चीनी सामानों का बहिष्कार अभियान हुआ फ्लॉप, भारत ने 5 सालों में चीन से 29% ज्यादा खरीदे सामान
भारत सरकार की मंत्री ने संसद को बताया है कि, चीन के अनुचित व्यापार से जो घरेलू उद्योग धंधों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिसे रोकने के लिए कदम उठाए गये हैं।
नई दिल्ली, जुलाई 29: भारत में एक तरफ चीनी सामानों के बहिष्कार की बात अकसर उठती रहती है, वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार ने संसद को जानकारी दी है, कि पिछले पांच सालों में भारत ने चीन से 29 प्रतिशत आयात बढ़ा दिया है। भारत सरकार के केन्द्रीय उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया है कि, भारत ने 2017-18 से 2021-22 के बीच चीन से 29 प्रतिशत ज्यादा आयात किया है।

चीन से आयात में 29 प्रतिशत की वृद्धि
पिछले पांच सालों में चीन से भारत का कुल आयात लगभग 29 प्रतिशत बढ़ा है। 2017-18 से 2021-22 के बीच चीन से वार्षिक आयात 89714.23 मिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 115,419.96 मिलियन अमरीकी डॉलर हो गया है, जिसकी जानकारी केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में दिया है। केन्द्रीय राज्य मंत्री पिछले पांच सालों के दौरान चीन के साथ जिंस-वार व्यापार के ब्योरे पर एक सवाल का जवाब दे रही थीं।

भारत ने कौन से सामान ज्यादा खरीदे?
भारत सरकार ने संसद को जो सूचित किया है, उसके मुताबिक, कुल भारतीय आयात का एक बड़ा हिस्सा पशु या वनस्पति वसा, अयस्क, लावा और राख, खनिज ईंधन, अकार्बनिक रसायन, कार्बनिक रसायन, उर्वरक, कमाना या रंगाई के अर्क, विविध रासायनिक उत्पाद, प्लास्टिक और लेख, कागज और पेपरबोर्ड, कपास, कपड़ा कपड़े, जूते, कांच और कांच के बने पदार्थ, लोहा और इस्पात, तांबा; परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण; विद्युत मशीनरी और फर्नीचर शामिल हैं।

क्या भारत कम करेगा चीन से आयात?
लोकसभा में यह पूछे जाने पर, कि क्या सरकार चीन से आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए कोई कदम उठा रही है, खासकर 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में संघर्ष के बाद, तो अनुप्रिया पटेल ने कहा कि, भारत सरकार ने 14 क्षेत्रों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएं शुरू की हैं, जो भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। मुख्य योग्यता/अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना, भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करना और आयात पर निर्भरता कम करना, भारत सरकार का लक्ष्य है।

किन क्षेत्रों में पीएलआई की घोषणा?
भारत सरकार ने संसद में जानकारी दी है, कि जिन क्षेत्रों में पीएलआई की घोषणा की गई है, वे प्रमुख प्रारंभिक दवा बनाने के लिए रॉ मैटेरियल्स और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई), बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, चिकित्सा उपकरणों का निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक/टेक्नोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, फार्मास्युटिकल दवाएं, दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद और खाद्य उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार ने बताया कि, सरकार ने पीएलआई स्कीम के तहत एसी और एलईडी सामान, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक, एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी, टेक्सटाइल उत्पाद, स्पेशलिटी स्टील और ड्रोन और ड्रोन कम्पोनेंट्स बनाने के लिए भी इंसेंटिव देने की स्कीम चलाई है, ताकि इन उत्पादों की निर्माण लागत कम हो और बाजारों में ये उत्पात प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके साथ ही मंत्री ने कहा कि, "आयातित उत्पादों के मानकों / गुणवत्ता के रखरखाव के लिए कई उत्पादों के लिए तकनीकी नियम (टीआर) तैयार किए गए हैं। यह घटिया उत्पादों के आयात की जांच करेगा।"

घरेलू उद्योग को बचाने की कोशिश
इसके साथ ही भारत सरकार की मंत्री ने संसद को बताया है कि, चीन के अनुचित व्यापार से जो घरेलू उद्योग धंधों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, उसके खिलाफ भी भारत सरकार ने कदम उठाए हैं। आपको बता दें कि, साल 2020 के जून में गलवान घाटी संघर्ष में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर तेज आवाजें उठीं थीं और भारत सरकार ने सौ से ज्यादा चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन, उसके बाद भी भारत का व्यापार पिछले पांच साल में चीन से 29 प्रतिशत बढ़ गया है।












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