India-Russia Military Deal: मोदी-पुतिन की इस सीक्रेट डील से उड़ी चीन और अमेरिका की नींद

India-Russia Military Deal: भारत और रूस के बीच हाल ही में हुआ RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौता वैश्विक राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। इस सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सेनाओं को ईंधन, राशन और मरम्मत जैसी सुविधाएं देंगे।

सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए भारत और रूस एक-दूसरे के यहां 3000 सैनिक, 10 लड़ाकू विमान और 5 युद्धपोत तैनात कर सकेंगे। यह समझौता न केवल दोनों देशों के पुराने भरोसे को पुख्ता करता है, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

India Russia Military Deal

भारत-रूस की अटूट रणनीतिक दोस्ती

पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के अनुसार, यह समझौता उन दावों को खारिज करता है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत और रूस के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। RELOS के जरिए रूस की हिंद महासागर में और भारत की आर्कटिक व सुदूर पूर्व के रूसी बंदरगाहों (जैसे व्लादिवोस्तोक) पर स्थायी मौजूदगी का रास्ता साफ हो गया है। यह दिखाता है कि दोनों देशों की 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' आज भी उतनी ही मजबूत है और इसे कोई भी बाहरी दबाव कमजोर नहीं कर सकता।

चीन पर निर्भरता कम करने की रूसी चाल

इस समझौते का एक बड़ा संदेश चीन के लिए है। रूस यह स्पष्ट कर रहा है कि वह अपनी सुरक्षा या संसाधनों के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर नहीं है। रूस के सुदूर पूर्व हिस्से में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी बीजिंग के लिए एक कड़ा संदेश है। मॉस्को ने यह साबित कर दिया है कि वह चीन का 'जूनियर पार्टनर' या पिछलग्गू नहीं है। रूस चाहता है कि एशिया में शक्ति का संतुलन बना रहे और इसमें भारत की भूमिका सबसे अहम है।

ये भी पढे़ं: US Sanctions on China: ट्रंप का चीन पर बड़ा प्रहार! ड्रैगन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर बैन, बीजिंग में हड़कंप

आर्कटिक क्षेत्र में भारत की नई ताकत

पश्चिमी मीडिया अक्सर यह दावा करता था कि रूस आर्कटिक क्षेत्र में चीन को हावी होने देगा, लेकिन RELOS ने इन दावों को गलत साबित कर दिया है। अब भारत को रूस के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक बंदरगाहों तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे न केवल भारत की सैन्य पहुंच बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी भारत वहां एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरेगा। रूस ने भारत को वह जगह दी है जो उसने चीन को भी नहीं दी।

ये भी पढे़ं: Iran America War: ट्रंप के दूतों को पाकिस्तान में छोड़, ईरानी विदेश मंत्री पहुंचे रूस, टेंशन में अमेरिका

निवेश और ऊर्जा के नए रास्ते

यूक्रेन युद्ध के बाद लगे प्रतिबंधों के बीच, कई चीनी कंपनियों ने रूस के बड़े प्रोजेक्ट्स से हाथ खींच लिए थे। ऐसे में भारत अब रूस का सबसे भरोसेमंद ऊर्जा भागीदार बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य समझौते के बाद, आर्कटिक के गैस और तेल प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए भारत को प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही, जब प्रतिबंध हटेंगे, तो जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी भारत की मौजूदगी के कारण वहां निवेश करने में अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+