इंडियन एयरफोर्स में लड़ाकू विमानों की भारी कमी... क्यों 'मदर ऑफ ऑल डिफेंस डील' लालफीता शाही की भेंट चढ़ी?

Indian Defence News: इंडियन डिफेंस फोर्स के लिए डिफेंस एक्वीजिशन प्रपोजल के तहत डिफेंस एक्वीजिशन काउंसिल (डीएसी) ने 2.23 ट्रिलियन रुपये (26.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के सैन्य हार्डवेयर खरीद के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। लेकिन, फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर जैसी बड़ी खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति ( acceptance of necessity-ओएएन) में जो कमी थी, वह 114 मीडियम मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीददारी से हिचकिचाहट है।

यानि, इस एओएन में 114 मीडियम मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) शामिल नहीं है।

डिफेंस एक्वीजिशन काउंसिल (डीएसी) के एओएन में 114 फाइटर जेट की खरीददारी के लिए एओएन का ना होना, थोड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि इंडियन एयरफोर्स फिलहल घटती लड़ाकू स्क्वाड्रनों और पुराने होते बेड़े से जूझ रही है, लिहाजा भारतीय वायुसेना को MRFA की जरूरत है।

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हालांकि, भारतीय वायुसेना द्वारा इसके लिए कड़ी मेहनत करने के बावजूद, जबकि भारत सरकार, "मेड इन इंडिया" पर जोर दे रही है, फिर भी विदेशी निर्माताओं से अनुमानित 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर में 114 फाइटर जेट खरीदने से पीछे नहीं हटी है।

भारत सरकार के "मेक इन इंडिया" के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए, भारतीय वायुसेना ने भारतीय एयरोस्पेस निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 97 अतिरिक्त स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके1 पर सहमति व्यक्त की है, जिसके लिए एओएन रक्षा मंत्री राजनाथ के नेतृत्व में डीएसी ने जारी कर दिया है।

राजनाथ सिंह ने 30 नवंबर को 156 घरेलू निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) 'प्रचंड' खरीदने के लिए भी मंजूरी दे दी है।

भारतीय वायुसेना पहले से ही तेजस एमके1 जेट के दो स्क्वाड्रन का संचालन कर रही है, जिसमें प्रारंभिक और अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस वेरिएंट के 20-20 स्क्वाड्रन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा पर कैबिनेट समिति से मंजूरी के बाद, 83 एलसीए एमके1ए वेरिएंट के लिए 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर फरवरी 2021 में एचएएल को दिया गया था।

LCA Mk1A जेट की पहली खेप 2024 की शुरुआत में इंडियन एयरफोर्स को मिलना है, जिसके बाद उन्हें जरूरत के हिसाब से भारतीय वायुसेना अपने स्क्वाड्रन में शामिल करेगी। वहीं, फिलहाल एचएएल के पास एक साल में 18 तेजस फाइटर जेट बनाने की क्षमता है, और एचएएल इस क्षमता को बढ़ाकर 24 फाइटर जेट के हर साल उत्पादन के लिए तैयार भी हो गया है। लेकिन, फिर भी इंडियन एयरफोर्स को सभी विमानों की आपूर्ति में अभी कई और साल लगेंगे।

इंडियन एयरफोर्स की जरूरत क्या है?

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारतीय वायुसेना के पूर्व उप प्रमुख एयर मार्शल अनिल खोसला ने कहा है, कि " हालांकि स्वदेशी तेजस बनाना अच्छा है, लेकिन संतुलित ताकत बनाए रखने के लिए और जब तक कि घरेलू एडवांस मीडियम फाइटर जेट तेजस का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, और वो इंडियन एयरफोर्स को सौंप नहीं दिए जाते हैं, उस वक्त तक नई पीढ़ी की मल्टीरोल एयरक्राफ्ट की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, कि "MRFA फाइटर जेट खरीदने की ज़रूरत है (शायद रक्षा खर्च की अगली किस्त में)। इन्हें चरणों में खरीदा जाना चाहिए (शायद एक समय में दो से तीन स्क्वाड्रन) इससे कुछ समय में खर्च फैल बंट जाएगा, और हमें बाद में और बेहतर तकनीक और सुविधाएं मिलेंगी।"

अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंडियन एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने भारतीय मीडिया को बताया था, कि एयरफोर्स चरणबद्ध तरीके से MRFA के छह स्क्वाड्रन को शामिल करने की योजना बना रहा है। कार्यक्रम को डीएपी-2020 की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। IAF ने 2018 में सूचना के लिए अनुरोध जारी किया और आठ प्रकार के विमानों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं हैं। मैदान में प्रमुख दावेदारों में डसॉल्ट का राफेल, बोइंग का F-15EX और साब का JAS-39 ग्रिपेन हैं।

उन्होंने आगे कहा, कि "एएसक्यूआर (एयर स्टाफ गुणात्मक आवश्यकताएं) को अंतिम रूप दे दिया गया है, और ओईएम (मूल उपकरण निर्माताओं) के साथ विस्तृत बातचीत की गई है। चयनित श्रेणियों की स्वदेशी सामग्री और 'मेक इन इंडिया' प्रावधानों के लिए ओईएम प्रतिबद्धताएं मांगी जा रही हैं। (इसमें) भारत में निर्मित किए जा रहे एमआरएफए पर स्वदेशी रूप से विकसित ए-ए (हवा से हवा में) और ए-जी (हवा से जमीन पर) हथियारों को शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

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सरकार से इजाजत का इंतजार

दुनिया की प्रमुख फाइटर जेट निर्माताओं से प्रपोजल मिलने के बाद इंडियन एयरफोर्स ने नई एयर स्टाफ गुणात्मक आवश्यकताएं (एएसक्यूआर) निर्धारित की हैं और एओएन के लिए प्रस्ताव भेजने के लिए, भारत सरकार से हरी झंडी का इंतजार कर रही है।

एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी एमआरएफए सौदे पर बहुत कम प्रगति हुई है। इस बीच, इंडियन एयरफोर्स की लड़ाकू स्क्वाड्रन की ताकत 42 की स्वीकृत ताकत के मुकाबले घटकर 31 स्क्वाड्रन तक सिमट गई है। इसके अलावा, इंडियन एयरफोर्स साल 2025 तक सोवियत संघ के जमाने में बने मिद-21 फाइटर जेट को हटाने की दिशा में काम कर रहा है, और 2025 तक इंडियन एयरफोर्स अपने बेड़े से मिग-21 को हटाकर मिग-29 और जगुआर को शामिल करने के लिए काम कर रही है।

लिहाजा, भारतीय वायुसेना स्क्वाड्रन की कमी महसूस करने वाली है और उसे जल्द से जल्द नये एडवांस फाइटर जेट्स की जरूरत है, लेकिन सरकार से अभी तक इजाजत नहीं मिली है।

हालांकि, भारत सरकार तेजस के लिए ऑर्डर दे चुकी है, लेकिन अभी तेजस के निर्माण और उसके भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने में कई सालों का इंतजार है।

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भारतीय वायुसेना को तत्काल जरूरत

भारतीय वायुसेना ने आधुनिक लड़ाकू प्लेटफार्मों की तत्काल आवश्यकता को लेकर सरकार को जानकारी दी है। वहीं, डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि एक बार जब एओएन साउथ ब्लॉक (रक्षा मंत्रालय) से पास होकर आता है, तो उसके बाद विमानों को बनने में कम से कम 6 से 8 सालों का वक्त लगता ही लगता है।

लेकिन, भारत के दुश्मन एयरफोर्स की ताकत बढ़ने का इंतजार नहीं करने वाले हैं।

भारत को चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-एयर फोर्स (पीएलएएएफ) के साथ युद्धक समानता बनाए रखने के लिए बहुत सारे नये फाइटर जेट्स की जरूरत है। हालांकि, IAF को अभी भी मौजूदा भारत सरकार को यह समझाने की ज़रूरत है, कि अगर बड़ी संख्या में विमानों की खरीददारी की जाए, तभी इंडियन एयरफोर्स की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

एयर मार्शल खोसला (सेवानिवृत्त) ने कहा, कि हालांकि भारतीय वायुसेना की क्षमताओं में वृद्धि हुई है, लेकिन इसकी "युद्ध सहनशक्ति क्षमता, और लड़ाकू समर्थन प्लेटफार्मों की ताकत" पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, कि "कुल मिलाकर दुश्मन को रोकने की क्षमता, मौजूदा खतरे की खेप से तालमेल नहीं बिठा पाई है, लिहाजा इस पहलू पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।"

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