Tunguska: भूल जाइये S-400! भारत ला रहा है वो हथियार जो चलते-चलते उड़ा देता है फाइटर जेट, रूस से हुआ समझौता
Russia India 445 crore defense deal: भारत ने रूस के साथ 445 करोड़ रुपये का एक बड़ा रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय थलसेना को 'तुंगुस्का' (Tunguska) एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम से लैस किया जाएगा। यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के युद्धक्षेत्रों में ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा तेजी से बढ़ा है। तुंगुस्का कोई साधारण हथियार नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता 'एयर डिफेंस हब' है, जिसे विशेष रूप से युद्ध के मैदान में आगे बढ़ते हुए टैंकों और सैन्य काफिलों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।
रक्षा मंत्रालय का यह कदम भारतीय सेना की मारक क्षमता और बचाव प्रणाली को एक नई मजबूती प्रदान करेगा, जिससे ऊबड़-खाबड़ रास्तों और मुश्किल हालातों में भी हमारे सैनिकों को आसमान से होने वाले हमलों का डर नहीं रहेगा।

Tunguska air defense system India: गन और मिसाइल का बेजोड़ तालमेल
तुंगुस्का की सबसे बड़ी खूबी इसका 'हाइब्रिड' होना है। इसमें दो शक्तिशाली 30mm की ऑटोमैटिक गन और 8 घातक मिसाइलें एक साथ लगी होती हैं। यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को दूर से ही मिसाइल के जरिए भांप लेता है और उन्हें निशाना बनाता है। अगर कोई खतरा बहुत करीब आ जाए, तो इसकी तेज रफ्तार गन गोलियों की बौछार कर उसे हवा में ही ढेर कर देती हैं। यह दोहरी सुरक्षा इसे बेहद खास बनाती है।
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India Russia strategic Partnership: ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल
आधुनिक युद्धों में छोटे ड्रोन और जमीन के करीब उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। तुंगुस्का को इसी तरह के 'लो-फ्लाइंग' खतरों को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके रडार इतने सटीक हैं कि वे छोटे से छोटे ड्रोन को भी पहचान लेते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में इसकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यह आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ एक अभेद्य दीवार की तरह काम करता है, जो भारत के लिए जरूरी था।
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टैंकों के साथ चलने वाला सुरक्षा कवच
आम तौर पर एयर डिफेंस सिस्टम एक जगह स्थिर होते हैं, लेकिन तुंगुस्का एक 'चेन' (Tracked Vehicle) पर सवार होता है। इसका मतलब है कि यह कीचड़, रेत या उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी टैंकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकता है। इसे हमला करने के लिए रुकने की जरूरत नहीं पड़ती; यह चलते-चलते भी दुश्मन पर अचूक निशाना साध सकता है। यह खूबी इसे भारतीय मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री और टैंक रेजिमेंट के लिए सबसे भरोसेमंद साथी बनाती है।
S-400 के साथ 'मल्टी-लेयर' सुरक्षा
भारत के पास पहले से ही S-400 जैसा सिस्टम है जो बहुत लंबी दूरी तक सुरक्षा देता है। लेकिन युद्ध के मैदान में कम दूरी की सुरक्षा के लिए तुंगुस्का जैसा सिस्टम अनिवार्य है। जब ये दोनों प्रणालियाँ एक साथ काम करेंगी, तो भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगी। यदि कोई दुश्मन विमान S-400 के घेरे को पार कर करीब आता है, तो तुंगुस्का उसे मार गिराएगा। यह रणनीतिक तालमेल भारत की रक्षा प्रणाली को किसी भी घुसपैठ के खिलाफ तैयार रखेगा












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