India support Afghanistan: UN में अफगानिस्तान के समर्थन में खड़ा हुआ भारत, अब पाक आतंकियों का होगा 'द एंड'!
India support Afghanistan UN: संयुक्त राष्ट्र (UN) में अफगानिस्तान को लेकर भारत और अमेरिका के रुख में बड़ा विरोधाभास देखने को मिला है। जहां अमेरिका ने तालिबान शासन पर 'होस्टेज डिप्लोमेसी' और निर्दोष अमेरिकियों को कैद करने का आरोप लगाते हुए उसे 'गलत तरीके से हिरासत में रखने वाला देश' घोषित किया है, वहीं भारत ने मानवीय आधार पर अफगानिस्तान का खुलकर समर्थन किया है।
भारतीय प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने काबुल की प्रगति और क्रिकेट के जरिए आ रही खुशहाली की तारीफ करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अफगान लोगों की विकास यात्रा में उनके साथ खड़ा है।

Harish Parvathaneni UNSC speech: भारत का अटूट मानवीय समर्थन
भारत ने UNSC में साफ किया कि उसका रिश्ता किसी सरकार से नहीं, बल्कि अफगानिस्तान के आम लोगों से है। भारत ने वहां के 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास परियोजनाएं पूरी की हैं। नई दिल्ली का मानना है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मदद जारी रहनी चाहिए ताकि आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए न जूझना पड़े।
क्रिकेट और अफगान युवाओं का जोश
भारतीय प्रतिनिधि ने अफगान क्रिकेट टीम की सफलता को उम्मीद की किरण बताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के प्रति युवाओं का जुनून और हालिया वर्ल्ड कप में टीम का शानदार प्रदर्शन वहां की जनता के जीवन में सकारात्मकता ला रहा है। भारत को इस बात पर गर्व है कि वह अफगानिस्तान की इस खेल यात्रा और उनकी खुशियों का एक अहम हिस्सा रहा है।
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बॉर्डर हिंसा और हवाई हमलों की निंदा
भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का पक्ष लेते हुए वहां होने वाले बाहरी हवाई हमलों और सीमा पार हिंसा की कड़ी आलोचना की। पर्वतनेनी ने कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान लेना अंतरराष्ट्रीय कानून और UN चार्टर का उल्लंघन है। भारत ने उन देशों को भी कटघरे में खड़ा किया जो व्यापारिक रास्तों में रुकावट पैदा कर रहे हैं, जिससे अफगान अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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US vs India on Afghanistan: अमेरिका और पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव
जहां एक तरफ अमेरिका ने तालिबान को 'स्टेट स्पॉन्सर ऑफ रॉग डिटेंशन' घोषित कर दबाव बढ़ाया है, वहीं भारत के रुख ने क्षेत्रीय स्थिरता का संदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह सक्रियता न केवल अफगानिस्तान में शांति के लिए जरूरी है, बल्कि यह परोक्ष रूप से उन आतंकी नेटवर्क और सेनाओं के लिए भी चेतावनी है जो अफगान धरती का गलत इस्तेमाल करना चाहते हैं।
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