Iran America War: ट्रंप के दूतों को पाकिस्तान में छोड़, ईरानी विदेश मंत्री पहुंचे रूस, टेंशन में अमेरिका

Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची रूस के दौरे पर हैं। पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से इनकार करने के बाद अराघची का सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर मौजूदा संकट पर चर्चा कर सकते हैं। यह दौरा तब हो रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं और युद्धविराम टूटने का खतरा मंडरा रहा है।

Iran America War

पुतिन से समर्थन की उम्मीद

ईरान और रूस के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं। मौजूदा संकट में जब अमेरिका के साथ बातचीत पटरी से उतरती दिख रही है, तब ईरान रूस के प्रभाव का सहारा लेना चाहता है। अराघची की पुतिन से संभावित मुलाकात का मकसद युद्ध की स्थिति में रूस का साथ पक्का करना और मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बनाए रखना है। ईरान जानता है कि रूस जैसे बड़े देश का समर्थन उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती देगा और अमेरिकी दबाव को कम करने में मदद करेगा।

अमेरिका के साथ बातचीत में अड़चन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों से इस्लामाबाद में मिलने से इनकार कर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी 'रेड लाइन्स' यानी परमाणु मुद्दे और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर समझौता नहीं करेगा। हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक लिखित संदेश जरूर भेजा है। इसमें बातचीत की कुछ शर्तें रखी गई हैं, लेकिन आमने-सामने बैठने से फिलहाल मना कर दिया गया है, जिससे शांति वार्ता अधर में लटकी हुई है।

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होर्मुज स्ट्रेट का बड़ा संकट

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। यहाँ से तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई बंद होने से कीमतें आसमान छू रही हैं। जहाँ अमेरिका ने भी यहाँ अपनी नाकेबंदी कर रखी है, वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे हटाने से साफ मना कर दिया है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस रास्ते को खोलने के बदले एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें परमाणु चर्चा को भविष्य के लिए टालने की बात कही गई है।

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ट्रंप का रुख और आगे की राह

तनाव के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान चाहे तो वह सीधे फोन कर सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यात्रा रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि दोबारा युद्ध शुरू होगा। फिलहाल ओमान और पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूस की दखलंदाजी से कोई समाधान निकलता है या फिर ऊर्जा संकट और बढ़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को और नुकसान पहुंचाएगा।

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