिया हिस्सा

भारतीय रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस ड्रिल में भारत के 65 जवान शामिल हुए। भारत का मकसद साफ था, रूस के साथ भरोसा और मिलिट्री कोऑपरेशन और मज़बूत करना। वैसे तो रूस-भारत के रिश्ते डिफेंस के मामले में लंबे समय से गहरे हैं, इसलिए वहां भारतीय टुकड़ी की मौजूदगी कोई हैरानी की बात नहीं। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है, क्योंकि अभी इंडिया और अमेरिका के बीच ट्रेड और स्ट्रैटेजिक मसलों को लेकर टेंशन चल रही है। ऐसे में रूस के साथ भारत का कदम उठाना नई चर्चाओं और सवालों को जन्म दे रहा है।

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अमेरिका क्यों हुआ चिंतित?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका हमेशा से भारत को एशिया में चीन के खिलाफ बैलेंस की तरह देखता आया है। लेकिन जब भारत रूस के साथ खड़ा दिखा तो वॉशिंगटन के लिए यह थोड़ी असहज स्थिति बन गई। खास बात ये भी रही कि इस बार अमेरिका ने पहली बार ऑब्जर्वर के तौर पर इस एक्सरसाइज़ में हिस्सा लिया। 2022 में रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद ये पहला मौका था जब अमेरिकी अधिकारी रूस और बेलारूस के किसी मिलिट्री ड्रिल का हिस्सा बने। ऐसे वक्त में जब इंडिया और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर तनाव है, रूस के साथ भारत का कदम उठाना सीधे-सीधे अमेरिकी दबदबे को चुनौती देता है।

ग्लोबल पॉलिटिक्स पर असर

भारत की भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब भी रूस को अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी का अहम हिस्सा मानता है। वहीं, अमेरिकी उपस्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि वाशिंगटन बेलारूस के साथ रिश्तों में नरमी लाने की कोशिश कर रहा है। पोलैंड द्वारा हाल ही में एक रूसी ड्रोन को गिराने के बाद यूरोप की सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ऐसे में Zapad-2025 अभ्यास सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नई भू-राजनीतिक जंग का संकेत भी है।

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