‘आपने इतिहास रह दिया विदेश मंत्री जयशंकर’...भारत और मालदीव के बीच अहम समझौते, कई घोषणाएं
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मालदीव के दौरे पर पहुंचे थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच काफी अहम समझौते किए गये हैं।
माले, मार्च 27: मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भारत की "पड़ोसी पहले नीति" का स्वागत किया है, जिसके तहत दोनों देशों ने COVID-19 महामारी के दौरान नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई सहायता सहित अत्यधिक सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त किए हैं। अब्दुल्ला शाहिद, जो जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने मालदीव के साथ एकजुटता से खड़े रहने और वर्षों तक मालदीव का दोस्त और भागीदार बने रहने के लिए भारत को धन्यवाद दिया है।

मालदीव दौरे पर एस. जयशंकर
दरअसल, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मालदीव के दौरे पर पहुंचे थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच काफी अहम समझौते किए गये हैं। वहीं, मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि, "मालदीव भारत की "पड़ोसी पहले नीति" का स्वागत करता है जिसके तहत हमें अत्यधिक सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त हुए हैं। और हम अपनी "भारत प्रथम नीति" के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा संबंध वह है जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है, और एक फलने-फूलने के लिए लगातार जारी रहेगा।' मालदीव के विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा कि, "मैं भारत को कोविड -19 महामारी के दौरान प्रदान की गई सहायता के लिए धन्यवाद देता हूं। हम आभारी हैं कि हम हमेशा जरूरत के समय भारत पर भरोसा कर सकते हैं। हमारे दोनों देशों ने महामारी की कठिनाइयों और त्रासदियों का अनुभव किया है, लेकिन हम उभर रहे हैं एक साथ मजबूत हो रहे हैं।'

भारत को दिया धन्यवाद
मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि, "मैं भारत सरकार और भारत के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि वे हमारे साथ एकजुटता के साथ खड़े रहे और वर्षों तक हमारे दोस्त और भागीदार बने रहे। हमारे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध और मजबूत होते रहें।" आपको बता दें कि, शनिवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मालदीव के अपने समकक्ष से निमंत्रण मिलने के बाद 26 मार्च से 27 मार्च तक दो दिवसीय यात्रा पर मालदीव गए थे।
भारत के लिए काफी अहम मालदीव
भारत चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए हिंद महासागर में दो प्रमुख पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है, लिहाजा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मालदीव की अपनी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री अब्दुल्ला के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए। द्विपक्षीय वार्ता के बाद जयशंकर ने कहा कि, "मैं एक साल से अधिक समय के बाद मालदीव लौटा और बीच के समय में, कोविड के बावजूद, हमारे संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के तहत, हमारे सहयोग ने वास्तव में महामारी के समय और पीड़ा को देखा और झेला है।" भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, 'उन्होंने द्विपक्षीय साझेदारी पर व्यापक चर्चा की और विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं और पहलों का जायजा भी लिया।' जयशंकर ने कहा, "हमने सामाजिक-आर्थिक विकास, व्यापार और निवेश और पर्यटन पर भी बात की है।
भारत-मालदीव में अहम समझौते
भारतीय विदेश मंत्री ने विकास आधारित साझेदारी को दोनों देशों के बीच के रिश्ते का केन्द्रीय स्तंभ बताते हुए कहा कि, "यह एक बहुत ही पारदर्शी साझेदारी है, जो सीधे मालदीव की जरूरतों और प्राथमिकताओं से प्रेरित है। आज, यह सहायता अनुदान, रियायती ऋण, बजटीय सहायता और क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहायता के रूप में $2.6 अरब डॉलर से ज्यादा है।" भारतीय विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद मालदीव के विदेश मंत्री शाहिद ने कहा कि, 'आपने इतिहास रच दिया, विदेश मंत्री एस जयशंकर। यह पहली बार है जब आधिकारिक वार्ता राजधानी माले के बाहर हुई है। उन्होंने कहा कि "लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को मजबूत करना और निर्माण करना राष्ट्रपति सोलिह के प्रशासन की शीर्ष विदेश नीति प्राथमिकताओं में से एक है।" इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने मालदीव के गृहमंत्री से भी मुलाकात की है। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि, 'हमने कानून प्रवर्तन में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहयोग पर चर्चा की। मैं मालदीव के गृहमंत्री की भारत-मालदीव विशेष साझेदारी के लिए उनके मजबूत समर्थन की सराहना करता हूं।'

भारत-मालदीव संबंध
भारत और मालदीव के बीच का संबंध बहुत लंबे अर्से से काफी घनिष्ठ रहा है और हिंद महासागर में मालदीव भारत का रणनीतिक साझेदार भी है। भारत अपने पड़ोसी देशों को जो आर्थिक और अन्य प्रकार की दूसरी मदद करता है, उसका सबसे बड़ा लाभार्थी मालदीव ही रहा है। भारत ने मई 2020 में मालदीव को 580 टन खाद्य सामग्री की आपूर्ति की थी। हालांकि, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में मालदीव-भारत के संबंधों में खटास जरूर आई थी और मालदीव चीन के पक्ष में झुकता नजर आया था, लेकिन मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सालेह के कार्यकाल में फिर से भारत-मालदीव संबंध पटरी पर आ चुके हैं। दरअसल, मालदीव रणनीतिक तौर पर भारत के नजदीक और हिंद महासागर में समुद्री मार्ग पर स्थिति देश है। और चीन भी अपना नियंत्रण मालदीव पर करना चाहता है, ताकि वो हिंद महासागर में अपने कदम बढ़ा सके, लिहाजा मालदीव के साथ बेहतर संबंध बनाना ही भारत के पक्ष में है।












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