इस स्वतंत्रता दिवस पर रुपये की आजाद उड़ान... भारत ने पहली बार UAE को इंडियन करेंसी में किया भुगतान
India-UAE Rupee Payment: भारत जब आजादी का 77वां उत्सव मना रहा है, उस वक्त भारतीय रुपये के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जु़ड़ गई है और भारतीय रुपया, अब इंटरनेशनल बनने की दिशा में निकल चुका है।
भारत सरकार ने सोमवार को कहा है, कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार का निपटान शुरू कर दिया है। भारत सरकार के मुताबिक, भारत के शीर्ष रिफाइनर मध्य पूर्वी देश UAE से दस लाख बैरल तेल की खरीद के लिए रुपये में भुगतान कर रहे हैं।

संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्प ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) को भारतीय करेंसी में भुगतान किया है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह लेनदेन संयुक्त अरब अमीरात के एक स्वर्ण निर्यातक से भारत में एक खरीदार को लगभग 128.4 मिलियन रुपये ($1.54 मिलियन) में 25 किलोग्राम सोने की बिक्री के बाद हुआ है।
रुपया-दिरहम में कारोबारी शुरू
भारत ने इसी साल जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने की सहूलियत मिल गई थी। इस समझौते के बाद दोनों ही देशों के डॉलर में लेनदेन का भुगतान करने से आजादी मिल गई, जिससे यूएई के सामानों पर डॉलर का वैल्यू बढ़ने का प्रभाव अब नहीं पड़ेगा।
15 जुलाई को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गये थे।
एमओयू स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली की शुरुआत करता है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक और संयुक्त अरब अमीरात के सेंट्रल बैंक द्वारा सुविधा प्रदान की जाती है। यह रुपये और दिरहम का उपयोग करके सीमा पार लेनदेन का मार्ग प्रशस्त करता है।
आपको बता दें, कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के संबंध काफी मजबूत हुए हैं और दोनों देशों का लक्ष्य आपसी कारोबार को 100 अरब डॉलर के पार ले जाना है।
2022/23 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 84.5 बिलियन डॉलर था, लिहाजा रुपये में कारोबार के शुरू होने से दोनों ही देशों को काफी फायदे होने वाले हैं।
इसके अलावा, भारत अन्य देशों के साथ समान स्थानीय मुद्रा व्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और भारत की कोशिश, वैश्विक व्यापार में मंदी के बीच रुपये के लेनदेन को बढ़ाते हुए निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि डॉलर का वैल्यू बढ़ने से देश में सामानों की कीमत में जो उछाल आता है, उससे आजादी मिल जाए।
दोनों देशों को होंगे काफी फायदे
दोनों देशों के बीच LCS सिस्टम के शुरू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा लेनदेन के समय और लागत में कमी है। मध्यस्थ मुद्राओं की आवश्यकता को समाप्त करके, दोनों देश विदेशी मुद्रा खर्चों में बचत की उम्मीद कर सकते हैं, जिससे आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
इसके अलावा, राष्ट्रीय मुद्राओं पर निर्भरता से आर्थिक लचीलापन बढ़ने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत होने का अनुमान है। वहीं, स्थानीय मुद्राओं में किसी भी सरप्लस बैलेंस को, कॉर्पोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों और इक्विटी बाजारों सहित विभिन्न स्थानीय परिसंपत्तियों में निवेश किया जा सकता है।
सोने के साथ रुपया-दिरहम ट्रेड का कारोबार शुरू होने के बाद अब दोनों देशों के बीच कच्चे तेल का कारोबार भी स्थानीय मुद्रा में शुरू हो गया है, लिहाजा आने वाले समय में, यूएई से जो तेल आता है, उसपर डॉलर का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
आपको बता दें, कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सोना, रत्न और आभूषण सबसे ज्यादा कारोबार होने वाली वस्तुओं में से एक हैं, ऐसे लेनदेन का सफल निष्पादन इस तंत्र की व्यवहार्यता के लिए एक वसीयतनामा के रूप में काम करता है।












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