Trump Tariff: अब भारत से कितना ज्यादा टैरिफ देगा पाकिस्तान? बांग्लादेश पर भी चला हंटर, चेक करें नई लिस्ट
US-India Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई ऐतिहासिक बातचीत के बाद दक्षिण एशिया का व्यापारिक भूगोल बदल गया है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले जवाबी शुल्क (Reciprocal Tariff) को 25% से घटाकर 18% करने का निर्णय लिया है।
इस कटौती का सबसे बड़ा असर यह है कि अब भारत, अपने निकटतम प्रतिस्पर्धी देशों-पाकिस्तान और बांग्लादेश-की तुलना में अमेरिकी बाजार में अधिक मजबूत स्थिति में आ गया है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश को पछाड़ा
दरअसल, भारत अब उन देशों की कतार से बाहर निकल गया है जो अमेरिका को सबसे ज्यादा शुल्क दे रहे थे। अब भारत का टैरिफ दर पड़ोसी देशों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी हो गया है:
- पाकिस्तान: अमेरिका ने पाकिस्तान पर 19% टैरिफ लगाया है, जो भारत (18%) से 1% अधिक है।
- बांग्लादेश: कपड़ा और अन्य निर्यातों में भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी अब 20% टैरिफ का भुगतान करेगा।
- अन्य प्रतिस्पर्धी: श्रीलंका, ताइवान और वियतनाम जैसे देश भी 20% के दायरे में हैं, जबकि थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया 19% पर टिके हैं।
एशियाई देशों की टैरिफ लिस्ट: कौन, कहां खड़ा है?
| सबसे ज्यादा टैक्स वाले देश | टैक्स (%) | मिड-टैक्स वाले देश | टैक्स (%) | पड़ोसी और कॉम्पिटिशन | टैक्स (%) |
| ब्राजील | 50% | मेक्सिको | 25% | भारत | 18% |
| सीरिया | 41% | कजाकस्तान | 25% | पाकिस्तान | 19% |
| लाओस | 40% | बांग्लादेश | 20% | वियतनाम | 20% |
| म्यांमार | 40% | श्रीलंका | 20% | थाईलैंड | 19% |
| कनाडा | 35% | ताइवान | 20% | मलेशिया | 19% |
50% के संकट से 18% की जीत तक
यह डील केवल एक शुल्क कटौती नहीं, बल्कि एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। पिछले साल, भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50% तक पहुंचने का खतरा पैदा हो गया था। इसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने के दंड स्वरूप लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल था।
अक्टूबर 2025 में शुरू हुई बातचीत और फरवरी की बैठकों के बाद, कई दौर की गतिरोध वाली चर्चाओं का अंत इस 18% के समझौते के साथ हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए एक क्रांतिकारी मोड़ बताया है।
जयशंकर के दौरे और भविष्य की राह
दिलचस्प बात यह है कि मोदी-ट्रंप के बीच यह सहमति उसी दिन बनी, जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर वाशिंगटन डीसी पहुंचे। अधिकारियों का विश्लेषण है कि इस कटौती के बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात न केवल बढ़ेगा, बल्कि उन देशों को भी कड़ी चुनौती देगा जो अब तक टैरिफ के मामले में भारत से बेहतर स्थिति में थे।












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