फ्रांस ने मोदी सरकार के दावों पर लगाई मुहर, पेरिस में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा प्रस्ताव पास
आतंकवाद को लेकर राजधानी पेरिस में भारत और फ्रांस के बीच अहम बैठक हुई है। जिसमें फ्रांस ने पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए भारत के साथ संयुक्त बयान जारी किया गया है।
पेरिस, नवंबर 17: पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ भारत और फ्रांस ने एक साथ खुलकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। भारत और फ्रांस ने बुधवार को पाकिस्तान में स्थिति सरकार समर्थित आतंकवादी संगठन, जैसे लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), हिजबुल मुजाहिदीन और अल-कायदा जैसे आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की है, और इन आतंकी संगठनों में शामिल आतंकियों को इंसाफ के कटघरे में लाने की मांग की है। (सभी तस्वीर फाइल)

आतंकवाद के खिलाफ भारत-फ्रांस
आतंकवाद को लेकर राजधानी पेरिस में भारत और फ्रांस के बीच अहम बैठक हुई है। जिसमें फ्रांस ने पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए भारत के साथ संयुक्त बयान में कहा कि, सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना निंदनीय कार्रवाई है। इंडिया-फ्रांस ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप ऑन काउंटर टेरेरिज्म की बैठक में फ्रांस ने पाकिस्तान समर्थिक आतंकवाद की जमकर निंदा की है। भारत और फ्रांस द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि, "सभी देशों के लिए यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि, उनके नियंत्रण में आने वाले क्षेत्रों का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाने, आतंकी हमला शुरू करने, आतंकवादी लड़ाकों को आश्रय या प्रशिक्षित करने के लिए नहीं किया जा सकता है"।

पाकिस्तान के खिलाफ भारत का समर्थन
फ्रांस ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों और आतंकी सरगनाओं और आतंकी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत के प्रयासों का लगातार समर्थन किया है। इसके साथ ही फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में भी भारत का बेहद मजबूती के साथ साथ दिया था। भारत और फ्रांस द्वारा बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद विरोधी सहयोग को भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला के रूप में वर्णित किया गया, खास कर इंडो-पैसेफिक क्षेत्र में साझेदारी पर बल दिया गया।

वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक साथ
भारत और फ्रांस द्वारा जारी संयुक्त बयान में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि, दोनों देशों के बीच आतंकवाद को लेकर ये बैठक उस महीने में की जा रही है, जिस महीने में भारत पर पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया था। आपको बता दें कि, साल 2008 में नवंबर महीने में ही पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत पर हमला किया था, जबकि साल 2015 के नवंबर महीने में आतंकियों ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में हमला किया था, जिसकी छठवीं बरसी फ्रांस मना रहा है। इस मौके पर दोनों देशों ने पीड़ितों के साथ एकजपटता व्यक्त की और दोनों आतंकवादी हमलों और "वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ आम लड़ाई में एक साथ खड़े होने के अपने साझा करने" का संकल्प लिया। इसके साथ ही भारत और फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडलों ने यूनाइटेड नेशंस द्वारा घोषित आतंकी संगठनों और आतंकवादियों के खिलाफ जानकारियों को एक दूसरे से साझा किया है। जिसमें तमाम पाकिस्तानी आतंकी संठगन शामिल हैं।

आतंकवाद के खिलाफ संकल्प
इस मौके पर दोनों देशों ने पीड़ितों के साथ एकजपटता व्यक्त की और दोनों आतंकवादी हमलों और "वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ आम लड़ाई में एक साथ खड़े होने के अपने साझा करने" का संकल्प लिया। इसके साथ ही भारत और फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडलों ने यूनाइटेड नेशंस द्वारा घोषित आतंकी संगठनों और आतंकवादियों के खिलाफ जानकारियों को एक दूसरे से साझा किया है। जिसमें तमाम पाकिस्तानी आतंकी संठगन शामिल हैं।

अफगानिस्तान पर भी बातचीत
दोनों देशों के द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि, "यह सुनिश्चित होना चाहिए कि आतंकवादी हमलों में शामिल आतंकियों को जल्द से जल्द इंसाफ के कटघरे में लाया जाए"। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने आतंकवादियों और आतंकी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही भारत और फ्रांस के अधिकारियों के बीच अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी अहम बातचीत की गई है और फ्रांस ने भी इस बात पर जोर दिया है, कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए नहीं होना चाहिए। और अफगानिस्तान का क्षेत्र "क्षेत्रीय या विश्व स्तर पर कट्टरपंथ और आतंकवाद का स्रोत नहीं बनना चाहिए''।












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