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India-Singapore Relation: स्ट्रैटजी, सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर; PM मोदी का सिंगापुर दौरा ऐतिहासिक क्यों होगा?

India-Singapore Relation: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज से सिंगापुर दौरा शुरू हो रहा है, जो भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत हो रहा है। इस यात्रा में व्यापार, विकास और रक्षा सहयोग पर भारत का महत्वपूर्ण फोकस रहने वाला है।

खासकर स्ट्रैटजी, सिक्योरिटी और सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर भारत और सिंगापुर ऐतिहासिक वार्ता की तरफ बढ़ रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बनाता है। भारतीय प्रधानमंत्री की सिंगापुर की इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है, बुनियादी ढांचे के विकास, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय संपर्क पर समझौते होने की उम्मीद है।

India-Singapore Relation

सिंगापुर से भारत को क्या फायदे हो सकते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी का दक्षिण पूर्व एशिया दौरा भी दक्षिण चीन सागर में चीनी आक्रामकता के बढ़ने के समय हो रहा है। सिंगापुर, प्रधानमंत्री के दक्षिण पूर्व एशिया दौरे का एक प्रमुख आकर्षण है। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के अनुसार, हाल ही में शीर्ष भारतीय कैबिनेट मंत्रियों के साथ उनके सिंगापुरी समकक्षों के बीच खत्म हुई उच्च स्तरीय बैठक ने पीएम मोदी की यात्रा की नींव रखी है।

इससे पहले अगस्त में, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने समकक्षों के साथ गोलमेज बैठक के लिए सिंगापुर का दौरा किया था।

सिंगापुर अपनी वित्तीय ताकत और उन्नत तकनीकों का उपयोग करके भारत की विकास कहानी में भाग ले सकता है।

भारत बुनियादी ढांचे के विकास पर रिकॉर्ड मात्रा में खर्च कर रहा है और यही वह जगह है, कि सिंगापुर भारतीय शहरों के निर्माण में शामिल हो सकता है। दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर बनाने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की भी उम्मीद है, जो भारत की घरेलू चिप-निर्माण आधार बनाने की योजनाओं को बढ़ावा दे सकता है।

सिंगापुर एक वैश्विक वित्तीय महाशक्ति है, जो अपनी ऊंची गगनचुंबी इमारतों और कुशल शासन के लिए जाना जाता है।

सिंगापुर को कितना जानते हैं?

यह मलय प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित एक शहरी देश और एक रणनीतिक समुद्री केंद्र है, जो एशिया, यूरोप और उससे आगे के प्रमुख व्यापार मार्गों को जोड़ता है। 50 लाख से थोड़ी ज्यादा आबादी और दिल्ली के आधे से भी कम क्षेत्रफल के साथ, सिंगापुर भले ही छोटा हो, लेकिन इसका प्रभाव काफी ज्यादा है।

सिंगापुर को चार एशियाई बाघों में से एक कहा जाता है, और इसने 1965 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से अभूतपूर्व विकास किया है और यह सभी के लिए एक आर्थिक चमत्कार है। इसका नॉमिनल जीडीपी करीब आधा ट्रिलियन डॉलर है। 2022 में यह 466 बिलियन डॉलर था। लेकिन इसकी प्रति व्यक्ति आय लगभग 84,000 डॉलर से ज्यादा है, जो किसी भी अन्य आसियान देश से ज्यादा है।

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दुनिया का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है सिंगापुर

सिंगापुर सिर्फ एक वित्तीय केंद्र नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख व्यापारिक और रसद केंद्र भी है। मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित सिंगापुर, हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और बड़े प्रशांत महासागर से जोड़ने वाले प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्गों के चौराहे पर है और जैसे-जैसे दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता बढ़ती जा रही है, भारत सिंगापुर जैसे प्रमुख दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को मज़बूत कर रहा है।

भारत और सिंगापुर, दोनों देश ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं। सिंगापुर उन भारतीय भूमियों में से एक है, जो सदियों से इंडोस्फीयर कहलाने वाले क्षेत्र का हिस्सा रही हैं। दरअसल, सिंगापुर का नाम मतलब 'लायन सिटी' होता है, और सिंगापुर शब्द प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत से लिया गया है। तमिल, सिंगापुर की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक है और सिंगापुर में रहने वाले बहुत बड़े भारतीय प्रवासी हैं, जो राष्ट्र निर्माण में शामिल हैं।

भारत-सिंगापुर के रक्षा संबंध कैसे हैं?

भारत और सिंगापुर के बीच के रिश्ते की आधारशिला रक्षा सहयोग है। भारत और सिंगापुर, नियमित रूप से SIMBEX जैसे संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में और भी ज्यादा सोफिस्टिकेटेड हो गए हैं।

सिंगापुर भारतीय वायु सेना को प्रशिक्षण के लिए अपने ठिकानों का उपयोग करने की इजाजत देता है। भारतीय नौसेना के पास अपने चांगी नौसैनिक अड्डे तक पहुंच है, जो भारत को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखने में मदद करता है। दोनों देशों ने 2017 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों नौसेनाओं के जहाजों को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर ईंधन भरने, फिर से सामान भरने और फिर से हथियारबंद करने की अनुमति देता है।

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भारत-सिंगापुर में व्यापारिक संबंध

वहीं, व्यापार के मोर्चे पर, सिंगापुर आसियान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। प्रमुख क्षेत्रों में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। इस बीच, सिंगापुर के निवेशक भारत में भारी निवेश कर रहे हैं और अब ये देश भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है।

सिंगापुर के PayNow और भारत के UPI के बीच हालिया जुड़ाव एक गेम-चेंजर साबित हुआ है, जो तत्काल सीमा पार लेनदेन की सुविधा प्रदान करता है। कल्पना कीजिए कि वास्तविक समय में सीमाओं के पार पैसों का ट्रांसफर होना, मतलब कितनी बड़ी बात है और यही वित्तीय संपर्क का भविष्य है, और भारत, सिंगापुर के साथ मिलकर इस क्षेत्र में अग्रणी है।

सिंगापुर से भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को फायदा

भारत के एविएशन सेक्टर में तेजी से उछाल आने की संभावना है और ऐसी रिपोर्ट है, भारत जल्द ही एक हजार से ज्यादा विमानों का ऑर्डर देने वाला है, और उन विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) जैसे विमानन उद्योगों में सिंगापुर की विशेषज्ञता, भारत को काफी काम आने वाली है।

इसके अलावा, दोनों देश समुद्री संपर्क पर भी मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में वृद्धि हो रही है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने मोदी की यात्रा के बारे में आशा व्यक्त की है, उन्होंने सहयोग के नए क्षेत्रों पर प्रकाश डाला है जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को जन्म दे सकते हैं। सिंगापुर से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की भविष्य की संभावनाएं अपार हैं, खासकर विमानन और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के आगे सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।

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